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Punjab: ज्ञानी कुलदीप सिंह ने संभाला तख्त श्री केशगढ़ साहिब के जत्थेदार का पद, रात तीन बजे हुई दस्तारबंदी
Mon, 10 Mar 2025 01:26 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, आनंदपुर साहिब
संवाद न्यूज एजेंसी, आनंदपुर साहिब
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 10 Mar 2025 01:26 PM IST
सार
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की कार्यकारिणी की ओर से श्री अकाल तख्त साहिब और तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदारों को हटाने का विरोध तेज हो गया है। इसी बीच सोमवार को ज्ञानी कुलदीप सिंह की तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार के ताैर पर दस्तारबंदी कर दी गई।
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ज्ञानी कुलदीप सिंह जत्थेदार नियुक्त
- फोटो : संवाद
विस्तार
निहंग संगठनों के विरोध के बीच रविवार रात करीब 2.50 बजे ज्ञानी कुलदीप सिंह की तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार के ताैर पर नियुक्ति कर दी गई।
श्री अकाल तख्त साहिब और श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदारों को हटाने के विरोध में अब निहंग जत्थेबंदियां भी उतर आईं हैं। इससे पंथक विवाद गहरा गया है। निहंग जत्थेबंदियों ने एकजुट होकर प्रस्ताव पारित किया है कि एसजीपीसी की ओर से नियुक्त किए गए किसी भी नए जत्थेदार की दस्तारबंदी की रस्म नहीं होने दी जाएगी। वे इसका विरोध करेंगे। प्रस्ताव में जत्थेबंदियों ने कहा कि एसजीपीसी ने सिख जत्थेबंदियों की स्वीकृति व सिख संगत की सहमति के बिना ही दो जत्थेदारों को नियुक्त किया है।
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श्री अकाल तख्त साहिब और श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदारों को हटाने के विरोध में अब निहंग जत्थेबंदियां भी उतर आईं हैं। इससे पंथक विवाद गहरा गया है। निहंग जत्थेबंदियों ने एकजुट होकर प्रस्ताव पारित किया है कि एसजीपीसी की ओर से नियुक्त किए गए किसी भी नए जत्थेदार की दस्तारबंदी की रस्म नहीं होने दी जाएगी। वे इसका विरोध करेंगे। प्रस्ताव में जत्थेबंदियों ने कहा कि एसजीपीसी ने सिख जत्थेबंदियों की स्वीकृति व सिख संगत की सहमति के बिना ही दो जत्थेदारों को नियुक्त किया है।
ग्रेवाल बोले-कोई विवाद नहीं
केसगढ़ साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज की नियुक्ति का निहंग संगठनों ने विरोध किया है। इस पर एसजीपीसी सदस्य गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने बड़ा बयान दिया। ग्रेवाल ने कहा कि दिल्ली के तख्त पर बैठे हुए लोग सिख पंथ को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन निहंग संगठन सिख पंथ का ऐसा अंग है, जिसे तोड़ा नहीं जा सकता। गुरु साहिब का धार्मिक त्योहार होला मोहल्ला मिलजुल कर मनाया जाएगा। विचारधारा को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन निहंग सिंह संगठनों के साथ कोई भी विवाद नहीं है।
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जत्थेदारों की नियुक्ति और सेवानिवृत्ति के नियम बनाए जाएं
बुड्ढा दल के महासचिव दिलजीत सिंह बेदी ने कहा कि बुड्ढा दल प्रमुख बाबा बलबीर सिंह अकाली 96 करोड़ी ने कहा है कि पंद्रह से बीस साल पहले जत्थेदारों की नियुक्ति और सेवानिवृत्ति के संबंध में खालसा पंथ की सहमति से नियम निर्धारित करने की मांग की जा रही है। इस संबंध में नियम क्यों नहीं बनाए गए? जानबूझकर दरकिनार करना एक ऐसा मामला है, जो पंथ को असमंजस में रखता है। जो तरीका अपनाया गया है, उसके बारे में सभी निहंग सिंह संगठनों ने मिलकर फैसला लिया है कि कोई भी नया जत्थेदार स्वीकार नहीं किया जाएगा। किसी को भी दस्तारबंदी की इजाजत नहीं दी जाएगी।उन्होंने कहा कि गुरमीत सिंह राम रहीम को माफी देने का फैसला भी गलत था, फिर सामुदायिक विरोध के कारण इसे शिरोमणि कमेटी ने वापस ले लिया था। इसलिए हम सामूहिक रूप से मांग करते हैं कि जत्थेदारों को हटाने के निर्णय को तुरंत वापस लिया जाए। जत्थेदार रघबीर सिंह और सुल्तान सिंह को पहले की तरह श्री अकाल तख्त साहिब, तख्त श्री केसगढ़ साहिब और श्री आनंदपुर साहिब में सेवा करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे किसी भी नए जत्थेदार की ताजपोशी नहीं होने देंगे। उन्होंने मांग की है कि एसजीपीसी की कार्यकारिणी इस फैसले को तुरंत वापस ले। कार्यकारिणी के फैसले ने सारी सिख कौम को शर्मासार किया है और कौम के अंदर दुविधा पैदा कर दी है।