असर: अफगानिस्तान पर तालिबानी कब्जे से ड्राई फ्रूट कारोबार संकट में, कारोबारियों के करोड़ों रुपये फंसे
भारत के साथ अफगानिस्तान का यह कारोबार वहां की लाइफ लाइन है और तालिबानी इस बारे में अच्छे से जानते हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बनने वाली तालिबान सरकार अपनी एक्सपोर्ट नीति स्पष्ट कर देगी और दोनों देशों के बीच आईसीपी अटारी के जरिये होने वाला कारोबार दोबारा से शुरू हो जाएगा।
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अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद तेजी से बदले हालात के कारण भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाला ड्राई फ्रूट का कारोबार ठहर गया है। तालिबान के अफगानिस्तान के सभी बॉर्डरों पर कब्जा करने के बाद भारत के ड्राई फ्रूट कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। इसका सीधा असर बाजार में बिकने वाले ड्राई फ्रूट की कीमतों पर दिखने लगा है।
भारत के साथ ड्राई फ्रूट का कारोबार अफगानिस्तान की लाइफ लाइन समझी जाती है। क्योंकि अकेले भारत के साथ ही साल में 2 हजार से लेकर 2.5 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। अफगानिस्तान के बादाम, काजू, पिस्ता और अंजीर सहित एक दर्जन से ज्यादा उत्पाद भारत की मार्केट में बिकते हैं। अब तालिबान के कब्जे के बाद बने हालात से फिलहाल अफगानिस्तान के कारोबारियों को एडवांस दिए भारतीय कारोबारियों के करोड़ों रुपये फंस गए हैं।
फेडरेशन आफ करियाणा एंड ड्राई फ्रूट कामर्शियल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल मेहरा कहते हैं कि पंजाब की मार्केट में अफगानिस्तान के बादाम, काजू, पिस्ता, अनारदाना और अनार, सोंठ, मुलेठी, अंगूर, केसर, मुनक्का, दालचीनी सहित कई अन्य उत्पाद काफी पसंद किए जाते हैं। ये उत्पाद गुणवत्ता के लिए पहचाने जाते हैं और पंजाब सहित पूरे भारत में इनकी काफी मांग रहती है। आने वाले दिनों में भारत में त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। जिसमें लोग ड्राई फ्रूट की खूब खरीदारी करते हैं। तालिबान सरकार ने अगर जल्द ही अपनी एक्सपोर्ट नीति जारी न की तो इन उत्पादों के रेट आसमान छू सकते हैं।
अफगानिस्तान में पक चुकी है फसल
फेडरेशन ऑफ करियाना एंड ड्राई फ्रूट कामर्शियल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल मेहरा ने बताया कि अगस्त में ड्राई फ्रूट्स की पक चुकी फसल को संभालना बहुत मुश्किल भरा काम है। फसल पकने के बाद अगर उसे प्रोसेस कर मार्केट में नहीं भेजा गया तो अफगानिस्तान को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि भारत के साथ अफगानिस्तान का यह कारोबार उनकी लाइफ लाइन है और तालिबानी इस बारे में अच्छे से जानते हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बनने वाली तालिबान सरकार अपनी एक्सपोर्ट नीति स्पष्ट कर देगी और दोनों देशों के बीच आईसीपी अटारी के जरिये होने वाला कारोबार दोबारा से शुरू हो जाएगा।
रोजाना आठ से दस ट्रक भारत आते थे
फेडरेशन ऑफ करियाना एंड ड्राई फ्रूट कामर्शियल एसोसिएशन के संयुक्त सचिव सुमन मेहरा और गुरदीप सिंह विर्दी ने कहा कि अफगानिस्तान के ड्राई फ्रूट का कारोबार इंटेग्रेटेड चेक पोस्ट अटारी के जरिये पाकिस्तान के रास्ते होता है। 15 दिन पहले ड्राई फ्रूट के रोजाना आठ से दस ट्रक भारत आते थे। लेकिन आज हालात ये हैं कि मुश्किल से एक-दो ट्रक ही आईसीपी पर पहुंच रहे हैं। क्योंकि वहां असमंजस की स्थिति है। इसके चलते पंजाब के कारोबारियों के अफगानिस्तान के कारोबारियों को एडवांस दिए करोड़ों रुपये फंस गए हैं।