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डाक्टरों ने सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के पुतले का किया पोस्टमार्टम
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पंजाब के सरकारी अस्पतालों के डाक्टरों व अन्य स्टाफ ने शनिवार को हड़ताल का नया अंदाज अपनाते हुए राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पुतले का ही पोस्टमार्टम कर दिया। डाक्टरों ने अपनी मांगों के समर्थन में इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन डा. राकेश शर्मा के नेतृत्व में पहले सिविल अस्पताल में कैप्टन की शव यात्रा निकाली और सीएम के पुतले को आग के हवाले कर दिया।
इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ. राकेश शमा ने कहा कि पंजाब की कैप्टन सरकार ने मोदी साहिब द्वारा किसानों के लिए अपनाया फार्मूला अपना लिया है, कि उन्हें थका दो। यह लोग खुद ही थक-हार कर बैठ जाएंगे और अपनी हड़ताल को वापस ले लेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह दिल्ली की सीमा पर अपने अधिकारों के लिए बैठे किसान नहीं थके, उसी तरह वे लोग भी अपने हकों के लिए लगातार संघर्ष जारी रखेंगे।
उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री और विधायक तो खुद 6-6 पेंशन ले रहे हैं जबकि दूसरी तरफ जो 60 साल तक सरकार की सेवा करता है, उनकी पेंशन बंद कर दी है। अगर सरकार का खजाना खाली है तो क्या मंत्रियों और विधायकों की पेंशन का इस पर कोई असर नहीं पड़ता। कच्चे मुलाजिमों को रेगुलर किए जाने संबंधी कैबिनेट मंत्री ओ पी सोनी को मांग पत्र भी दिया, लेकिन उन्हें भी पता नहीं कि उनके अपने शहर में डाक्टरों की हड़ताल चल रही है।
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एसोसिएशन के जिला प्रधान राजेश शर्मा ने कहा कि उन्होंने अपने साथी कर्मचारियों के लिए मांगें मंगवाने के लिए मुख्यमंत्री को अपने खून से पत्र लिखा, लेकिन सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पुतले का पोस्टमार्टम करने के दौरान सामने आया कि उसके अंदर तो दिल ही नहीं था।
सिविल अस्पताल की संदीप कौर ने बताया कि मोदी सरकार का किसानों के प्रति अपनाया जाने वाला फार्मूला पंजाब में काम आने वाला नहीं। सरकार को कर्मचारियों की मांगें माननी ही पड़ेंगी। सिविल अस्पताल की स्टाफ नर्स जसबीर कौर ने बताया कि यह पहली बार देखा है कि वेतन आयोग लागू होने पर कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन घटा हो।
फोटो-6,7
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इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ. राकेश शमा ने कहा कि पंजाब की कैप्टन सरकार ने मोदी साहिब द्वारा किसानों के लिए अपनाया फार्मूला अपना लिया है, कि उन्हें थका दो। यह लोग खुद ही थक-हार कर बैठ जाएंगे और अपनी हड़ताल को वापस ले लेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह दिल्ली की सीमा पर अपने अधिकारों के लिए बैठे किसान नहीं थके, उसी तरह वे लोग भी अपने हकों के लिए लगातार संघर्ष जारी रखेंगे।
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उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री और विधायक तो खुद 6-6 पेंशन ले रहे हैं जबकि दूसरी तरफ जो 60 साल तक सरकार की सेवा करता है, उनकी पेंशन बंद कर दी है। अगर सरकार का खजाना खाली है तो क्या मंत्रियों और विधायकों की पेंशन का इस पर कोई असर नहीं पड़ता। कच्चे मुलाजिमों को रेगुलर किए जाने संबंधी कैबिनेट मंत्री ओ पी सोनी को मांग पत्र भी दिया, लेकिन उन्हें भी पता नहीं कि उनके अपने शहर में डाक्टरों की हड़ताल चल रही है।
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एसोसिएशन के जिला प्रधान राजेश शर्मा ने कहा कि उन्होंने अपने साथी कर्मचारियों के लिए मांगें मंगवाने के लिए मुख्यमंत्री को अपने खून से पत्र लिखा, लेकिन सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पुतले का पोस्टमार्टम करने के दौरान सामने आया कि उसके अंदर तो दिल ही नहीं था।
सिविल अस्पताल की संदीप कौर ने बताया कि मोदी सरकार का किसानों के प्रति अपनाया जाने वाला फार्मूला पंजाब में काम आने वाला नहीं। सरकार को कर्मचारियों की मांगें माननी ही पड़ेंगी। सिविल अस्पताल की स्टाफ नर्स जसबीर कौर ने बताया कि यह पहली बार देखा है कि वेतन आयोग लागू होने पर कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन घटा हो।
फोटो-6,7