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श्री अकाल तख्त पर ही हो सरबत खालसा : बाबा धुम्मा
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
Updated Fri, 06 Nov 2015 10:01 PM IST
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पंथक संगठनों को सरबत खालसा में पूर्ण समर्थन और सहायता देने वाले दमदमी
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टकसाल के एक ग्रुप के मुखी बाबा हरनाम सिंह धुम्मा ने अब सरबत खालसा से हाथ
पीछे खींचना शुरू कर दिया है।
यह बदलाव वीरवार को टकसाल के मेहता हेडक्वार्टर में उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के साथ धुम्मा की एक गुप्त बैठक के बाद आया है। शुक्रवार को मीडिया के साथ बातचीत में बाबा हरनाम सिंह धुम्मा ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के बाहर किसी संगठन की ओर से बुलाया गया इकट्ठ सरबत खालसा नहीं हो सकता। यह प्रथा सिख पंथक रिवायतों के हिसाब से गलत है कि सरबत खालसा किसी और जगह पर बुलाया जाए। अगर इसे समय रहते रोका न गया तो आने वाले समय में कभी भी कुछ संगठनों का समूह कहीं भी बैठक बुलाकर उसे सरबत खालसा का नाम दे दिया करेगा।
बाबा धुम्मा संत समाज के भी नेता हैं। उन्होंने कहा कि वह और दमदमी टकसाल सरबत खालसा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह श्री अकाल तख्त साहिब पर ही बुलाया जाए। तभी उसकी सार्थकता है। उन्होंने कहा कि हम सरबत खालसा संस्था के पुनर्गठन के पक्ष में हैं। परंतु इसका कोई विधि-विधान और रूपरेखा होनी जरूरी है। पंथ के अंदर इस पर सहमति होनी भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जब भी सरबत खालसा बुलाया गया तब सिख कौम के सामने गंभीर चुनौतियां थी। पंथक मामलों पर सहमति लेने के लिए सरबत खालसा बुलाया जाता है। अगर इस समय सरबत खालसा आयोजित किया जाता है तो इससे विरोधी शक्तियां शक्तिशाली होंगी और श्री अकाल तख्त साहिब और एसजीपीसी कमजोर होंगी।
उन्होंने कहा कि जब जत्थेदार कौम में अपना भरोसा गंवा चुके हो तो भी सरबत खालसा बुलाया जा सकता है। लेकिन तब भी इसका केंद्र श्री अकाल तख्त साहिब ही होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एसजीपीसी की शक्ति को खत्म करने के लिए सरबत खालसा बुलाया जा रहा है। इस मौके पर उनके साथ जसबीर सिंह रोडे, अजैब सिंह अभियासी, दर्शन सिंह मंड, सुखविंदर सिंह अगवान, परमजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह औरसतनाम सिंह भी मौजूद थे।
यह बदलाव वीरवार को टकसाल के मेहता हेडक्वार्टर में उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के साथ धुम्मा की एक गुप्त बैठक के बाद आया है। शुक्रवार को मीडिया के साथ बातचीत में बाबा हरनाम सिंह धुम्मा ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के बाहर किसी संगठन की ओर से बुलाया गया इकट्ठ सरबत खालसा नहीं हो सकता। यह प्रथा सिख पंथक रिवायतों के हिसाब से गलत है कि सरबत खालसा किसी और जगह पर बुलाया जाए। अगर इसे समय रहते रोका न गया तो आने वाले समय में कभी भी कुछ संगठनों का समूह कहीं भी बैठक बुलाकर उसे सरबत खालसा का नाम दे दिया करेगा।
बाबा धुम्मा संत समाज के भी नेता हैं। उन्होंने कहा कि वह और दमदमी टकसाल सरबत खालसा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह श्री अकाल तख्त साहिब पर ही बुलाया जाए। तभी उसकी सार्थकता है। उन्होंने कहा कि हम सरबत खालसा संस्था के पुनर्गठन के पक्ष में हैं। परंतु इसका कोई विधि-विधान और रूपरेखा होनी जरूरी है। पंथ के अंदर इस पर सहमति होनी भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जब भी सरबत खालसा बुलाया गया तब सिख कौम के सामने गंभीर चुनौतियां थी। पंथक मामलों पर सहमति लेने के लिए सरबत खालसा बुलाया जाता है। अगर इस समय सरबत खालसा आयोजित किया जाता है तो इससे विरोधी शक्तियां शक्तिशाली होंगी और श्री अकाल तख्त साहिब और एसजीपीसी कमजोर होंगी।
उन्होंने कहा कि जब जत्थेदार कौम में अपना भरोसा गंवा चुके हो तो भी सरबत खालसा बुलाया जा सकता है। लेकिन तब भी इसका केंद्र श्री अकाल तख्त साहिब ही होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एसजीपीसी की शक्ति को खत्म करने के लिए सरबत खालसा बुलाया जा रहा है। इस मौके पर उनके साथ जसबीर सिंह रोडे, अजैब सिंह अभियासी, दर्शन सिंह मंड, सुखविंदर सिंह अगवान, परमजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह औरसतनाम सिंह भी मौजूद थे।