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अमृतसर : खेतों में बने घर हमेशा ही रहे हैं अपराधियों की सुरक्षित शरणस्थली, आतंकवाद के दौर में दहशतगर्द भी छिपे थे

Thu, 21 Jul 2022 12:57 AM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Thu, 21 Jul 2022 12:57 AM IST
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Farm houses have always been a safe haven for criminals
अमृतसर। भारत पाक सीमा के आसपास स्थित गांवों के खेतों में बने लोगों के घर हमेशा ही अपराधियों की शरणस्थली रहे हैं। कभी सोना और अफीम के तस्करों की शरणस्थली थे खेतों में बने ये मकान। आतंकवाद के दौर में खालिस्तानी आतंकवादियों और दहशतगर्दों के छिपने व रहने के लिए भी यही थे सुरक्षित ठिकाने। अब यही डेरे गैंगस्टरों के लिए मुफीद साबित हो रहे हैं।
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भारत पाक सीमा के पास होने के कारण यह स्थल तस्करों, आतंकवादियों और गैंगस्टरों को सीमा पार से नशीले पदार्थ, हथियार और अन्य गैर कानूनी सामग्री आसानी से प्राप्त कर छिपने के सुरक्षित किले हैं। खेतों में बने इन घरों के आसपास मक्की, चरी और गन्ने की ऊंची फसलें भी अपराधियों को छिपने व उनकी गैर कानूनी गतिविधियों को अंजाम तक पहुंचाने में सहायता करती हैं।
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यही कारण था कि प्रसिद्ध गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद गैंगस्टर व शॉर्प शूटर मनप्रीत और जगरूप रूपा बाइक पर फरार होकर तरनतारन की ओर गए और वहां से भकना कलां के पास स्थित खेतों में एक सुनसान घर में छिप गए। पता चला है कि यह घर व भूमि बलविंदर सिंह डेयरी वाले की है, यहां उसका परिवार अब नहीं रह रहा।
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गैंगस्टरों को यह जगह किसने उपलब्ध करवाई। यहां तक शार्प शूटर मनु और रूपा कैसे पहुंचे पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी है। बलविंदर सिंह डेयरी वाला कहां रह रहा है और अब क्या करता है, पुलिस ने इसको लेकर भी जांच शुरू कर दी है। आतंकवाद के दौर में भी पंजाब में आतंकवादी हमेशा ही गांवों के बाहर खेतों में स्थित घरों में रहना पसंद करते थे, क्योंकि वहां गांव के आम लोगों का आना-जाना नहीं होता था। वहीं किसी को पता भी नहीं चलता था कि खेतों में बने घर में कौन आया और कौन गया। मनु और रूपा को भी ढूंढने में पुलिस लगातार लगी हुई थी। इसके चलते ये दोनों गांव के पुराने घर में शरण लेकर रहने लगे।
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