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Amritsar News: हिंद-पाक सम्मेलन में आतंकवाद की निंदा, ट्रेड खोलने व शांति पार्क स्थापित करने की मांग

Thu, 14 Aug 2025 09:10 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 14 Aug 2025 09:10 PM IST
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Condemnation of terrorism in Indo-Pak conference, demand for opening trade and setting up of peace park
संवाद न्यूज एजेंसी
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अमृतसर। भारत-पाक के बीच जारी तल्खी के बीच अमन के पैरोकारों ने दोनों देशों के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित सम्मेलन में आपसी सद्भाव, व्यापार और आवाजाही को बढ़ावा देने पर जोर दिया। वक्ताओं ने आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा की और शहीदों को नमन किया।
हिंद-पाक दोस्ती मंच, फोकलोर रिसर्च अकादमी, साफमा, पाकिस्तान इंडिया पीपुल फाॅर पीस एंड डेमोक्रेसी और पंजाब जागृति मंच ने अपने समान विचारधारा वाले संगठनों सरबत दा भला ट्रस्ट, नामधारी दरबार और विरसा विहार अमृतसर के सहयोग से आयोजित सम्मेलन में भारत-पाक संबंधों की वर्तमान स्थिति विषय पर चर्चा की। सम्मेलन में पहले 1947 के विभाजन और पहलगाम में मारे लोगों को श्रद्धांजलि दी गई और दोनों देशों के बीच अच्छे संबंधों की कामना करते हुए सीमा पार से आने वाले आतंकवाद और नशे को रोकने की मांग की गई। अकादमी के अध्यक्ष रमेश यादव ने कहा कि दोनों देशों के शांतिप्रिय लोग मौजूदा परिस्थितियों में भी सुलह करने की कोशिश कर रहे हैं। हिंद-पाक दोस्ती मंच के महासचिव सतनाम सिंह मानक ने लोगों को बांटने वाली राजनीति का विरोध किया और कहा कि दोनों देशों को शांति और मित्रता के लिए प्रयास करने चाहिए।
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उन्होंने पहलगाम की घटना की निंदा की और कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद और नशीली दवाओं की आपूर्ति को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। किसान नेता रमिंदर सिंह ने कहा कि यदि भारत-पाकिस्तान सीमा के माध्यम से दक्षिण एशिया के बीच व्यापार शुरू हो जाए तो 30 अरब डालर का विकास होगा और लोगों में खुशहाली आएगी। प्रो. बावा सिंह ने अमेरिका और कनाडा की तरह भारत और पाकिस्तान के बीच खुले व्यापार पर जोर दिया। सम्मेलन में पांच सूत्रीय प्रस्ताव भी पास किए गए, जिसमें भारत, पाक और बांग्लादेश मेंं अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों और जबरन धर्मांतरण को रोकने की बात कही गई। इसी तरह से भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार और लोगों की आवाजाही को फिर से शुरू करने वीजा प्रक्रिया को सरल करने, करतारपुर साहिब काॅरिडोर को भी सिख तीर्थयात्रियों के लिए फिर से खोलने और देश के विभाजन के दौरान शहीद हुए दस लाख लोगों की स्मृति में क्रमश: अटारी-वाघा और भारत-बांग्लादेश सीमा पर दो शांति पार्क बनाए जाने चाहिए, जहां तीनों देशों के लोग समय-समय पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करके उन्हें याद कर सकें।
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