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बोलदा पंजाब: अपनी मिट्टी में मेहनत की फसल
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-वीजा नियमों में हुई सख्ती तो पंजाब में भविष्य तलाशने लगे युवा
-2025 में 1 जनवरी से 30 जून तक रोजाना औसतन 1978 पासपोर्ट आवेदन
-2024 में इस अवधि में यह आंकड़ा रोजाना करीब 2,906 आवेदन का था
-अब एजेंट तलाश रहे नए रास्ते, यूरोप स्टडी पर कर रहे फोकस
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सुरिंदर पाल
जालंधर। वीजा नियमों में सख्ती के बाद पंजाब के युवा अब अपने राज्य में ही भविष्य तलाशने लगे हैं। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूके समेत दूसरे देशों में सख्त हुए नियमों के चलते पंजाबी युवा अब अपनी मिट्टी पर ही विकल्प तलाश रहे हैं। वे विदेश से वापस आकर पंजाब में खेती या फिर कारोबार में जुट रहे हैं। वहीं, राज्य में पासपोर्ट बनवाने वालों की संख्या में काफी गिरावट आई है।
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष 1 जनवरी से 30 जून तक पंजाब में रोजाना औसतन 1978 पासपोर्ट के लिए आवेदन आए जो पिछले कई सालों में सबसे कम हैं। 2024 में यह आंकड़ा रोजाना करीब 2,906 था। जनवरी से जून तक राज्य में करीब 3.60 लाख पासपोर्ट बनाए गए हैं। अगर यही रफ्तार सालभर बनी रही तो साल के अंत तक यह संख्या करीब 7.50 लाख तक पहुंचेगी जो पिछले चार सालों में सबसे कम होगी। इससे पहले 2021 में सबसे कम पासपोर्ट बने थे तब सिर्फ 6.44 लाख पासपोर्ट के लिए आवेदन आए थे।
कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूके में दरवाजे बंद होने पर पंजाब की विदेशी एजुकेशन इंडस्ट्री को झटका लगा है। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूके की ओर से वीजा नियमों में सख्ती और छात्र वीजा पर रोक लगाने से पंजाब की विदेशी शिक्षा उद्योग को भारी झटका लगा है जिससे कई इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम (आईईएलटीएस) केंद्र और कंसल्टेंसी फर्मों पर ताले लग गए हैं। छात्रों के विदेशों में पढ़ाई करने के सपने प्रभावित हुए हैं। छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आई है। इस क्षेत्र में मंदी आई है जिसके कारण कई व्यवसाय प्रभावित हुए हैं।
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कनाडा ने भारतीय छात्रों के 80% वीजा आवेदन ठुकराए
न्यू इमेज की पूजा सिंह का कहना है कि 2025 में कनाडा ने भारतीय छात्रों के 80% वीजा आवेदन ठुकरा दिए जो पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा है। पंजाब में लाखों लोग विदेशी एजुकेशन इंडस्ट्री के जरिये घर चला रहे हैं जिसमें पीटीई सेंटर, आईईएलटीएस सेंटर, एयर टिकट, फॉरेन एक्सजेंज, बैंकों में जीआईसी खाते आदि प्रमुख हैं लेकिन अब एजेंट यूरोप में विकल्प तलाश रहे हैं। जर्मनी व अन्य यूरोप देशों का स्टडी वीजा को आगे लाने की कोशिश चल रही है ताकि किसी तरह से कारोबार चलता रहे।
कनाडा जाने से कतराने लगे पंजाबी
2022 में कनाडा गए 5.5 लाख विद्यार्थियों में से 2.26 लाख भारत से थे जिसमें 3.2 लाख भारतीय छात्र वीजा पर कनाडा में रहे और अर्थव्यवस्था में योगदान दिया लेकिन 2023 में संख्या कम हुई और 2024 में तो संख्या आधी रह गई। कनाडा में बेरोजगारी व महंगाई और बढ़े हुए बैंक ब्याज के कारण स्टूडेंट्स की संख्या गिरी है। मार्क कार्नी की सरकार ने तो सख्त नियम लागू कर दिए जिससे वीजा रिजेक्शन बढ़ गया। पासपोर्ट पर रिेफ्यूजल स्टांप न लगे इसलिए पंजाबी कनाडा से कतराने लगे हैं। कनाडा व भारत के बीच काफी तनाव रहा है जिसका असर स्टडी वीजा पर भी हुआ है। पंजाब से कनाडा जाने वालों की संख्या काफी कम हो गई है।
ऑस्ट्रेलिया की सख्ती, यूके ने बंद किए दरवाजे
वर्तमान में लगभग 1.30 लाख भारतीय विद्यार्थी ऑस्ट्रेलिया में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले भारतीय विद्यार्थियों की संख्या मार्च 2024 में 96,490 से घटकर जून 2024 में 87,600 हो गई है। 2025 के पहले छह माह में 18 हजार विद्यार्थियों को वीजा दिया गया। यूके ने तो एकदम से दरवाजे बंद कर दिए हैं। यह ट्रेंड आगे भी जारी रहा तो युवाओं को पंजाब में ही स्टार्टअप्स खोजने वालों की संख्या बढ़ सकती है।
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विदेश छोड़ लौटे युवाओं ने खोजी नई राह...
