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हरमीत सिंह 'पीएचडी': धार्मिक कट्टरवाद ने आतंकवाद की तरफ धकेला, परिवार भी छोड़ दिया था

Wed, 29 Jan 2020 10:35 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 29 Jan 2020 10:35 AM IST
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Religious fundamentalism pushed towards terror to Harmeet Singh Happy, Khaliastan
फाइल फोटो
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू) से साइकोलॉजी व सिख धर्म अध्ययन विभाग से ‘मास्टर’ की डिग्री प्राप्त करने वाला हरमीत सिंह हैप्पी उर्फ पीएचडी को धार्मिक कट्टरवाद ने आतंक की तरफ धकेल दिया। मास्टर डिग्रियां प्राप्त करने के बाद हैप्पी ने पीएचडी के साथ-साथ यूजीसी की भी परीक्षा पास की हुई थी।
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उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद हैप्पी खालिस्तानी आतंकवादियों के संपर्क में आकर मुख्य धारा से भटक गया। खालिस्तानियों ने हैप्पी को हथियार चलने की ट्रेनिंग दी। पंजाब में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व हिंदू नेताओं की हत्या में खालिस्तानी आतंकवादियों ने हैप्पी को मोहरा बनाया।
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हैप्पी के बारे में सुरक्षा एजेंसियों को सबसे पहले उस समय जानकारी मिली जब अमृतसर के कस्बा राजा सांसी के गावं में स्थित एक निरंकारी भवन में हुए बंब ब्लास्ट के आरोप में दो आरोपियों का गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार किए गए बिक्रम सिंह व अवतार सिंह ने पूछताछ के दौरान सुरक्षा एजेंसी को जानकारी दी थी की इस मामले का मास्टर माइंड हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी है। इस ब्लास्ट में तीन लोगों मारे गए थे।
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चंडीगढ़ में पत्रकार सम्मेलन में हरप्रीत हैप्पी का उल्लेख करते हुए कहा था की आईएसआई उसे मोहरा बनाए हुए है। सुरक्षा एजेंसियों को हैप्पी के पाकिस्तान में शरण लेने की सुचना दो वर्ष पहले ही मिली थी। वर्ष 2019 में सुरक्षा एजेंसियों ने हैप्पी सहित खालिस्तानियों के विरुद्ध इंटरपोल की मदद से एक रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया था। हैप्पी हिंदू व आरएसएस नेताओं की हत्याओं में शामिल था।

बीते 12 वर्षों से परिवार के साथ तोड़ लिए थे सबंध

पाकिस्तान में हैप्पी की हत्या की सूचना मिलते ही कबीर पार्क इलाके में रहने वाले उसके माता पिता स्तब्ध रह गए। अमर उजाला से बातचीत करते हुए पिता अवतार सिंह ने बताया की पांच नवंबर 2008 के बाद हैप्पी ने परिवार के किसी सदस्य के साथ कभी भी संपर्क नहीं साधा। हैप्पी पाकिस्तान में है इसकी सूचना भी उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) के अधिकारियों ने दी थी। यह अधिकारी घर आए थे। अवतार सिंह ने बताया की हैप्पी धार्मिक ख्यालों का था। उसकी संगत भी ठीक थी। वह पाकिस्तान में रह रहा है।

इस बात की जानकारी भी उन्हें दो वर्ष पहले घर आए अधिकारियों ने दी थी। घर के एक कमरे में रखी हैप्पी की मास्टर की डिग्रियां लेते फोटो को देखते हुए अवतार सिंह ने कहा कि यूजीसी पास करने के बाद वह यूनिवर्सिटी में ही अध्यापन करना चाहता था। हैप्पी की मां रो-रो कर बेहाल थी। अवतार सिंह व उनकी पत्नी सरकारी स्कूल में अध्यापक थे। दोनों रिटायर हो चुके है। हैप्पी की एक शादीशुदा बहन है। हैप्पी ने कभी भी बहन के साथ भी संपर्क नहीं साधा था।

मेरे बेटे का शव वतन लाया जाए: अवतार
अवतार सिंह ने केंद्र व पंजाब सरकार से मांग की उनके बेटे का शव को वतन लाया जाए। बेटे की सूरत देखे हुए लगभग 12 वर्ष हो गए। मौत के बाद तो सरकार उसका चेहरा दिखा दे। हैप्पी की हत्या के बाद लाहौर के स्थानीय सिखों ने उसके शव को सरकार से मांगा है। पाकिस्तान सरकार ने ऐसा करने से इंकार कर दिया है। हैप्पी की मौत के बाद वहां शरण लिए खालिस्तानी आतंकवादियों में दहशत का माहौल है।
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