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अपने घर में भी है रोटी: ऑस्ट्रेलिया में 12-12 घंटे काम किया, फिर मिट्टी वापस खींच लाई... अब अमृतसर में बिजनेस
Fri, 21 Feb 2025 03:19 PM IST
निवेदिता वर्मा
पिंकेश कुमार, संवाद, अमृतसर
पिंकेश कुमार, संवाद, अमृतसर
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 21 Feb 2025 03:19 PM IST
सार
अमृतसर के रहने वाले अमरजीत सिंह ढिल्लों 2008 में बारहवीं करने के बाद ब्रिस्बेन चले गए। वहां अमेरिकन कॉलेज ब्रिस्बेन में डिप्लोमा इन बिजनेस मैनेजमेंट किया। साथ ही टैक्सी ड्राइविंग और फैक्टरी में 12-12 घंटे काम किया।
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अमरजीत सिंह ढिल्लों
- फोटो : संवाद
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विस्तार
आज पंजाब का हरेक युवा विदेश जाने का ख्वाब देखता है, ताकि वह कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड में जाकर डॉलर में कमाए। लेकिन पिछले दिनों अमेरिका से डिपोर्ट होकर वापस लौटे नौजवानों को देख पूरे पंजाब में एक तरह से गुस्सा है। हालांकि पंजाब में कई लोग ऐसे भी है जो विदेशों से अपनी सरजमीं पर नया जीवन शुरू करने के लिए खुद वापस लौटे और आज एक सफल बिजनेसमैन बनकर युवाओं को रोजगार दे रहे है।
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2008 में आस्ट्रेलिया गए थे अमरजीत
ऐसी ही एक मिसाल हैं अमृतसर के रहने वाले अमरजीत सिंह ढिल्लों। वह 2008 में बारहवीं की पढ़ाई करने के बाद ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन चले गए। वहां जाकर अमेरिकन कॉलेज ब्रिस्बेन में डिप्लोमा इन बिजनेस मैनेजमेंट किया। इसके साथ ही टैक्सी ड्राइविंग और फैक्टरी में 12-12 घंटे काम किया। ताकि पीछे अमृतसर में रहने वाले मां-बाप और छोटे भाई को अच्छा जीवन दे सके। लेकिन 4 साल कड़ी मेहनत के बाद 2011 में अहसास होने लगा कि यहां पर मशीन बन कर रह गए हैं। सिर्फ किश्तों, टैक्स का भुगतान करने और भोजन खाने के लिए काम कर रहे है।ऐसे समय में जब ऑस्ट्रेलिया में कई लोग वर्क परमिट बढ़ाने और पीआर पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तो मां-बाप से बात कर बिना कुछ सोचे समझे बैग पैक कर 12 अगस्त 2011 में वापस लौट आए।