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लौंगोवाल को बताना होगा लापता पावन स्वरूप गए कहां: किरणजोत कौर

Wed, 09 Sep 2020 06:14 PM IST
पंजाब ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब) Published by: पंजाब ब्‍यूरो Updated Wed, 09 Sep 2020 06:14 PM IST
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Longowal will have to tell where the missing holy form has gone: Kiranjot Kaur

पंथ रतन मास्टर तारा सिंह की नातिन व एसजीपीसी की पूर्व महासचिव किरणजोत कौर ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूपों के लापता होने के मामले में गोबिंद सिंह लौंगोवाल और उनकी कार्यकारिणी को पंथक कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि पावन स्वरूपों के लापता होने के मामले में केवल एसजीपीसी के मुख्य सचिव डॉ. रूप सिंह व अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों पर पंथक परंपराओं के अनुसार कार्रवाई करने की बात कह देने से पर्दा नहीं डाला जा सकता।

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लापता स्वरूपों के मामले में गोबिंद सिंह लौंगोवाल बराबर के जिम्मेदार हैं। लौंगोवाल को संगत के सामने आकर इस मुद्दे पर जवाब देना होगा। लौंगोवाल को यह बात संगत को बतानी पड़ेगी कि पावन स्वरूप अंतत: गए कहां, क्योंकि एसजीपीसी के पास श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के हरेक पावन स्वरूप का रिकॉर्ड होता है।

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मीडिया से बातचीत करते हुए बीबी किरणजोत कौर ने कहा कि सिखों की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था का दफ्तर सियासी दखलंदाजी के कारण तहस-नहस हो गया है। एसजीपीसी के फैसलों में सियासी दखल बढ़ गया है। लापता पावन स्वरूपों के मामले में जो कार्रवाई हो रही है, वह एक दिखावा भर है। लौंगोवाल ने एक मुखौटा डाल रखा है और कार्रवाई तो पर्दे के पीछे से चल रही है।

बीबी किरणजोत कौर के अनुसार एसजीपीसी में हर फैसला अध्यक्ष के आदेशानुसार होता है। एसजीपीसी के मुख्य सचिव कमेटी अध्यक्ष के फैसलों को लागू करवाते हैं। केवल मुख्य सचिव पर कार्रवाई कर लौंगोवाल अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। एक जवाब में किरणजोत कौर ने कार्यकारिणी की ओर से मुख्य सचिव का इस्तीफा स्वीकार करने पर एतराज जताते हुए कहा कि अगर इस मामले में मुख्य सचिव डॉ. रूप सिंह आरोपी हैं तो उन्हें चार्जशीट क्यों नहीं किया गया।

इस संवेदनशील मामले में केवल इस्तीफा लेकर मुख्य सचिव को ‘बरी’ कर देने से बात नहीं बनेगी। जब उनसे यह पूछा गया कि एसजीपीसी ने इस मामले पर यू टर्न क्यों लिया, इस पर बीबी कौर का कहना था कि कार्यकारिणी ने संगत के बढ़ रहे दबाव के कारण पहले जल्दबाजी में एसजीपीसी के 16 अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई कर दी गई। जब ठंडे दिमाग से सोचा तो कानूनी कार्रवाई का फैसला वापस ले लिया।

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