Budget 2025: बजट में सभी जिलों में डे-केयर कैंसर केंद्र बनाने का एलान, पंजाब को कैंसर से जंग में मिलेगी मदद
पंजाब में कैंसर से निपटने के लिए हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की जरुरत है। कैंसर से मालवा क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित है। इसी तरह ब्रेस्ट व सर्वाइकल कैंसर की मृत्यु दर में भी तेजी से बढ़ोत्तरी होती जा रही है।
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पंजाब में पिछले कुछ समय से कैंसर घातक रूप धारण करता जा रहा है। खासकर मालवा क्षेत्र इससे बुरी तरह प्रभावित है। ब्रेस्ट व सर्वाइकल कैंसर की मृत्यु दर में भी तेजी से बढ़ोत्तरी होती जा रही है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से संसद में पेश किए गए आम बजट में सभी जिलों में डे-केयर कैंसर केंद्र खोलने की घोषणा की गई है। वर्ष 2025-26 में 200 केंद्र स्थापित करने की योजना है। कैंसर से लड़ाई में पंजाब के लिए यह परियोजना बड़ी अहम है। इससे राज्य में कैंसर की समय पर स्क्रीनिंग व इलाज प्रदान करने में मदद मिलेगी। अभी फिलहाल स्क्रीनिंग में देरी के चलते ही कैंसर की मृत्यु दर में तेजी से बढ़ोत्तरी होती जा रही है।
हाल ही में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम ने संसद में एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसके अनुसार पिछले 10 वर्षों में ब्रेस्ट कैंसर की 25.8 व सर्वाइकल कैंसर की मृत्यु दर में 26.26 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है, जिसने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसी तरह बजट में कैंसर समेत अन्य दुर्लभ बीमारियों के लिए 36 जीवन रक्षक दवाओं को बेसिक कस्टम डयूटी से पूरी तरह से छूट दे दी गई है। इससे प्रदेश में कैंसर के इलाज का बोझ कम होगा।
कैंसर बढ़ने के प्रमुख कारण
प्रदेश में कैंसर के मरीज बढ़ने का कोई एक कारण नहीं है, बल्कि इसके कई कारण है। इसी वजह से सरकार को भी कैंसर को कम करने के लिए काफी जद्दोजहद का सामना करना पड़ रहा है।
- फसलों में हानिकारक कीटनाशकों का उपयोग
- दूषित पानी व खाद्य पदार्थों में भारी मिलावट
- खराब जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि की कमी
- महिलाओं में जल्दी मासिक धर्म, देरी से विवाह और जागरूकता की कमी।
- सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस(एचपीवी) के संक्रमण के कारण होता है।
पंजाब में कैंसर की समय पर स्क्रीनिंग न होने के चलते ही मृत्यु दर में बढ़ोत्तरी होती जा रही है। डे-केयर कैंसर केंद्र स्थापित होने से पहले तो स्क्रीनिंग बढ़ाने में मदद मिलेगी, क्योंकि इससे स्टाफ भी बढ़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर विशेष कैंप लगाए जा सकेंगे। साथ ही समय पर इलाज भी सुनिश्चित हो सकेगा। हर जिले में डे केंद्र होने से लोग खुद भी स्क्रीनिंग करवा सकेंगे। - श्रुति शर्मा, डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, पीजीआई सैटेलाइट सेंटर संगरूर।