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'लेडी विकी डोनर' पर पंजाब में बढ़ा बवाल
फिरोजपुर/मक्खू/ब्यूरो
Updated Mon, 03 Jun 2013 12:00 PM IST
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आशा वर्करों को भले ही ग्रामीण समुदाय को स्वास्थ्य संबंधी मदद देने के उद्देश्य से रखा गया है मगर गांव की भोली-भाली महिलाओं को बरगला कर उनके अंडाणुओं का सौदा करने के धंधे में सक्रिय हैं।
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निजी फर्टिलिटी सेंटर इन आशा वर्करों को हर महिला पर तीन हजार रुपये देते हैं।
मोगा के टेस्ट ट्यूब बेबी अस्पताल पर इलाके की एक महिला द्वारा गुपचुप तरीके से अंडाणु चुराने का आरोप लगाए जाने के बाद इस मामले में कुछ नए रहस्य उजागर हुए हैं।
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सिविल सर्जन के आदेश पर एक तीन सदस्यीय कमेटी इस मामले की जांच कर रही है। गांव जीरा निवासी बलकार सिंह की पत्नी कंवलजीत कौर ने इस मामले को उजागर किया था।
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अंडाणु देने वाली को सात हजार
एक महिला से अंडाणु लेने पर अस्पताल कुल दस हजार रुपये खर्च करता है। इसमें से सात हजार उस महिला को दिए जाते हैं बाकी तीन हजार उसे लाने वाली आशा वर्कर को।
गांव फेरोके निवासी आशा वर्कर सर्बजीत कौर का कहना है कि वह पिछले दो साल से गांव मेहर सिंह वाला स्थित सब-सेंटर पर तैनात है। वह पिछले छह माह में तकरीबन आधा दर्जन महिलाओं को मोगा के टेस्ट ट्यूब बेबी अस्पताल में उनकी मर्जी से अंडाणु देने के संबंध में ले जा चुकी है।
कंवलजीत कौर ने भी उससे संपर्क किया था। जीरा निवासी चन्नी नाम की महिला ने उसे कंवलजीत कौर व उसके पति बलकार सिंह से मुलाकात करवाई। आर्थिक स्थिति कमजोर होने का हवाले देते हुए उसने अंडाणु देने की पेशकश की थी।
पंद्रह दिन तक चली प्रक्रिया
सर्बजीत कौर ने बताया कि दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मोगा के उक्त अस्पताल के डाक्टरों ने कंवलजीत कौर को टीके लगाना शुरू किए। ये प्रक्रिया 15 फरवरी से लेकर दो मार्च तक चली।
दूसरी ओर कंवलजीत कौर के पति बलकार सिंह ने कहा कि उसकी पत्नी के पेट में दर्द रहता था। इसीलिए वह आशा वर्कर सर्बजीत कौर को साथ लेकर मोगा के उक्त अस्पताल में स्कैनिंग कराने के लिए गए थे।
इन्होंने कहा कि पंद्रह टीके लगेंगे। इलाज के लिए अस्पताल वालों ने पंद्रह-सोलह हजार रुपये का खर्च बताया। उसने उक्त धनराशि आशा वर्कर को दे दी थी। उसने अस्पताल वालों को दी या नहीं दी इसके बारे उसे कुछ नहीं मालूम है।
मोगा के अस्पताल के डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि कंवलजीत कौर और उसका पति बलकार हमारे अस्पताल में आए थे और अंडाणु देने की इच्छा व्यक्त की थी। दस्तावेज पूरे होने के बाद 15 फरवरी से दो मार्च तक उनका प्रोसेस चला। इस कार्य के लिए इन्हें दस हजार रुपये दिए गए। अब बिना वजह बलकार उन्हें ब्लैकमेल करने पर तुला है।
वहीं, सिविल सर्जन डॉ अमरजीत कौर का कहना है कि महिला के अंडाणु बेचने के मामले की जांच चल रही है। रिपोर्ट जल्द आएगी। इस मामले में आशा वर्कर अगर दोषी पाई जाती है तो उसे हटा दिया जाएगा। जिस भी एसएमओ के अधीन वह कार्य कर रही है, उसे कार्रवाई को कहा जाएगा।