केस 1
खेती से भविष्य बना रहे जगरूप सिंह
श्री हरगोबिंदपुर के नजदीकी गांव दड़ेवाली का युवक जगरूप सिंह विदेश से वापस आकर खेतीबाड़ी को आधुनिक ढंग से करने में जुट गए हैं। वह बेहतर भविष्य की तलाश में ऑस्ट्रेलिया गए थे लेकिन वहां से लौट आए। उसके पास 12 एकड़ उपजाऊ जमीन है। खेतों में चुकंदर, गेहूं और गन्ने की फसल बोई थी जिससे उसको काफी लाभ हुआ है। खेतों में गेहूं की नाड़ को आग लगा कर जलाया नहीं था और खेतों को जोत कर उस में जंतर के रोपाई कर हरी खाद तैयार की है जो उसका खेतों की उर्वर शक्ति बढ़ाने में कामयाब सिद्ध हुई है। जगरूप सिंह ने परंपरागत खेती में बदलाव लाकर कई फायदेमंद फसलों को पंजाब में उगाना शुरू किया।
केस 2
पिता के साथ व्यापार बढ़ाने को कनाडा से लौटे
जालंधर के एडलिको ग्रीन के रहने वाले गौरांग अग्रवाल कनाडा में सुनहरे भविष्य के लिए गए थे और वहां पर जाकर बिजनेस मेनेजमेंट में स्टडी की। पिता विनीत अग्रवाल का पंजाब में कारोबार था। गौरांग ने कनाडा को अलविदा कहा और पंजाब में पिता के कारोबार को आगे बढ़ाने और फैलाने के लिए वापसी कर ली। गौरांग ने काफी कुछ नया किया और पिता के कारोबार को आगे बढ़ा दिया। उनका कहना है कि पंजाब में भी काफी मौके हैं। बाहर पढ़ाई करने में कुछ गलत नहीं है लेकिन उसका फायदा अपने देश में कारोबार आगे बढ़ाने में हो तो इससे बेहतर और कुछ नहीं है।
केस- 3
ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू कर धान की खेती छोड़ी
मोगा के रंजीत सिंह की अलग सोच थी। वह कनाडा गए और लगातार सात साल रहने के बाद वापस पंजाब के मोगा जिले में आ गए। मोगा के रंजीत सिंह का कहना है कि पंजाब में विदेश से युवा वापस लौट रहे हैं और खेती-किसानी में नए व्यापार स्थापित कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अब भी देश में बेहतर मौके दिख रहे हैं। वह पॉलीहाउस फार्मिंग, ऑर्गेनिक खेती और ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च-मूल्य वाली फसलों में सफलता पा रहे हैं, जिससे न केवल उनकी अपनी आय बढ़ रही है, बल्कि वे अन्य किसानों को भी सशक्त कर रहे हैं। यह एक रिवर्स माइग्रेशन का रुझान है जो पंजाब के युवाओं में खेती को एक आकर्षक और सफल व्यापार के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। रंजीत सिंह कहते हैं कि उन्होंने लाल ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की और उसकी फसल ऑन डिमांड है। धान से उचित मूल्य मिल रहा है।
केस 4
पटियाला के जसप्रीत ने कनाडा छोड़ सरकारी नौकरी पाई
जसप्रीत सिंह 2016 में आईटी डिप्लोमा के लिए कनाडा गए थे। वहां 5 साल काम किया लेकिन जीवन की स्थिरता और परिवार की कमी महसूस हुई। 2022 में वह पंजाब लौटे और पीपीएससी की तैयारी शुरू की। 2023 में नायब तहसीलदार पद पर चयन हुआ। जसप्रीत कहते हैं कि विदेश जाना सपना है, पर घर में रहकर सेवा करना सच्ची संतुष्टि है।
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-2025 में 1 जनवरी से 30 जून तक रोजाना औसतन 1978 पासपोर्ट आवेदन
-2024 में इस अवधि में यह आंकड़ा रोजाना करीब 2,906 आवेदन का था
-अब एजेंट तलाश रहे नए रास्ते, यूरोप स्टडी पर कर रहे फोकस
सुरिंदर पाल
जालंधर। वीजा नियमों में सख्ती के बाद पंजाब के युवा अब अपने राज्य में ही भविष्य तलाशने लगे हैं। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूके समेत दूसरे देशों में सख्त हुए नियमों के चलते पंजाबी युवा अब अपनी मिट्टी पर ही विकल्प तलाश रहे हैं। वे विदेश से वापस आकर पंजाब में खेती या फिर कारोबार में जुट रहे हैं। वहीं, राज्य में पासपोर्ट बनवाने वालों की संख्या में काफी गिरावट आई है।
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष 1 जनवरी से 30 जून तक पंजाब में रोजाना औसतन 1978 पासपोर्ट के लिए आवेदन आए जो पिछले कई सालों में सबसे कम हैं। 2024 में यह आंकड़ा रोजाना करीब 2,906 था। जनवरी से जून तक राज्य में करीब 3.60 लाख पासपोर्ट बनाए गए हैं। अगर यही रफ्तार सालभर बनी रही तो साल के अंत तक यह संख्या करीब 7.50 लाख तक पहुंचेगी जो पिछले चार सालों में सबसे कम होगी। इससे पहले 2021 में सबसे कम पासपोर्ट बने थे तब सिर्फ 6.44 लाख पासपोर्ट के लिए आवेदन आए थे।
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कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूके में दरवाजे बंद होने पर पंजाब की विदेशी एजुकेशन इंडस्ट्री को झटका लगा है। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूके की ओर से वीजा नियमों में सख्ती और छात्र वीजा पर रोक लगाने से पंजाब की विदेशी शिक्षा उद्योग को भारी झटका लगा है जिससे कई इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम (आईईएलटीएस) केंद्र और कंसल्टेंसी फर्मों पर ताले लग गए हैं। छात्रों के विदेशों में पढ़ाई करने के सपने प्रभावित हुए हैं। छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आई है। इस क्षेत्र में मंदी आई है जिसके कारण कई व्यवसाय प्रभावित हुए हैं।
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कनाडा ने भारतीय छात्रों के 80% वीजा आवेदन ठुकराए
न्यू इमेज की पूजा सिंह का कहना है कि 2025 में कनाडा ने भारतीय छात्रों के 80% वीजा आवेदन ठुकरा दिए जो पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा है। पंजाब में लाखों लोग विदेशी एजुकेशन इंडस्ट्री के जरिये घर चला रहे हैं जिसमें पीटीई सेंटर, आईईएलटीएस सेंटर, एयर टिकट, फॉरेन एक्सजेंज, बैंकों में जीआईसी खाते आदि प्रमुख हैं लेकिन अब एजेंट यूरोप में विकल्प तलाश रहे हैं। जर्मनी व अन्य यूरोप देशों का स्टडी वीजा को आगे लाने की कोशिश चल रही है ताकि किसी तरह से कारोबार चलता रहे।
कनाडा जाने से कतराने लगे पंजाबी
2022 में कनाडा गए 5.5 लाख विद्यार्थियों में से 2.26 लाख भारत से थे जिसमें 3.2 लाख भारतीय छात्र वीजा पर कनाडा में रहे और अर्थव्यवस्था में योगदान दिया लेकिन 2023 में संख्या कम हुई और 2024 में तो संख्या आधी रह गई। कनाडा में बेरोजगारी व महंगाई और बढ़े हुए बैंक ब्याज के कारण स्टूडेंट्स की संख्या गिरी है। मार्क कार्नी की सरकार ने तो सख्त नियम लागू कर दिए जिससे वीजा रिजेक्शन बढ़ गया। पासपोर्ट पर रिेफ्यूजल स्टांप न लगे इसलिए पंजाबी कनाडा से कतराने लगे हैं। कनाडा व भारत के बीच काफी तनाव रहा है जिसका असर स्टडी वीजा पर भी हुआ है। पंजाब से कनाडा जाने वालों की संख्या काफी कम हो गई है।
ऑस्ट्रेलिया की सख्ती, यूके ने बंद किए दरवाजे
वर्तमान में लगभग 1.30 लाख भारतीय विद्यार्थी ऑस्ट्रेलिया में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले भारतीय विद्यार्थियों की संख्या मार्च 2024 में 96,490 से घटकर जून 2024 में 87,600 हो गई है। 2025 के पहले छह माह में 18 हजार विद्यार्थियों को वीजा दिया गया। यूके ने तो एकदम से दरवाजे बंद कर दिए हैं। यह ट्रेंड आगे भी जारी रहा तो युवाओं को पंजाब में ही स्टार्टअप्स खोजने वालों की संख्या बढ़ सकती है।
विदेश छोड़ लौटे युवाओं ने खोजी नई राह...
