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रिपोर्ट में दावा: 267 नहीं, 328 पावन स्वरूप हुए थे लापता, एसजीपीसी तक ही सीमित रही जांच
Tue, 25 Aug 2020 02:03 PM IST
पंजाब ब्यूरो
अमर उजाला, अमृतसर
अमर उजाला, अमृतसर
Published by: पंजाब ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2020 02:03 PM IST
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सिंह साहिबान की बैठक
- फोटो : अमर उजाला
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गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से लापता हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूपों की संख्या 267 नहीं 328 थी। यह जानकारी मामले की जांच कर रही कमेटी के मुखिया वकील ईशर सिंह तेलंगाना ने अपनी रिपोर्ट में दी है। सोमवार सुबह इस रिपोर्ट पर पांच सिंह साहिबान की बैठक में विचार किया गया।
पांच सिंह साहिबान ने एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल को आदेश दिए कि वह एक सप्ताह के भीतर कार्यकारिणी की आपात बैठक बुलाकर रिपोर्ट में बताए गए आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई करें। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस मामले में बेईमानी व लापरवाही हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एसजीपीसी के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से प्रकाशन विभाग द्वारा जारी किए वेस्ट अंगों के स्थान पर दिए गए अतिरिक्त अंगों से अनधिकृत ढंग से पावन स्वरूप तैयार कराए गए। ये पावन स्वरूपों बिना बिल काटे संगत को दिए गए। एसजीपीसी अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक बार 61 और एक बार 125 पावन स्वरूप अनधिकृत ढंग से अतिरिक्त अंगों से तैयार करवाए।
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एसजीपीसी द्वारा की गई जांच के अनुसार 18 अगस्त 2015 से लेकर 31 मई 2020 तक मौजूदा लेजर में 267 पावन स्वरूप लापता थे। वहीं इस समय के बिलों और डिलीवरी ऑर्डर में भी भारी अंतर है। अधिकारियों ने लेजर के साथ छेड़छाड़ की। 2016 से प्रकाशित पावन स्वरूपों का ऑडिट ही नहीं करवाया गया।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब साहिब जी के पावन स्वरूपों की स्टोर लेजर सही ढंग से मेंटेन ही नहीं की गई। ओपनिंग व क्लोजिंग लेजर में बार-बार कटिंग की गई। 2013 से 2015 की लेजर को जांच के दौरान पाया गया कि गोल्डन प्रेस के पब्लिकेशन विभाग की लेजर में 18 अगस्त 2015 को 267 नहीं 328 स्वरूप लापता थे।
पांच सिंह साहिबान की बैठक में एसजीपीसी के तत्कालीन मुख्य सचिव हरचरण सिंह और कार्यकारिणी (2016) को मंगलवार सुबह 10 बजे श्री अकाल तख्त साहिब में अपना स्पष्टीकरण देने के आदेश जारी किए गए। मुख्य सचिव सहित तत्कालीन कार्यकारिणी ने लापता हुए पावन स्वरूपों पर कोई भी पश्चाताप नहीं किया है। इस पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया।
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पांच सिंह साहिबान ने एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल को आदेश दिए कि वह एक सप्ताह के भीतर कार्यकारिणी की आपात बैठक बुलाकर रिपोर्ट में बताए गए आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई करें। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस मामले में बेईमानी व लापरवाही हुई है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि एसजीपीसी के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से प्रकाशन विभाग द्वारा जारी किए वेस्ट अंगों के स्थान पर दिए गए अतिरिक्त अंगों से अनधिकृत ढंग से पावन स्वरूप तैयार कराए गए। ये पावन स्वरूपों बिना बिल काटे संगत को दिए गए। एसजीपीसी अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक बार 61 और एक बार 125 पावन स्वरूप अनधिकृत ढंग से अतिरिक्त अंगों से तैयार करवाए।
