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Amritsar News: तख्त साहिब के आदेश रद्द करने से गहराने लगा पंथक संकट

Mon, 26 May 2025 01:13 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 26 May 2025 01:13 AM IST
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The Panthic crisis started deepening after the cancellation of the orders of Takht Sahib
-आदेशों के मामले में पंथक मर्यादा, तख्तों की गरिमा व श्रद्धालुओं की आस्था हो सकती है प्रभावित
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पंकज शर्मा



अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों को तख्त पटना साहिब के पांच प्यारों की ओर से रद्द किए जाने का विवाद गहराने लगा है। तख्तों के मध्य पैदा हुआ विवाद आने वाले समय में सिख कौम के लिए नई पंथक मुसीबत बन सकते हैं। एक-दूसरे तख्त के प्रबंधन में हस्तक्षेप भी दिखाई दे रहा है। इसका तख्त साहिबों के प्रबंधकों की ओर से विरोध किया जा रहा है। सिख पंथ में हाल में ही पैदा हुए नए विवादों को हल करवाने की कोशिश हो रही है। इसको लेकर एसजीपीसी का प्रतिनिधिमंडल पटना साहिब के पांच प्यारों को भी मिलने जा रहा है।

श्री अकाल तख्त साहिब और तख्त श्री पटना साहिब के बीच जारी हुक्मनामों को लेकर टकराव की स्थिति कोई पहली बार नहीं बनी है, लेकिन यह मामला सिख पंथ के लिए गंभीरता का विषय बन गया है, क्योंकि इससे पांच तख्तों की एकता, गरिमा और मर्यादा पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। हाल ही में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की ओर से एक हुक्मनामा जारी किया गया था, जिसमें तख्त श्री पटना साहिब के जत्थेदार और प्रबंधक कमेटी से जुड़ी कुछ कार्यप्रणालियों पर सवाल उठाए गए। इसके जवाब में पटना साहिब के पांच प्यारों ने न सिर्फ अकाल तख्त के हुक्मनामे को रद्द घोषित किया, बल्कि जत्थेदार कुलदीप सिंह और जत्थेदार टेक सिंह धनौला की आलोचना भी की। इसमें सुखबीर बादल को साजिश का हिस्सा बता जत्थेदार कुलदीप सिंह, जत्थेदार धनौला और सुखबीर बादल को पटना साहिब पर पेश होकर अपना स्पष्टीकरण देने का आदेश दे दिया। यह भी कहा कि अकाल तख्त का हुक्मनामा पूर्वाग्रहपूर्ण और मर्यादा के खिलाफ है।
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पटना साहिब प्रबंधक कमेटी चाहती है कि उनके चुनाव, नियुक्ति और कार्यप्रणाली में अकाल तख्त के निर्देशों का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए, क्योंकि तख्त पटना साहिब और तख्त नादेड़ साहिब के कार्य प्रबंध एसजीपीसी के प्रबंधों अधीन नहीं आते। इन दोनों तख्त की मर्यादा की एसजीपीसी से अलग है। क्योंकि बहुत समय पहले यह आदेश हुआ था कि पांच तख्त साहिबों के जत्थेदार अपने अपने अधिकार क्षेत्र में होने वाली सिख धार्मिक मुश्किलों को स्वयं हल करें।
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तख्तों की अपनी पहचान



अकाल तख्त को सर्वोच्च धार्मिक सत्ता माना जाता है, लेकिन बाकी चार तख्त- पटना साहिब, नांदेड़ (हजूर साहिब), दमदमा साहिब, और केसगढ़ साहिब की अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान है। ऐसे में पटना साहिब अपने निर्णयों में स्वतंत्रता की बात करता है। तख्त पटना साहिब में नियुक्त पांच प्यारों ने अकाल तख्त के फैसले को न मानकर टकराव को बढ़ा दिया। यह परंपरा में असाधारण घटना मानी जा रही है, क्योंकि एसजीपीसी के अनुसार पांच प्यारों की भूमिका आमतौर पर सलाहकार या मर्यादा निर्वाह तक सीमित मानी जाती रही है।

पहले भी रहे हैं मतभेद



इतिहास में कुछ अवसरों पर तख्तों के बीच मतभेद देखे गए हैं। 2008 में पटना साहिब तख्त पर जत्थेदारों की नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें एसजीपीसी और अकाल तख्त के निर्देशों की अनदेखी की गई। हजूर साहिब नांदेड़ (महाराष्ट्र) में मर्यादा और रीतियों को लेकर अकाल तख्त से कई बार मतभेद उभर चुके हैं। जैसे कि वहां शस्त्र पूजन या दीप प्रज्वलन जैसी परंपराएं, जिन्हें अकाल तख्त ने हिंदू प्रथा कहकर नकारा था। दशम ग्रंथ पर मतभेद भी अकाल तख्त और अन्य तख्तों के बीच विभाजन का कारण बने हैं। जब ज्ञानी जोगिंदर सिंह वेदांती के खिलाफ अकाल तख्त के पांच प्यारों ने आदेश जारी कर दिया था, तो एसजीपीसी ने उसे स्वीकार नहीं किया। अब उनके पांच प्यारों के खिलाफ अकाल तख्त, तख्त केसगढ़ साहिब और तख्त दमदमा साहिब के पांच प्यारों के खिलाफ हुक्मनामे जारी करवाए जा रहे हैं, तो वह कैसे स्वीकार किए जा रहे हैं।


पटना साहिब जाएगा प्रतिनिधिमंडल



एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की ओर से गठित प्रतिनिधिमंडल में एसजीपीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क, सदस्य भाई गुरचरण सिंह ग्रेवाल, गुरबचन सिंह करमूवाला को शामिल किया गया है। इसका समन्वयक उप सचिव जसविंदर सिंह जस्सी को नियुक्त किया गया है। शिरोमणि कमेटी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह के ओएसडी सतबीर सिंह ने बताया कि गठित प्रतिनिधिमंडल जल्द ही तख्त श्री पटना साहिब जाकर तख्त साहिब की प्रबंधक कमेटी और पांच प्यारे साहिबानों से हुक्मनामे विवाद पर बातचीत करेगा।
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