Captain Saurabh Kalia: 22 साल के रणबांकुरे का हौसला नहीं तोड़ पाया था पाकिस्तान...कर दी थी अमानवीय की हदें पार
दुश्मन के साथ कैप्टन सौरभ कालिया का सामना हुआ तो गोलीबारी में कालिया और उनके साथियों की गोलियां खत्म हो गईं। इससे पहले कि इन तक मदद पहुंचती, दुश्मनों ने सभी को बंदी बना लिया। इसके बाद शुरू हुआ अमानवीय अत्याचार का अंतहीन सिलसिला।
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विस्तार
29 जून 1976 को अमृतसर में डॉ. एनके वालिया के घर में सौरभ का जन्म हुआ था। बचपन से ही उनका सपना सेना में जाने का था। होश संभालते ही तैयारी में जुट गए। 12वीं के बाद ही एएफएमसी की परीक्षा दी लेकिन पास नहीं हो सके। इसके बावजूद वह मायूस नहीं हुए। 1997 में स्नातक करते समय संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा में बैठे और सफलता हासिल की।
कारगिल में ही हुई थी पहली पोस्टिंग
दिसंबर 1998 में आईएमए से ट्रेनिंग के बाद फरवरी 1999 में उनकी पहली पोस्टिंग कारगिल में 4 जाट रेजीमेंट में हुई। नौकरी को अभी चार ही महीने हुए थे कि उनका सामना दुश्मन से हो गया। सेना के अधिकारियों को ताशी नाम के एक चरवाहे ने खबर दी कि उसने कारगिल की चोटियों पर कुछ हथियारबंद लोगों को देखा है।सूचना मिलते ही 14 व 15 मई को कैप्टन कालिया अपने पांच साथियों के साथ पेट्रोलिंग पर निकले। बजरंग चोटी पर उनका सामना हथियारों से लैस पाकिस्तानी सैनिकों से हो गया। आमने सामने हुई गोलीबारी में कालिया और उनके साथियों की गोलियां खत्म हो गईं। इससे पहले कि इन तक मदद पहुंचती, दुश्मनों ने सभी को बंदी बना लिया। इसके बाद शुरू हुआ अमानवीय अत्याचार का अंतहीन सिलसिला, जिससे किसी का भी कलेजा कांप जाए।
दी गई थीं अमानवीय यातनाएं
कैप्टन सौरभ को तोड़ने के मकसद से दुश्मनों ने उन पर कहर बरपाया। उनकी आंखें निकाल ली गईं। कान काट लिए। अलग अलग तरीके से उन्हें प्रताड़ित किया गया। जब दुश्मन इन रणबांकुरों के हौसले को नहीं तोड़ पाए तो कैप्टन कालिया समेत पांच सिपाहियों अर्जुन राम, भीका राम, भंवर लाल बगरिया, मूला राम और नरेश सिंह को मौत के घाट उतार दिया।
नौ जून 1999 को जब पाकिस्तान ने कैप्टन सौरभ कालिया और उनके साथियों के शव भारत को लौटाए तो पूरा देश उबल पड़ा। कैप्टन सौरभ कालिया और उनके साथियों के साथ जो बर्बरता की गई, वह साफ तौर पर जंग के नियमों की धज्जियां उड़ा रही थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की इस नापाक हरकत की निंदा हुई। भारतीय जवानों के शवों पर ये ऐसे घाव थे, जिन्होंने दुनिया को स्तब्ध कर दिया।