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मुंबई के एक प्रकाशक ने दु:ख भंजनी बेर साहिब पर की गलत टिप्पिणि
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पवित्र सरोवर को बताया झील
एसजीपीसी ने प्रकाशक को भेजा कानूनी नोटिस
मुंबई के एक प्रकाशक ने दुख भंजनी बेर साहिब पर की गलत टिप्पणी
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर। एक निजी प्रकाशक द्वारा प्रकाशित पुस्तक में श्री हरमंदिर साहिब स्थित एतिहासिक दु:ख भंजनी बेर साहिब के बारे में की गई गलत टिप्पणियों का एसजीपीसी ने कड़ा संज्ञान लिया है। एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने बताया की मुंबई के एक प्रकाशक ‘विलको पब्लिकेशन हाउस’ की ओर से प्रकाशित पुस्तक में श्री हरमंदिर साहिब में सुशोभित दु:ख भंजनी बेर साहिब के साथ लाल धागे (मोली) बांध कर मन्नत मांगने का उल्लेख किया है। श्री हरमंदिर साहिब के पवित्र सरोवर को झील लिखा गया है। इसके साथ-साथ 1984 में तत्कालीन सरकार की ओर से श्री हरमंदिर साहिब में कराए हमले के दौरान हुए शहीदों के इतिहास को बदलने का दु:साहस किया है। एसजीपीसी प्रकाशक के खिलाफ सिख इतिहास के साथ छेड़खानी के आरोप में लीगल नोटिस भेज दिया है। आरोप है कि प्रकाशक ने सिख धर्म की मौलिकता व इसके अलगपन पर हमला किया है। लौंगोवाल ने कहा कि श्री हरमंदिर साहिब सिखों का केंद्रीय धार्मिक स्थान है। पूरी दुनिया के लिए यह आध्यात्मिकता का स्त्रोत है। कुछ लोग जानबूझ कर इस स्थान की एतिहासिकता को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का प्रयास कर रहें है। सिख कौम इसे सहन नहीं करेगी। लौंगोवाल ने संगत को जागरूक करते हुए कहा कि वह इस प्रकार की पुस्तकों को मान्यता न दें। बच्चों को सिख इतिहास की प्रमाणित पुस्तक ही पढ़ने के लिए दें।
बोर्ड ‘आसा दी वार’ की गलत छिपाई करने वालों के विरुद्ध सख्त करवाई करे
इस के साथ ही एसजीपीसी भाई लौंगोवाल ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं कक्षा की पुस्तक में ‘आसा दी वार’ के साथ संबंधित पावन गुरबाणी की गलत छिपाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। बोर्ड अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाए। भविष्य में इस प्रकार की गलतियां न की जाएं। बोर्ड ने इससे पहले भी सिख इतिहास को तोड़मोड़ कर पेश किया था। इस कारण सिखों में गुस्सा था। इस प्रकार की गलतियां बार बार हो रही हैं, यह उचित नहीं है। बोर्ड दोषियों के विरुद्ध सख्त करवाई करे।
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एसजीपीसी ने प्रकाशक को भेजा कानूनी नोटिस
मुंबई के एक प्रकाशक ने दुख भंजनी बेर साहिब पर की गलत टिप्पणी
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर। एक निजी प्रकाशक द्वारा प्रकाशित पुस्तक में श्री हरमंदिर साहिब स्थित एतिहासिक दु:ख भंजनी बेर साहिब के बारे में की गई गलत टिप्पणियों का एसजीपीसी ने कड़ा संज्ञान लिया है। एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने बताया की मुंबई के एक प्रकाशक ‘विलको पब्लिकेशन हाउस’ की ओर से प्रकाशित पुस्तक में श्री हरमंदिर साहिब में सुशोभित दु:ख भंजनी बेर साहिब के साथ लाल धागे (मोली) बांध कर मन्नत मांगने का उल्लेख किया है। श्री हरमंदिर साहिब के पवित्र सरोवर को झील लिखा गया है। इसके साथ-साथ 1984 में तत्कालीन सरकार की ओर से श्री हरमंदिर साहिब में कराए हमले के दौरान हुए शहीदों के इतिहास को बदलने का दु:साहस किया है। एसजीपीसी प्रकाशक के खिलाफ सिख इतिहास के साथ छेड़खानी के आरोप में लीगल नोटिस भेज दिया है। आरोप है कि प्रकाशक ने सिख धर्म की मौलिकता व इसके अलगपन पर हमला किया है। लौंगोवाल ने कहा कि श्री हरमंदिर साहिब सिखों का केंद्रीय धार्मिक स्थान है। पूरी दुनिया के लिए यह आध्यात्मिकता का स्त्रोत है। कुछ लोग जानबूझ कर इस स्थान की एतिहासिकता को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का प्रयास कर रहें है। सिख कौम इसे सहन नहीं करेगी। लौंगोवाल ने संगत को जागरूक करते हुए कहा कि वह इस प्रकार की पुस्तकों को मान्यता न दें। बच्चों को सिख इतिहास की प्रमाणित पुस्तक ही पढ़ने के लिए दें।
बोर्ड ‘आसा दी वार’ की गलत छिपाई करने वालों के विरुद्ध सख्त करवाई करे
इस के साथ ही एसजीपीसी भाई लौंगोवाल ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं कक्षा की पुस्तक में ‘आसा दी वार’ के साथ संबंधित पावन गुरबाणी की गलत छिपाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। बोर्ड अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाए। भविष्य में इस प्रकार की गलतियां न की जाएं। बोर्ड ने इससे पहले भी सिख इतिहास को तोड़मोड़ कर पेश किया था। इस कारण सिखों में गुस्सा था। इस प्रकार की गलतियां बार बार हो रही हैं, यह उचित नहीं है। बोर्ड दोषियों के विरुद्ध सख्त करवाई करे।
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