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Amritsar: बंदी सिखों की रिहाई के लिए एसजीपीसी करेगी प्रदर्शन, काली पगड़ी बांध जताएंगे रोष

Thu, 11 Aug 2022 12:24 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 11 Aug 2022 12:24 PM IST
सार

शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट धामी ने बताया कि देश की आजादी में 80 फीसदी से ज्यादा सिखों ने कुर्बानी दी, लेकिन दुख की बात है कि 75 साल से सिखों को अलग-थलग महसूस करवाया जा रहा है।

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SGPC decided to protest on occasion of 75th anniversary of independence for release of Sikhs in jail
एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी। - फोटो : फाइल

विस्तार

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने जेलों में बंद सिखों की रिहाई के लिए आजादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर जिला स्तर पर रोष प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में 13 अगस्त को सुबह 10 बजे सभी जिलों के डीसी को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस दौरान शिरोमणि कमेटी के सदस्य और कर्मचारी काली पगड़ी पहनेंगे। यह फैसला एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी के नेतृत्व में अमृतसर में हुई एसजीपीसी कार्यकारिणी कमेटी की बैठक में लिया गया।

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शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट धामी ने बैठक के बाद बताया कि देश की आजादी में 80 फीसदी से ज्यादा सिखों ने कुर्बानी दी, लेकिन दुख की बात है कि 75 साल से सिखों को अलग-थलग महसूस करवाया जा रहा है। इसका एक उदाहरण है कि तीन दशक से अधिक उम्र की सजा काटने के बाद भी देश की जेलों में कैद सिखों को रिहा नहीं किया जा रहा है। देश का संविधान भारत में रहने वाले सभी लोगों को समान अधिकार देता है, लेकिन सिखों के प्रति सरकार का रवैया नकारात्मक रहा है। इस सिख विरोधी रवैये के कारण 30-30 साल से जेलों में बंद सिखों को न्याय नहीं मिल रहा है। एक तरफ देश अपनी 75वीं वर्षगांठ मना रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश को आजाद कराने वाले सिखों को भी अपने मूल अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सरकारों के इस भेदभाव पूर्ण रवैये के कारण ही शिरोमणि कमेटी ने 13 अगस्त को पूरे पंजाब में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
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कार्यकारिणी कमेटी की बैठक में हरियाणा में जिला परिषद अंबाला के प्रशासन से इस अवसर पर सरकार के कार्यक्रम 'हर घर तिरंगा' के तहत ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री मांजी साहिब अंबाला और गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब में सांस्कृतिक कार्यक्रम तैयार करने और तिरंगा फहराने के एलान पर भी चर्चा हुई। प्रशासन के इन आदेशों की एसजीपीसी कार्यकारिणी ने निंदा की। इस संबंध में कार्यकारिणी कमेटी द्वारा एक प्रस्ताव पारित कर हरियाणा सरकार और अंबाला जिला परिषद को इस तरह की गतिविधि को अंजाम देने से दूर रहने को कहा गया।
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एडवोकेट धामी ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब की एक अलग आचार संहिता है, जिसके अनुसार सिख मर्यादा के अनुसार यहां केवल धार्मिक समारोह आयोजित किए जा सकते हैं और केवल खालसाई निशान साहिब को ही फहराया जा सकता है। लेकिन अंबाला जिला परिषद ने गुरु मर्यादा का अपमान किया है। हालांकि उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधकों के विरोध के बाद फैसला वापस ले लिया है, लेकिन प्रशासन के इस कदम से सिख भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि गुर-मर्यादा के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जा सकती और सरकारी संस्थानों को ऐसे गंभीर मामलों में मनमानी नहीं करनी चाहिए।


कार्यकारिणी कमेटी ने केंद्रीय सिख संग्रहालय में पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष और शिरोमणि कमेटी के सदस्य जत्थेदार तोता सिंह की तस्वीर लगाने का भी फैसला किया। इसके अलावा शिरोमणि कमेटी द्वारा संचालित गुरुद्वारों और शिक्षण संस्थानों के मामलों पर भी चर्चा की गई। इस बीच शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट धामी ने मोर्चा गुरु का बाग के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सदस्यों का धन्यवाद किया।  

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