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पति की आत्महत्या मामले में पत्नी को जमानत: HC ने कहा-वैवाहिक कलह मात्र से नहीं बनता उकसाने का अपराध
Wed, 09 Jul 2025 01:53 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 09 Jul 2025 01:53 PM IST
सार
न्यायमूर्ति संदीप मौदगिल ने कहा कि यह माना जा सकता है कि पति-पत्नी के बीच गलतफहमियों और झगड़ों के कारण संबंध बिगड़ सकते हैं, लेकिन जब तक कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य न हो, उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा गंभीर अपराध नहीं माना जा सकता।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पति की आत्महत्या के मामले में आरोपी पत्नी को नियमित जमानत दे दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक जीवन की गलतफहमियां और आपसी झगड़े मात्र से आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध सिद्ध नहीं होता।
न्यायमूर्ति संदीप मौदगिल ने कहा कि यह माना जा सकता है कि पति-पत्नी के बीच गलतफहमियों और झगड़ों के कारण संबंध बिगड़ सकते हैं, लेकिन जब तक कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य न हो, उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा गंभीर अपराध नहीं माना जा सकता।
मामले में अभियोजन पक्ष का कहना था कि मृतक पति अपनी पत्नी के किसी अन्य पुरुष से संबंधों के कारण मानसिक तनाव में रहता था और इसी के चलते उसने आत्महत्या कर ली। हालांकि अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि न तो कोई सुसाइड नोट बरामद हुआ है और न ही अभियोजन यह साबित कर पाया कि आरोपी पत्नी ने किसी प्रकार की प्रत्यक्ष उकसाहट दी।
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अदालत ने यह भी नोट किया कि मुक्तसर साहिब निवासी कुलविंदर कौर पहले से एक साल एक दिन की सजा काट चुकी हैं और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, जबकि इस मामले में सह-आरोपी को पहले ही जमानत दी जा चुकी है।
न्यायमूर्ति मौदगिल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए मशहूर कवि ऑस्कर वाइल्ड की काव्य पंक्तियों को भी अपने आदेश में शामिल किया। इन टिप्पणियों और तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने कुलविंदर कौर की नियमित जमानत याचिका मंजूर कर ली।
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न्यायमूर्ति संदीप मौदगिल ने कहा कि यह माना जा सकता है कि पति-पत्नी के बीच गलतफहमियों और झगड़ों के कारण संबंध बिगड़ सकते हैं, लेकिन जब तक कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य न हो, उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा गंभीर अपराध नहीं माना जा सकता।
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मामले में अभियोजन पक्ष का कहना था कि मृतक पति अपनी पत्नी के किसी अन्य पुरुष से संबंधों के कारण मानसिक तनाव में रहता था और इसी के चलते उसने आत्महत्या कर ली। हालांकि अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि न तो कोई सुसाइड नोट बरामद हुआ है और न ही अभियोजन यह साबित कर पाया कि आरोपी पत्नी ने किसी प्रकार की प्रत्यक्ष उकसाहट दी।
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अदालत ने यह भी नोट किया कि मुक्तसर साहिब निवासी कुलविंदर कौर पहले से एक साल एक दिन की सजा काट चुकी हैं और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, जबकि इस मामले में सह-आरोपी को पहले ही जमानत दी जा चुकी है।
न्यायमूर्ति मौदगिल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए मशहूर कवि ऑस्कर वाइल्ड की काव्य पंक्तियों को भी अपने आदेश में शामिल किया। इन टिप्पणियों और तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने कुलविंदर कौर की नियमित जमानत याचिका मंजूर कर ली।