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Amritsar News: किसानों ने चार हजार प्रीपेड मीटर उखाड़ कर बिजली दफ्तरों में जमा कराए

Thu, 11 Dec 2025 02:45 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Dec 2025 02:45 AM IST
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Farmers uprooted four thousand prepaid meters and deposited them at the electricity offices.
-पंजाब में किसानों का प्रीपेड मीटरों के खिलाफ आंदोलन
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-किसान मजदूर मोर्चा का बड़ा कदम, पंजाब सरकार पर बढ़ा दबाव

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अमर उजाला ब्यूरो/संवाद
पटियाला/लुधियाना। किसान मजदूर मोर्चा की ओर से प्रीपेड मीटरों के खिलाफ शुरू किए गए आंदोलन ने एक महत्वपूर्ण मोड़ लिया है। बीते दो दिनों के दौरान पंजाब के विभिन्न गांवों से उतारे गए 4000 प्रीपेड मीटर बुधवार को बिजली दफ्तरों में जमा कराए गए। इस कदम के जरिए मोर्चा ने पंजाब सरकार और बिजली विभाग पर दबाव बनाने का प्रयास किया है।



पटियाला में किसान नेता सुखविंदर सिंह सभरा, राणा रणबीर सिंह, और सतनाम सिंह पन्नू ने इस मुद्दे पर संवाददाता सम्मेलन किया। उन्होंने बताया कि प्रीपेड मीटरों को जमा करवाने के लिए जब वे संबंधित बिजली दफ्तर पहुंचे, तो अधिकांश स्थानों पर वरिष्ठ अधिकारी गैरहाजिर पाए गए। ऐसे में, किसानों को मीटरों को दफ्तरों में रखकर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस दौरान, मोर्चा के नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन उपभोक्ताओं ने प्रीपेड मीटर लगाए हैं, उन्हें भारी बिजली बिल मिले हैं, जो एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
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किसान नेताओं ने कहा कि सरकार दावा करती है कि वह गरीबों को मुफ्त या सस्ते राशन दे रही है, लेकिन वही सरकार प्रीपेड मीटर के जरिए लोगों से पहले से ही भारी बिल वसूलने का प्रयास कर रही है। उनका आरोप है कि केंद्र और पंजाब सरकार मिलकर इस योजना के जरिए बिजली कंपनियों को निजी कंपनियों को सौंपने का रास्ता खोलने का प्रयास कर रही हैं।
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उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह बहुत बड़ा सवाल है कि अगर सरकार गरीबों को राहत देने का दावा कर रही है, तो वे कैसे पहले से बिल चुकता करने के लिए मजबूर हैं? मोर्चा नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि वे पारंपरिक मैकेनिकल मीटर लगाने के पक्षधर हैं, न कि प्रीपेड मीटरों के। किसान नेताओं ने आगे कहा कि अब तक प्राप्त डाटा के अनुसार, लगभग 4000 प्रीपेड मीटर जमा किए गए हैं। उनका कहना था कि यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा, और गांवों से बाकी बचे मीटर भी जल्द ही उतार कर बिजली दफ्तरों में जमा किए जाएंगे। मोर्चा ने सरकार को चेतावनी दी कि वे किसी भी तरह की पेनल्टी या जुर्माना स्वीकार नहीं करेंगे। साथ ही, मोर्चा ने सरकार से पारंपरिक मीटर लगाने का अनुरोध किया है।

बिजली संशोधन बिल का विरोध



किसान नेताओं ने कहा कि पंजाब और केंद्र सरकार का उद्देश्य प्रीपेड मीटरों के माध्यम से क्रॉस सब्सिडी को खत्म करना है, जिससे लोगों को महंगे दामों पर बिजली मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब इस मुद्दे को बिजली संशोधन बिल से जोड़कर देखा जाएगा, तो स्पष्ट हो जाएगा कि यह कदम बिजली प्राइवेटाइजेशन की दिशा में एक कदम है। इस आंदोलन के दौरान, जिले और गांव स्तर पर किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया और मीटर जमा किए। यह आंदोलन दिखाता है कि किसान इस मुद्दे पर कितना गंभीर हैं और वे सरकार के खिलाफ अपनी एकजुटता दिखा रहे हैं।


किसान मंत्री के गृह जिले में भी आंदोलन



किसान मजदूर मोर्चा ने बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा के गृह जिले लुधियाना के गांव ससराली से चिप वाले मीटरों के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत की। किसानों ने बिजली मीटर उतारने के बाद, विभाग को वापस जमा करवाने का ऐलान किया। दिलबाग सिंह, जो किसान मजदूर मोर्चा के सदस्य हैं, ने कहा कि सरकार और पावरकॉम को चेतावनी दी जाती है कि किसी भी तरह की कार्रवाई और जुर्माना दिलबाग सिंह पर किया जाए, क्योंकि यह आंदोलन उनका है। किसान मजदूर मोर्चा का यह आंदोलन अब एक व्यापक मुद्दा बन चुका है। किसानों की मांग है कि प्रीपेड मीटरों की जगह पारंपरिक मैकेनिकल मीटर लगाए जाएं और किसी भी तरह की पेनल्टी या भारी बिल का विरोध किया जाएगा। आगामी दिनों में, यह आंदोलन और भी तेज़ी से फैल सकता है, जो पंजाब सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

किसान मजदूर मोर्चा की प्रमुख मांगें



-प्रीपेड मीटरों की जगह पारंपरिक मैकेनिकल मीटर लगाए जाएं।

-किसी भी प्रकार की पेनल्टी या एवरेज बिल स्वीकार नहीं किया जाएगा।



-बिजली के दामों में वृद्धि के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।

-सरकार की ओर से प्राइवेट कंपनियों को बिजली क्षेत्र सौंपने की प्रक्रिया पर रोक लगे।
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