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उच्च शिक्षा के प्रति घट रहा रुझान
Amritsar
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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अमृतसर। यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन प्रो. देव प्रकाश अग्रवाल ने कहा कि प्रतियोगिता के मौजूदा युग में विद्यार्थियों को गुणात्मक व ज्ञान से भरपूर शिक्षा प्रदान किया जाना जरूरी है। विद्यार्थियों पर किताबी ज्ञान थोपने की जगह उनकी बौद्धिक क्षमता को बढ़ाया जाना अति जरूरी है। प्रो. अग्रवाल गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के 43वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में प्रो. अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। जबकि जीएनडीयू के पूर्व वीसी प्रो. जेएस ग्रेवाल और नार्दर्न मिशिगन विश्वविद्यालय यूएसए की अंग्रेजी विभाग की प्रो. जसपाल कौर इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
प्रो. अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा संस्थान देश की सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को पूरी करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को वही शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए जो उन्हें रोजगार हासिल करने में सहायता करे। उच्च शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों का कम हो रहा रुझान देश की लिए गंभीर चुनौती है। 60 से 70 प्रतिशत विद्यार्थी प्राइमरी शिक्षा में दाखिला लेते हैं परंतु उच्च शिक्षा तक सिर्फ 40 प्रतिशत विद्यार्थी ही पहुंचते हैं। ज्ञान भरपूर समाज के निर्माण के लिए शिक्षा की मानवीय कदर कीमतों का ध्यान रखा जाना भी जरूरी है।
जीएनडीयू के पूर्व वीसी प्रो. जेएस ग्रेवाल ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं पर चल कर ज्ञान की रोशनी से दुनिया को चेतन किए जाने का यह समय है। इसलिए शिक्षा के माध्यम से सच्चाई, दया और समानता के संदेश का प्रचार व प्रसार करना शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए।
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यूएसए के विश्वविद्यालय की प्रो. जसपाल कौर ने कहा कि शिक्षा को फिरकापरस्ती से दूर रखा जाना चाहिए। सांप्रदायिकता अल्पसंख्यकों के भविष्य के लिए घातक परिणाम लेकर आती है। शिक्षा विकास मुखी होनी चाहिए न कि समाज को तोड़ने वाली। कार्यक्रम के दौरान जीएनडीयू के वीसी डा. एएस बराड विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर रिपोर्ट पेश की।
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प्रो. अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा संस्थान देश की सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को पूरी करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को वही शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए जो उन्हें रोजगार हासिल करने में सहायता करे। उच्च शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों का कम हो रहा रुझान देश की लिए गंभीर चुनौती है। 60 से 70 प्रतिशत विद्यार्थी प्राइमरी शिक्षा में दाखिला लेते हैं परंतु उच्च शिक्षा तक सिर्फ 40 प्रतिशत विद्यार्थी ही पहुंचते हैं। ज्ञान भरपूर समाज के निर्माण के लिए शिक्षा की मानवीय कदर कीमतों का ध्यान रखा जाना भी जरूरी है।
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जीएनडीयू के पूर्व वीसी प्रो. जेएस ग्रेवाल ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं पर चल कर ज्ञान की रोशनी से दुनिया को चेतन किए जाने का यह समय है। इसलिए शिक्षा के माध्यम से सच्चाई, दया और समानता के संदेश का प्रचार व प्रसार करना शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए।
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यूएसए के विश्वविद्यालय की प्रो. जसपाल कौर ने कहा कि शिक्षा को फिरकापरस्ती से दूर रखा जाना चाहिए। सांप्रदायिकता अल्पसंख्यकों के भविष्य के लिए घातक परिणाम लेकर आती है। शिक्षा विकास मुखी होनी चाहिए न कि समाज को तोड़ने वाली। कार्यक्रम के दौरान जीएनडीयू के वीसी डा. एएस बराड विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर रिपोर्ट पेश की।