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पंजाब में नशा विरोधी मुहिम: डेढ़ साल में 20.64 करोड़ की दवाएं जब्त, 520 केमिस्टों के लाइसेंस निलंबित

Fri, 16 Oct 2026 02:39 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 16 Oct 2026 02:39 PM IST
सार

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के निर्देशों के तहत दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए नियमित तौर पर निरीक्षण किए जा रहे हैं। विभाग के अनुसार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ 54 मामले दर्ज किए गए, जबकि 35 मामलों में दोषियों को सजा दिलाई गई और जुर्माना लगाया गया है।

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Anti-drug drive in Punjab Drugs worth ₹20.64 crore seized licenses of 520 chemists suspended
डाॅ. बलबीर सिंह - फोटो : X @AAPbalbir

विस्तार

पंजाब सरकार ने नशा विरोधी कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ डेढ़ साल के दौरान विशेष अभियान चलाया है। इस दौरान फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन की ड्रग विंग ने 1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच 16,788 बार चेकिंग की और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और ड्रग्स रूल्स 1945 का उल्लंघन करने के लिए 214 लाइसेंस और बिना लाइसेंस वाली फर्मों से 20.64 करोड़ रुपये की दवाएं जब्त की, जबकि 520 केमिस्ट के लाइसेंस निलंबित किए गए और 22 केमिस्ट के लाइसेंस रद कर दिए गए हैं।
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स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के निर्देशों के तहत दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए नियमित तौर पर निरीक्षण किए जा रहे हैं। विभाग के अनुसार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ 54 मामले दर्ज किए गए, जबकि 35 मामलों में दोषियों को सजा दिलाई गई और जुर्माना लगाया गया है। अभी राज्य भर की अलग-अलग जिला अदालतों में कुल 650 केस लंबित हैं।
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नशे की दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 13 मई 2026 को अधिसूचना जारी करके प्रेगाबालिन को ड्रग्स रूल्स 1945 के शेड्यूल एच1 में शामिल किया है। यह नियम 12 नवंबर 2026 से लागू होगा। राज्य सरकार ने इसके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए रेगुलेटरी दखल की मांग करते हुए कई बार केंद्र के समक्ष अलग-अलग लेटर के जरिये यह मुद्दा उठाया था। साथ ही राज्य ने ई-फार्मेसी के जरिये ऑनलाइन दवाओं की बिक्री को कंट्रोल करने वाले नियमों की कमी के बारे में भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के सामने चिंता जताई है क्योंकि नशे के तौर पर इस्तेमाल की जा सकने वाली दवाएं आसानी से ऑनलाइन मिल जाती हैं, जिससे नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने की कोशिशों को नुकसान पहुंच रहा है।
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राज्य सरकार ने राज्य में बिक्री के लिए आठ तरह के ड्रग फॉर्मूलेशन के स्टॉक पर बैन लगा दिया है। हालांकि, ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के लिए कोई सही रेगुलेटरी फ्रेमवर्क न होने से अभी भी कानून को असरदार तरीके से लागू करने में रुकावट आ रही है। इसी तरह राज्य ने दवाओं की आसमान छूती कीमतों और अलग-अलग कंपनियों की बनाई दवाओं की कीमतों में अंतर का मुद्दा भी उठाया है।
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