पेपर लीक का एकदम नया तरीका: 7वीं के छात्र ने प्रिंसिपल को भेजा मेल, लिखा- मैं वाइस प्रिंसिपल, प्रश्नपत्र भेजो
इस शातिर छात्र ने वाइस प्रिंसिपल के अंदाज को बखूबी कॉपी किया। उसने ऐसा ईमेल लिखा, जिसमें भाषा और शब्दों का चयन इतना सटीक था कि प्रिंसिपल को जरा भी शक नहीं हुआ।
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चंडीगढ़ के एक मशहूर निजी स्कूल में ऐसा कारनामा हुआ, जिसने शिक्षकों और अभिभावकों को दंग कर दिया। सातवीं कक्षा का एक मासूम-सा दिखने वाला छात्र अपनी चतुराई से प्रिंसिपल को चकमा देकर प्रश्नपत्र हासिल करने में कामयाब हो गया। लेकिन यह राज तब खुला, जब परीक्षा के दिन असलियत सामने आई। स्कूल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, और मामला साइबर क्राइम की दुनिया में पहुंच गया।
चालाकी से भेजा गया फर्जी ईमेल
इस शातिर छात्र ने वाइस प्रिंसिपल के अंदाज को बखूबी कॉपी किया। उसने ऐसा ईमेल लिखा, जिसमें भाषा और शब्दों का चयन इतना सटीक था कि प्रिंसिपल को जरा भी शक नहीं हुआ। प्रिंसिपल ने बिना वक्त गंवाए प्रश्नपत्र ईमेल कर दिया। मगर अगले दिन परीक्षा के समय जब प्रश्नपत्र कक्षा में नहीं पहुंचा, तो हड़कंप मच गया। वाइस प्रिंसिपल ने साफ कहा कि उन्होंने कोई ईमेल भेजा ही नहीं। यह सुन प्रिंसिपल के होश उड़ गए।
साइबर जांच ने खोला राज
स्कूल प्रबंधन ने तुरंत साइबर क्राइम पुलिस को शिकायत दी। साइबर सेल ने ईमेल की तहकीकात शुरू की और पता चला कि यह करतूत स्कूल के ही एक छात्र की थी। इस चालाक छात्र ने वाइस प्रिंसिपल के ईमेल से मिलती-जुलती फर्जी आईडी बनाई और उसी से प्रिंसिपल को मेल भेजा। शिक्षकों को यह देख हैरानी हुई कि इतनी कम उम्र में कोई इतना शातिर कैसे हो सकता है।
नाबालिग छात्र की करतूत, कोर्ट तक पहुंचा मामला
पुलिस ने तकनीकी जांच के बाद सातवीं कक्षा के इस नाबालिग छात्र को पकड़ लिया। उसे जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया। इस घटना ने स्कूल में हड़कंप मचा दिया और अभिभावकों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया।