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बैंक करता रहा मकान सील, चार घंटे बच्चा फंसा रहा
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
Updated Wed, 30 Dec 2015 10:32 PM IST
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देना बैंक के अधिकारियों द्वारा एक मकान को सील करने के दौरान नौ साल का बच्चा चार घंटे लगातार फंसा रहा। घर में उस वक्त परिवार का अन्य सदस्य नहीं था।
बच्चे की चिल्लाने की आवाज को दरकिनार करते हुए बैंक अधिकारी सील कार्य में व्यस्त रहे। मामला मोहल्ले के अन्य रहने वाले घरों तक पहुंचा तो उन्होंने बैंक द्वारा लगाए ताले को तोड़कर बच्चे को बाहर निकाला। सूचना मिलने पर थाना मोहकम्मपुरा पुलिस एसएचओ जगजीत सिंह पुलिस पार्टी समेत घटनास्थल पर पहुंचे।
बच्चे के पिता नरिंद्र पाल निवासी मोहकम्मपुरा शीशे बनाने का कार्य करता है। उसके बयान पर देना बैंक के मैनेेजर मृत्युंजय के साथ अन्य अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्जकर ली गई है।
मामला बुधवार को दोपहर तीन बजे का है जब आकाश नाम का बच्चा घर में अकेला था। उस वक्त देना बैंक के अधिकारी आए जिन्होंने घर को सील करने लगे।
घर के अंदर बच्चे ने जब गेट खुलकर बाहर आने का प्रयास किया तो बाहर खड़े बैंक अधिकारी ताले लगाने का कार्य कर रहे थे। बच्चे की चिल्लाने की आवाज को दरकिनार करते हुए बैंक अधिकारी अपने कार्य में व्यस्त रहे।
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मोहल्लेवालों को जब आकाश की चीखने के आवाज सुनाई दी तो उन्होंने पुलिस को सूचित किया जिसके पुलिस ने बच्चे के पिता नरिंद्र के बयान पर बैंक अधिकारियों को पकड़ कर पुलिस हिरासत में ले लिया। वहीं मोहल्ला निवासियों ने बैंक कर्मियों के खिलाफ आधा घंटा प्रदर्शन भी किया।
क्या था मामला
बैंक मैनेजर मृत्युंजय ने बताया कि 2009 रीतू महाजन के नाम पर इस मकान पर आठ लाख का लोन पास हुआ था, जिसकी 2013 तक लोन की किस्तें 7500 रुपये के हिसाब से आईं। बाद में ये आनी बंद हो गईं। बैंक ने कई बार नोटिस भी भेजे लेकिन ग्राहक ने लोन के पैसे नहीं जमा कराए। देना बैंक के हेड आफिस से नोटिस आने के बाद बुधवार को मकान सील किया गया।
पूर्व मेयर से उलझे बैंक अधिकारी
घटना का पता चलने पर पूर्व मेयर सुनील दती घटनास्थल पर पहुंचे, जिन्होंने बैंक अधिकारियों को उनकी भूल के लिए चेताया। इसपर देना बैंक के मैनेजर मृत्युंजय साथ अन्य अधिकारी उलझ गए। मामला गरमा गया जिसके उपरांत कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने बैंक कर्मियों के खिलाफ नारेबाजी शुरु कर दी।
केस की तफतीश जारी
एसपी ईस्ट हरजीत सिंह धानीवाल ने बताया कि केस की तफतीश के लिए थाना मोहकम्मपुरा प्रभारी जगजीत सिंह को लगाया गया। बैंक मैनेजर व उनके साथ अन्य अधिकारियों से लिखित शिकायत लिखवाने के बाद छोड़ दिया गया। जांच चल रही जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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बच्चे की चिल्लाने की आवाज को दरकिनार करते हुए बैंक अधिकारी सील कार्य में व्यस्त रहे। मामला मोहल्ले के अन्य रहने वाले घरों तक पहुंचा तो उन्होंने बैंक द्वारा लगाए ताले को तोड़कर बच्चे को बाहर निकाला। सूचना मिलने पर थाना मोहकम्मपुरा पुलिस एसएचओ जगजीत सिंह पुलिस पार्टी समेत घटनास्थल पर पहुंचे।
बच्चे के पिता नरिंद्र पाल निवासी मोहकम्मपुरा शीशे बनाने का कार्य करता है। उसके बयान पर देना बैंक के मैनेेजर मृत्युंजय के साथ अन्य अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्जकर ली गई है।
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मामला बुधवार को दोपहर तीन बजे का है जब आकाश नाम का बच्चा घर में अकेला था। उस वक्त देना बैंक के अधिकारी आए जिन्होंने घर को सील करने लगे।
घर के अंदर बच्चे ने जब गेट खुलकर बाहर आने का प्रयास किया तो बाहर खड़े बैंक अधिकारी ताले लगाने का कार्य कर रहे थे। बच्चे की चिल्लाने की आवाज को दरकिनार करते हुए बैंक अधिकारी अपने कार्य में व्यस्त रहे।
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मोहल्लेवालों को जब आकाश की चीखने के आवाज सुनाई दी तो उन्होंने पुलिस को सूचित किया जिसके पुलिस ने बच्चे के पिता नरिंद्र के बयान पर बैंक अधिकारियों को पकड़ कर पुलिस हिरासत में ले लिया। वहीं मोहल्ला निवासियों ने बैंक कर्मियों के खिलाफ आधा घंटा प्रदर्शन भी किया।
क्या था मामला
बैंक मैनेजर मृत्युंजय ने बताया कि 2009 रीतू महाजन के नाम पर इस मकान पर आठ लाख का लोन पास हुआ था, जिसकी 2013 तक लोन की किस्तें 7500 रुपये के हिसाब से आईं। बाद में ये आनी बंद हो गईं। बैंक ने कई बार नोटिस भी भेजे लेकिन ग्राहक ने लोन के पैसे नहीं जमा कराए। देना बैंक के हेड आफिस से नोटिस आने के बाद बुधवार को मकान सील किया गया।
पूर्व मेयर से उलझे बैंक अधिकारी
घटना का पता चलने पर पूर्व मेयर सुनील दती घटनास्थल पर पहुंचे, जिन्होंने बैंक अधिकारियों को उनकी भूल के लिए चेताया। इसपर देना बैंक के मैनेजर मृत्युंजय साथ अन्य अधिकारी उलझ गए। मामला गरमा गया जिसके उपरांत कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने बैंक कर्मियों के खिलाफ नारेबाजी शुरु कर दी।
केस की तफतीश जारी
एसपी ईस्ट हरजीत सिंह धानीवाल ने बताया कि केस की तफतीश के लिए थाना मोहकम्मपुरा प्रभारी जगजीत सिंह को लगाया गया। बैंक मैनेजर व उनके साथ अन्य अधिकारियों से लिखित शिकायत लिखवाने के बाद छोड़ दिया गया। जांच चल रही जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।