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एसजीपीसी द्वारा की गई जांच के अनुसार 18 अगस्त 2015 से लेकर 31 मई 2020 तक मौजूदा लेजर में 267 पावन स्वरूप लापता थे। वहीं इस समय के बिलों और डिलीवरी ऑर्डर में भी भारी अंतर है। अधिकारियों ने लेजर के साथ छेड़छाड़ की। 2016 से प्रकाशित पावन स्वरूपों का ऑडिट ही नहीं करवाया गया।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब साहिब जी के पावन स्वरूपों की स्टोर लेजर सही ढंग से मेंटेन ही नहीं की गई। ओपनिंग व क्लोजिंग लेजर में बार-बार कटिंग की गई। 2013 से 2015 की लेजर को जांच के दौरान पाया गया कि गोल्डन प्रेस के पब्लिकेशन विभाग की लेजर में 18 अगस्त 2015 को 267 नहीं 328 स्वरूप लापता थे।
पांच सिंह साहिबान की बैठक में एसजीपीसी के तत्कालीन मुख्य सचिव हरचरण सिंह और कार्यकारिणी (2016) को मंगलवार सुबह 10 बजे श्री अकाल तख्त साहिब में अपना स्पष्टीकरण देने के आदेश जारी किए गए। मुख्य सचिव सहित तत्कालीन कार्यकारिणी ने लापता हुए पावन स्वरूपों पर कोई भी पश्चाताप नहीं किया है। इस पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया।
ढढरियांवाला के लिए धार्मिक समागम का आयोजन न करे
पांच सिंह साहिबान की बैठक में देश-विदेश में बसी सिख संगत, सभी गुरुद्वारा साहिबान की कमेटियों व सभा-सोसाइटियों को निर्देश दिए हैं कि विवादित प्रचारक रंजीत सिंह ढढरियांवाला जब तक श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होकर माफी नहीं मांगता, तब तक उसके धार्मिक समागमों का आयोजन न किया जाए। यदि कोई ढढरियांवाला के समागम का आयोजन करता है तो वहां होने वाली किसी भी संभावित घटना का जिम्मेदार वह होगा।
उसके धार्मिक समागम न सजाए जाएं और उसके समागमों की वीडियो न वायरल की जाए। ढढरियांवाला ने सबक न सीखा तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह पांच सिंह साहिबान ने इंग्लैंड के एक सिख प्रचारक भाई हरविंदर सिंह निरवैर खालसा का भी बहिष्कार करने के आदेश दिए हैं। यह बहिष्कार तब तक रहेगा, जब तक वह श्री अकाल तख्त साहिब में आकर माफी नहीं मांग लेता।
ओडिशा में स्थित गुरुद्वारा आरती साहिब का नाम बदलें
एक सिख शमशेर सिंह द्वारा जगन्नाथ पुरी में एक गुरुद्वारा साहिब का निर्माण कर उसका नाम आरती साहिब गुरुद्वारा रखने पर पांच सिंह साहिबान ने कड़ा नोटिस लिया है। उन्होंने कहा कि जिस गुरुद्वारा साहिब का नाम आरती साहिब रखा गया है, वहां श्री गुरु नानक देव जी ने आरती नहीं की थी। वह एक महीने में इस गुरुद्वारा साहिबान का नाम बदलकर इसकी जानकारी श्री अकाल तख्त साहिब को भेजें वरना उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी।
वहीं बैठक में कहा गया कि सिख एक अलग कौम है, इसका प्रमाणपत्र कौम ने ज्ञानी इकबाल सिंह से नहीं लेना है। वहीं कल श्री अकाल तख्त में अरदास पर करने पर ग्रंथी की गिरफ्तारी पर कहा गया कि गुरुद्वारा साहिबान में अरदास करना कोई गुनाह नहीं है। हालांकि पैसे के लालच में की या करवाई गई अरदास सिख धर्म में स्वीकार नहीं है। गिरफ्तारी उचित नहीं है। अरदास करना सिखों का धार्मिक फर्ज है।
उसके धार्मिक समागम न सजाए जाएं और उसके समागमों की वीडियो न वायरल की जाए। ढढरियांवाला ने सबक न सीखा तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह पांच सिंह साहिबान ने इंग्लैंड के एक सिख प्रचारक भाई हरविंदर सिंह निरवैर खालसा का भी बहिष्कार करने के आदेश दिए हैं। यह बहिष्कार तब तक रहेगा, जब तक वह श्री अकाल तख्त साहिब में आकर माफी नहीं मांग लेता।
ओडिशा में स्थित गुरुद्वारा आरती साहिब का नाम बदलें
