अमृतसर में एतिहासिक लंगूर मेला शुरू: अपने बच्चों को वानर भेष में लेकर पहुंचे अभिभावक
मान्यता है कि बड़े हनुमान मंदिर में मन्नत मांगने पर निसंतान महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है। मन्नत पूरी होने के बाद लोग अपने बच्चों को लंगूर बना कर (वानर के भेष में) लाकर माथा टिकाते हैं।
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अमृतसर में गुरुवार को नवरात्र पूजा के साथ ही दुर्ग्याणा मंदिर के पास बड़े हनुमान मंदिर में एतिहासिक लंगूर मेले की शुरुआत हुई। रामायण काल से चली आ रही प्रथा के तहत दशहरे तक चलने वाले इस लंगूर मेले में बड़ी संख्या में बच्चे और बड़े वानर का रूप धारण कर बड़े हनुमान मंदिर में माथा टेकने पहुंचते हैं।
मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने पर निसंतान महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है। मन्नत पूरी होने के बाद लोग अपने बच्चों को लंगूर बना कर (वानर के भेष में) लाकर माथा टिकाते हैं। इस दौरान लोग बच्चों को लाल रंग और सिल्वर गोटे से तैयार विशेष परिधान पहनाते हैं। घर से लेकर बड़ा हनुमान मंदिर तक ढोल की थाप पर लंगूर बने बच्चे नाचते हुये जय श्री राम का जयघोष करते हैं।
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दुर्ग्याणा मंदिर के प्रबंधकों ने बताया कि वैसे तो नवरात्र के दिनों में यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मगर इस बार कोविड काल के चलते लोगों को अपनी मन्नत पूरी होने पर कम से कम लोगों के साथ दुर्ग्याणा मंदिर स्थित बड़े हनुमान मंदिर पहुंचने की अपील की गई है। वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे कोविड गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन करें और मास्क पहन कर आएं।
उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में बजरंगी सेनाएं यहां वानर का रूप धारण करके माथा टेकने पहुंचती हैं। रामायण काल से ही बड़ा हनुमान मंदिर की बहुत मान्यता है। यह वही जगह है जहां भगवान श्री राम द्वारा छोड़े गये अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को लव-कुश ने रोक कर श्री राम की सेना को युद्ध के लिए ललकारा था। इस युद्ध के दौरान जब हनुमान जी वहां पहुंचे तो लव-कुश ने उन्हें भी एक पेड़ के साथ बांध दिया था।