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हरिके पत्तन बर्ड सेक्चुरी में विदेशी पक्षियों की गिनती करने में जुटीं चार टीमें
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तरनतारन। हरिके पत्तन बर्ड सेंक्चुरी में पहुंचे विदेशी मेहमानों (पक्षी) ने वन्य जीव विभाग के अधरों पर मुस्कान ला दी है। इस बार विदेशी पक्षियों की संख्या पिछले साल से अधिक मानी जा रही है। विशेषज्ञों की टीम ने शनिवार से पक्षियों की गिनती का काम शुरू कर दिया है।
तरनतारन, कपूरथला और फिरोजपुर जिले की सीमा से लगती विश्व प्रसिद्ध बर्ड सेक्चुरी की 1953 में सामने आई थी। इसका कुल रकबा 4100 हेक्टेयर है। पर्यावरण और वन्य जीव मंत्रालय ने 1987-88 के दौरान इस बर्ड सेक्चुरी के संरक्षण को उचित महत्व दिया। इसके बाद यह बर्ड सेक्चुरी अतंरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
बर्ड सेंक्चुरी के अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2016 में यहां पर 59 हजार, 431 विदेशी पक्षियों का आना हुआ था। 2017 में यह संख्या बढ़ कर 64 हजार, 947 तक पहुंच गई। 2018 में यहां पर 81 हजार, 871 विदेशी पक्षी पहुंचे थे, जबकि 2019 में 91 हजार, 125 विदेशी पक्षियों की संख्या दर्ज की गई थी। इसी तरी वर्ष 2020 में यह संख्या बढ़ कर 94 हजार, 332 तक पहुंच गई। लॉकडाउन के दौरान दरिया सतलुज का पानी साफ होने से हरिके पत्तन का पर्यावरण भी पहले से ओर बेहतर रहा ह, जिसके चलते विदेशी पक्षियों की आमद बढ़ने की उम्मीद है।
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डब्ल्यूडब्ल्यूएफओ की प्रोजेक्ट अधिकारी गीतांजली कवंर ने बताया कि बर्ड सेक्चुरी में रोजाना बड़ी संख्या में पक्षी प्रेमियों आना होता है। सैलानियों की सुविधा के मद्देनजर हाल ही में सरकार ने 15 करोड़ की राशि मंजूर की है। सेक्चुरी में पर्यटकों के लिए रैंप और वाच टॉवर बनाने के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। कंवर ने बताया कि 20 सदस्यीय टीम की ओर से बर्ड सेक्चुरी को चार भागों में बांटा गया है। दो भाग पानी वाले क्षेत्र में आते हैं, जबकि दो भाग वन्य वाले क्षेत्र में आते हैं। चारों भागों में चार टीमें रवाना की गई हैं। उन्होंने बताया कि पक्षियों की गिनती का काम वह खुद देख रही हैं।
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तरनतारन, कपूरथला और फिरोजपुर जिले की सीमा से लगती विश्व प्रसिद्ध बर्ड सेक्चुरी की 1953 में सामने आई थी। इसका कुल रकबा 4100 हेक्टेयर है। पर्यावरण और वन्य जीव मंत्रालय ने 1987-88 के दौरान इस बर्ड सेक्चुरी के संरक्षण को उचित महत्व दिया। इसके बाद यह बर्ड सेक्चुरी अतंरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
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बर्ड सेंक्चुरी के अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2016 में यहां पर 59 हजार, 431 विदेशी पक्षियों का आना हुआ था। 2017 में यह संख्या बढ़ कर 64 हजार, 947 तक पहुंच गई। 2018 में यहां पर 81 हजार, 871 विदेशी पक्षी पहुंचे थे, जबकि 2019 में 91 हजार, 125 विदेशी पक्षियों की संख्या दर्ज की गई थी। इसी तरी वर्ष 2020 में यह संख्या बढ़ कर 94 हजार, 332 तक पहुंच गई। लॉकडाउन के दौरान दरिया सतलुज का पानी साफ होने से हरिके पत्तन का पर्यावरण भी पहले से ओर बेहतर रहा ह, जिसके चलते विदेशी पक्षियों की आमद बढ़ने की उम्मीद है।
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डब्ल्यूडब्ल्यूएफओ की प्रोजेक्ट अधिकारी गीतांजली कवंर ने बताया कि बर्ड सेक्चुरी में रोजाना बड़ी संख्या में पक्षी प्रेमियों आना होता है। सैलानियों की सुविधा के मद्देनजर हाल ही में सरकार ने 15 करोड़ की राशि मंजूर की है। सेक्चुरी में पर्यटकों के लिए रैंप और वाच टॉवर बनाने के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। कंवर ने बताया कि 20 सदस्यीय टीम की ओर से बर्ड सेक्चुरी को चार भागों में बांटा गया है। दो भाग पानी वाले क्षेत्र में आते हैं, जबकि दो भाग वन्य वाले क्षेत्र में आते हैं। चारों भागों में चार टीमें रवाना की गई हैं। उन्होंने बताया कि पक्षियों की गिनती का काम वह खुद देख रही हैं।