हाईकोर्ट का अहम फैसला: उधार मांगे वाहन से हादसा तो चालक मुआवजे का हकदार नहीं, आश्रित नहीं कर सकते दावा
सतनाम को अमृतसर के आर्मी अस्पताल में भर्ती करवाया गया और वहां उसकी हालत बिगड़ने पर उसे जालंधर आर्मी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इसके बाद 28 नवंबर को उसकी जालंधर में मौत हो गई।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि यदि चालक किसी वाहन को उधार लेकर चला रहा हो और उसकी गलती से हादसा हो जाए तो उसके आश्रित बीमा राशि के लिए दावा नहीं कर सकते। हाईकोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल अमृतसर के फैसले पर मुहर लगाते हुए यह आदेश जारी किया है।
2009 में हुआ था हादसा
27 नवंबर, 2009 को सतनाम सिंह अपने भाई के साथ गोइंदवाल साहिब की तरफ जा रहे थे। इसी बीच उनके निकट से एक वाहन गुजरा जिसकी हेडलाइट के कारण सतनाम सिंह ने वाहन से नियंत्रण खो दिया। उनकी बाइक अनियंत्रित होकर ईंटों से भरी रेहड़ी से टकरा गई और सतनाम सिंह बुरी तरह से घायल हो गया।
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सतनाम को अमृतसर के आर्मी अस्पताल में भर्ती करवाया गया और वहां उसकी हालत बिगड़ने पर उसे जालंधर आर्मी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इसके बाद 28 नवंबर को उसकी जालंधर में मौत हो गई। सतनाम मौत के समय 24 साल का था और आर्मी में सिपाही था।
सात लाख का मुआवजा मांगा था
सतनाम की मां याचिकाकर्ता जसपाल कौर और अन्य परिजनों ने सात लाख रुपये मुआवजे की मांग को लेकर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में दावा किया था, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी। बीमा कंपनी ने दावे का विरोध करते हुए कहा कि वाहन असल में बलबीर सिंह का था जिसे सतनाम सिंह ने उधार लिया था। ऐसे में वह बीमा कंपनी की शर्त के अनुसार मुआवजे का दावा नहीं कर सकते।
हाईकोर्ट ने कहा कि एमएसीटी ने दावा खारिज करने का सही फैसला सुनाया है। वाहन उधार पर मांगने के बाद लापरवाही से हादसा होने की स्थिति में बीमा कंपनी को मुआवजा देने का आदेश नहीं दिया जा सकता।