नुकसान: पाकिस्तान सीमा पर फंसा अफगानिस्तान से आया 100 करोड़ का सामान, दस्तावेजों के हस्ताक्षर न मिलने से आ रही दिक्कत
देश की ड्राई फ्रूट्स मार्केट में अफगानिस्तान का बादाम, काजू, पिस्ता, अनारदाना, अनार, सोंठ, मुलेठी, अंगूर, केसर, मुनक्का, दालचीनी के साथ कई अन्य उत्पाद अपनी गुणवत्ता के कारण पसंद किए जाते हैं।
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लंबे समय तक ठहरे रहे अफगानिस्तान के साथ कारोबार एक बार फिर रुक गया है। पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान से आया करीब 100 करोड़ रुपये का ड्राई फ्रूट्स और अन्य सामान इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) अटारी से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर पाकिस्तान की सीमा पर फंस गया है। इससे पंजाब के नहीं बल्कि देश भर के आयातकों के करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
फेडरेशन आफ करियाना एंड ड्राई फ्रूट कॉमर्शियल एसोसिएशन के प्रधान अनिल मेहरा ने बताया कि पंजाब ही नहीं बल्कि देश की ड्राई फ्रूट्स मार्केट में अफगानिस्तान का बादाम, काजू, पिस्ता, अनारदाना, अनार, सोंठ, मुलेठी, अंगूर, केसर, मुनक्का, दालचीनी के साथ कई अन्य उत्पाद अपनी गुणवत्ता के कारण पसंद किए जाते हैं। अभी पाकिस्तान के साथ कारोबार बंद हैं, तो ड्राई फ्रूट्स व अन्य वस्तुओं के आयातकों का सारा कारोबार अफगानिस्तान से आने वाली वस्तुओं पर ही निर्भर है।
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से चलकर पाकिस्तान के रास्ते इन वस्तुओं के 30 से 40 ट्रक रोजाना आते हैं। पिछले आठ दिनों से कस्टम अधिकारियों ने इन पर रोक लगा दी है। पूछने पर बताया गया कि सामान के सारे दस्तावेजों पर अधिकारियों के हस्ताक्षरों में बदलाव है। हस्ताक्षर न मिलने के कारण भारतीय अधिकारी सामान को नहीं ले रहे। इसके चलते इंपोर्टरों को रोजाना करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
भाजपा प्रत्याशी ने केंद्र के अफसरों के सामने उठाया मामला
मेहरा ने बताया कि बुधवार को उन्होंने यह मामला मजीठ मंडी में चुनाव प्रचार करने पहुंचे पूर्वी हलके से भाजपा के उम्मीदवार व पूर्व आईएएस अधिकारी जगमोहन सिंह राजू के समक्ष उठाया। राजू ने तुरंत केंद्र सरकार के कस्टम विभाग में सीनियर अधिकारी को फोन किया और यह मसला हल करने को कहा। इसके साथ ही राजू ने इंपोर्टरों को भरोसा दिया कि अगले दो दिन के भीतर उनकी मुश्किल का समाधान हो जाएगा।
अफगानिस्तान से जो सामान भारत आता है, उसके लिए वहां का चैंबर आफ कामर्स सर्टिफिकेट जारी करता है। इस बार सर्टिफिकेट के हस्ताक्षर के मिलान नहीं हो रहे हैं। इसलिए दस्तावेजों को वेरिफिकेशन के लिए वापस भेजा गया है। - बलबीर सिंह मांगट, ज्वाइंट कमिश्नर कस्टम, अटारी सीमा