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मदरहुड फिल्म में सही ढंग से नहीं दर्शाया गया इतिहास, एसजीपीसी ने नहीं दी इजाजत
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अमृतसर। एसजीपीसी ने ‘मदरहुड - द जर्नी ऑफ माता साहिब कौर’ को एनओसी देने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि इसमें सिख धर्म का इतिहास सही तरीके से नहीं दिखाया गया। दूसरी तरफ फिल्म निर्माता ने 14 अप्रैल को विश्व स्तर पर फिल्म रिलीज करने का एलान किया है। इसके बाद एसजीपीसी ने फिल्म निर्माता को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यह फिल्म 14 अप्रैल को रिलीज की जाती है तो कार्रवाई की जाएगी।
एसजीपीसी ने आरोप लगाया है कि इस फिल्म में सिख इतिहास को सही तरीके से नहीं दर्शाया गया और इसमें कई अन्य तरह की गलतियां भी हैं। बता दें कि फिल्म के निर्माता ने वर्ष 2018 से लेकर 2022 तक तीन बार फिल्म का प्रिंट एसजीपीसी को भेजा, ताकि फिल्म में दिखाए तथ्यों को लेकर एसजीपीसी की इजाजत मिल सके। इस फिल्म की जांच के लिए बनी सब-कमेटी ने इसमें कई खामियां बताईं तो एसजीपीसी ने एनओसी देने से मना कर दिया।
एसजीपीसी ने कहा कि इसमें सबसे गलत बात यह है कि यह फिल्म एनिमेटिड है। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार पहले ही आदेश जारी कर चुके हैं कि किसी को भी गुरुओं के जीवन पर एनिमेटेड फिल्म बनाने की इजाजत नहीं है। बावजूद इसके एसजीपीसी ने फिल्म के निर्देशक से कहा है कि अगर वह फिल्म में एसजीपीसी द्वारा बताई कमियों को पूरा कर लेता है, तो फिल्म ‘मदरहुड - द जर्नी ऑफ माता साहिब कौर’ को एनओसी देने पर विचार किया जा सकता है। एसजीपीसी का कहना है कि माता सुंदरी व माता साहिब कौर के इतिहास को जोड़ कर दिखाया गया है। किरदारों के चेहरों में अंतर है, जिसके चलते फिल्म का निर्देशन सही नहीं। इसके अलावा गुरु साहिबान की हजूरी में संगत का चप्पल व जूतों के जोड़े लेकर बैठना भी एक सबसे बड़ी गलती है।
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एसजीपीसी ने आरोप लगाया है कि इस फिल्म में सिख इतिहास को सही तरीके से नहीं दर्शाया गया और इसमें कई अन्य तरह की गलतियां भी हैं। बता दें कि फिल्म के निर्माता ने वर्ष 2018 से लेकर 2022 तक तीन बार फिल्म का प्रिंट एसजीपीसी को भेजा, ताकि फिल्म में दिखाए तथ्यों को लेकर एसजीपीसी की इजाजत मिल सके। इस फिल्म की जांच के लिए बनी सब-कमेटी ने इसमें कई खामियां बताईं तो एसजीपीसी ने एनओसी देने से मना कर दिया।
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एसजीपीसी ने कहा कि इसमें सबसे गलत बात यह है कि यह फिल्म एनिमेटिड है। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार पहले ही आदेश जारी कर चुके हैं कि किसी को भी गुरुओं के जीवन पर एनिमेटेड फिल्म बनाने की इजाजत नहीं है। बावजूद इसके एसजीपीसी ने फिल्म के निर्देशक से कहा है कि अगर वह फिल्म में एसजीपीसी द्वारा बताई कमियों को पूरा कर लेता है, तो फिल्म ‘मदरहुड - द जर्नी ऑफ माता साहिब कौर’ को एनओसी देने पर विचार किया जा सकता है। एसजीपीसी का कहना है कि माता सुंदरी व माता साहिब कौर के इतिहास को जोड़ कर दिखाया गया है। किरदारों के चेहरों में अंतर है, जिसके चलते फिल्म का निर्देशन सही नहीं। इसके अलावा गुरु साहिबान की हजूरी में संगत का चप्पल व जूतों के जोड़े लेकर बैठना भी एक सबसे बड़ी गलती है।
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