केस 1
खेती से भविष्य बना रहे जगरूप सिंह
श्री हरगोबिंदपुर के नजदीकी गांव दड़ेवाली का युवक जगरूप सिंह विदेश से वापस आकर खेतीबाड़ी को आधुनिक ढंग से करने में जुट गए हैं। वह बेहतर भविष्य की तलाश में ऑस्ट्रेलिया गए थे लेकिन वहां से लौट आए। उसके पास 12 एकड़ उपजाऊ जमीन है। खेतों में चुकंदर, गेहूं और गन्ने की फसल बोई थी जिससे उसको काफी लाभ हुआ है। खेतों में गेहूं की नाड़ को आग लगा कर जलाया नहीं था और खेतों को जोत कर उस में जंतर के रोपाई कर हरी खाद तैयार की है जो उसका खेतों की उर्वर शक्ति बढ़ाने में कामयाब सिद्ध हुई है। जगरूप सिंह ने परंपरागत खेती में बदलाव लाकर कई फायदेमंद फसलों को पंजाब में उगाना शुरू किया।
केस 2
पिता के साथ व्यापार बढ़ाने को कनाडा से लौटे
जालंधर के एडलिको ग्रीन के रहने वाले गौरांग अग्रवाल कनाडा में सुनहरे भविष्य के लिए गए थे और वहां पर जाकर बिजनेस मेनेजमेंट में स्टडी की। पिता विनीत अग्रवाल का पंजाब में कारोबार था। गौरांग ने कनाडा को अलविदा कहा और पंजाब में पिता के कारोबार को आगे बढ़ाने और फैलाने के लिए वापसी कर ली। गौरांग ने काफी कुछ नया किया और पिता के कारोबार को आगे बढ़ा दिया। उनका कहना है कि पंजाब में भी काफी मौके हैं। बाहर पढ़ाई करने में कुछ गलत नहीं है लेकिन उसका फायदा अपने देश में कारोबार आगे बढ़ाने में हो तो इससे बेहतर और कुछ नहीं है।
केस- 3
ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू कर धान की खेती छोड़ी
मोगा के रंजीत सिंह की अलग सोच थी। वह कनाडा गए और लगातार सात साल रहने के बाद वापस पंजाब के मोगा जिले में आ गए। मोगा के रंजीत सिंह का कहना है कि पंजाब में विदेश से युवा वापस लौट रहे हैं और खेती-किसानी में नए व्यापार स्थापित कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अब भी देश में बेहतर मौके दिख रहे हैं। वह पॉलीहाउस फार्मिंग, ऑर्गेनिक खेती और ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च-मूल्य वाली फसलों में सफलता पा रहे हैं, जिससे न केवल उनकी अपनी आय बढ़ रही है, बल्कि वे अन्य किसानों को भी सशक्त कर रहे हैं। यह एक रिवर्स माइग्रेशन का रुझान है जो पंजाब के युवाओं में खेती को एक आकर्षक और सफल व्यापार के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। रंजीत सिंह कहते हैं कि उन्होंने लाल ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की और उसकी फसल ऑन डिमांड है। धान से उचित मूल्य मिल रहा है।
केस 4
पटियाला के जसप्रीत ने कनाडा छोड़ सरकारी नौकरी पाई
जसप्रीत सिंह 2016 में आईटी डिप्लोमा के लिए कनाडा गए थे। वहां 5 साल काम किया लेकिन जीवन की स्थिरता और परिवार की कमी महसूस हुई। 2022 में वह पंजाब लौटे और पीपीएससी की तैयारी शुरू की। 2023 में नायब तहसीलदार पद पर चयन हुआ। जसप्रीत कहते हैं कि विदेश जाना सपना है, पर घर में रहकर सेवा करना सच्ची संतुष्टि है।