एक सिख शमशेर सिंह द्वारा जगन्नाथ पुरी में एक गुरुद्वारा साहिब का निर्माण कर उसका नाम आरती साहिब गुरुद्वारा रखने पर पांच सिंह साहिबान ने कड़ा नोटिस लिया है। उन्होंने कहा कि जिस गुरुद्वारा साहिब का नाम आरती साहिब रखा गया है, वहां श्री गुरु नानक देव जी ने आरती नहीं की थी। वह एक महीने में इस गुरुद्वारा साहिबान का नाम बदलकर इसकी जानकारी श्री अकाल तख्त साहिब को भेजें वरना उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी।
वहीं बैठक में कहा गया कि सिख एक अलग कौम है, इसका प्रमाणपत्र कौम ने ज्ञानी इकबाल सिंह से नहीं लेना है। वहीं कल श्री अकाल तख्त में अरदास पर करने पर ग्रंथी की गिरफ्तारी पर कहा गया कि गुरुद्वारा साहिबान में अरदास करना कोई गुनाह नहीं है। हालांकि पैसे के लालच में की या करवाई गई अरदास सिख धर्म में स्वीकार नहीं है। गिरफ्तारी उचित नहीं है। अरदास करना सिखों का धार्मिक फर्ज है।
सिर्फ एसजीपीसी अधिकारियों-कर्मचारियों तक ही सीमित रही कमेटी की जांच
लापता पावन स्वरूपों की जांच के लिए बनी कमेटी की रिपोर्ट के बाद पांच सिंह साहिबान ने इस मामले में शिअद (बादल) को क्लीन चिट दे दी है। मानव अधिकार संगठन (जस्टिस अजित सिंह) ने इस मामले को जब पहली बार मीडिया के सामने उठाया था तो उन्होंने शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल पर भी उंगली उठाई थी। संगठन का दावा था कि सुखबीर बादल के आदेश के बाद इस मामले को दबाया गया था।
हालांकि जांच कमेटी प्रमुख वकील ईशर सिंह की जांच के दायरे में केवल एसजीपीसी अधिकारी व कर्मचारी ही थे। वे इस मामले में सुखबीर बादल को जांच के कटघरे में खड़ा करने का साहस नहीं जुटा पाए। आगामी वर्ष में होने वाले एसजीपीसी के चुनाव से पहले सुखबीर बादल के लिए लापता स्वरूपों के मामले में संगत की संतुष्टि करवाना एक बड़ी पंथक चुनौती थी। जांच कमेटी ने जांच में शामिल न कर उनके लिए एक बार फिर धार्मिक संकट खड़ा कर दिया है।
वहीं जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के लिए भी इस मामले का सच पंथ के समक्ष लाने की बड़ी चुनौती थी। जांच मुखिया द्वारा सुखबीर बादल को जांच के लिए न बुलाना कई शंकाएं खड़ी कर रहा है। पांच सिंह साहिबान ने एसजीपीसी को निर्देश देते हुए एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध करवाई करने के निर्देश दिए।
एसजीपीसी की तत्कालीन कार्यकारिणी के अध्यक्ष जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ थे, उनकी मौत हो चुकी है। जिस समय के दौरान पावन स्वरूप लापता हुए थे, उस दौरान के मुख्य सचिव हरचरण सिंह को एसजीपीसी ने तीन वर्ष पहले ही सेवा मुक्त कर दिया था।
हालांकि जांच कमेटी प्रमुख वकील ईशर सिंह की जांच के दायरे में केवल एसजीपीसी अधिकारी व कर्मचारी ही थे। वे इस मामले में सुखबीर बादल को जांच के कटघरे में खड़ा करने का साहस नहीं जुटा पाए। आगामी वर्ष में होने वाले एसजीपीसी के चुनाव से पहले सुखबीर बादल के लिए लापता स्वरूपों के मामले में संगत की संतुष्टि करवाना एक बड़ी पंथक चुनौती थी। जांच कमेटी ने जांच में शामिल न कर उनके लिए एक बार फिर धार्मिक संकट खड़ा कर दिया है।
वहीं जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के लिए भी इस मामले का सच पंथ के समक्ष लाने की बड़ी चुनौती थी। जांच मुखिया द्वारा सुखबीर बादल को जांच के लिए न बुलाना कई शंकाएं खड़ी कर रहा है। पांच सिंह साहिबान ने एसजीपीसी को निर्देश देते हुए एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध करवाई करने के निर्देश दिए।
एसजीपीसी की तत्कालीन कार्यकारिणी के अध्यक्ष जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ थे, उनकी मौत हो चुकी है। जिस समय के दौरान पावन स्वरूप लापता हुए थे, उस दौरान के मुख्य सचिव हरचरण सिंह को एसजीपीसी ने तीन वर्ष पहले ही सेवा मुक्त कर दिया था।