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होशियारपुर के टांडा इलाके के 22 वर्षीय गुरप्रीत सिंह का शव दुबई से भारत लाया गया
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अमृतसर। होशियारपुर जिला के टांडा इलाके के गांव मूनक कलां के गुरप्रीत सिंह (22) का शव 15 दिन बाद वीरवार को दुबई से भारत लाया गया। दुबई की 14 मंजिला इमारत से गिरने से गुरप्रीत की मौत हुई है। सरबत द भला ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. एसपीएस ओबराय के प्रयास से शव लाया गया है।
ट्रस्ट की स्थानीय टीम ने श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से शव को प्राप्त कर परिजनों को सौंपा। डॉ. एसपीएस ओबराय ने बताया कि परिवार को आर्थिक तंगी से निकालने के लिए पंजाब से बहुत युवक लालची एजेंटों के चुंगल में फंसकर खाड़ी देशों में पहुंच जाते हैं। वहां नौकरी न मिलने पर उन्हें परेशान होना पड़ता है, वहीं कई बार उनकी जान तक चली जाती है। गुरप्रीत सिंह 16 मार्च को काम की तलाश में टूरिस्ट वीजा पर दुबई गया था।
अभी वह काम की तलाश कर ही रहा था कि 5 अप्रैल को दुबई की एक बहुमंजिला इमारत गिरने से उसकी मौत हो गई। समाज सेवी जत्थेदार दविंदर सिंह ने उनसे संपर्क कर शव भारत लाने में मदद मांगी। इसके बाद निजी सचिव बलदीप सिंह चाहल की देखरेख में भारतीय दूतावास के सहयोग से शव को लागया गया।
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डॉ. ओबराय ने कहा कि दुबई जाने से पहले गुरप्रीत यूक्रेन गया था। उसे उसके दादा की तबीयत खराब होने की सूचना मिली, तो रूस हमले के दो दिन पहले ही वह भारत लौट आया था। इसके बाद 16 मार्च को वह दुबई गया था।
अब तक भारत पहुंचाए जा चुके हैं 303 शव
ट्रस्ट के अध्यक्ष सुखजिंदर सिंह हेर, सलाहकार सुखदीप सिद्धू, महासचिव मनप्रीत संधू और खजांची नवजीत घई ने बताया कि अब तक 303 शव भारत पहुंचाए जा चुके हैं। इसके अलावा मृतक के दादा को गुजारे के लिए 1500 रुपये प्रति माह पेंशन देने का फैसला लिया गया है। शव लेने पहुंचे दविंदर सिंह, हरप्रीत सिंह, मनोहर सिंह ने भी ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. ओबराय का धन्यवाद किया।
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ट्रस्ट की स्थानीय टीम ने श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से शव को प्राप्त कर परिजनों को सौंपा। डॉ. एसपीएस ओबराय ने बताया कि परिवार को आर्थिक तंगी से निकालने के लिए पंजाब से बहुत युवक लालची एजेंटों के चुंगल में फंसकर खाड़ी देशों में पहुंच जाते हैं। वहां नौकरी न मिलने पर उन्हें परेशान होना पड़ता है, वहीं कई बार उनकी जान तक चली जाती है। गुरप्रीत सिंह 16 मार्च को काम की तलाश में टूरिस्ट वीजा पर दुबई गया था।
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अभी वह काम की तलाश कर ही रहा था कि 5 अप्रैल को दुबई की एक बहुमंजिला इमारत गिरने से उसकी मौत हो गई। समाज सेवी जत्थेदार दविंदर सिंह ने उनसे संपर्क कर शव भारत लाने में मदद मांगी। इसके बाद निजी सचिव बलदीप सिंह चाहल की देखरेख में भारतीय दूतावास के सहयोग से शव को लागया गया।
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डॉ. ओबराय ने कहा कि दुबई जाने से पहले गुरप्रीत यूक्रेन गया था। उसे उसके दादा की तबीयत खराब होने की सूचना मिली, तो रूस हमले के दो दिन पहले ही वह भारत लौट आया था। इसके बाद 16 मार्च को वह दुबई गया था।
अब तक भारत पहुंचाए जा चुके हैं 303 शव
ट्रस्ट के अध्यक्ष सुखजिंदर सिंह हेर, सलाहकार सुखदीप सिद्धू, महासचिव मनप्रीत संधू और खजांची नवजीत घई ने बताया कि अब तक 303 शव भारत पहुंचाए जा चुके हैं। इसके अलावा मृतक के दादा को गुजारे के लिए 1500 रुपये प्रति माह पेंशन देने का फैसला लिया गया है। शव लेने पहुंचे दविंदर सिंह, हरप्रीत सिंह, मनोहर सिंह ने भी ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. ओबराय का धन्यवाद किया।