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328 पवित्र स्वरूपों का मामला : स्पीकर–मंत्री के दखल के बाद दर्ज हुई एफआईआर
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-पांच साल बाद पुलिस हरकत में, 16 आरोपियों पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज
-सिख संगठनों के विरोध के दबाव के बीच सरकार ने दिया एक्शन का आदेश
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अमृतसर। पांच वर्ष पुराने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पवित्र स्वरूपों से जुड़े संवेदनशील मामले में आखिरकार पंजाब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रविवार रात 16 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। यह कदम विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस के सीधा हस्तक्षेप, सिख संगठनों के प्रदर्शन के बाद उठाया गया।
श्री हरिमंदिर साहिब के हेरिटेज रोड पर लंबे समय से विरोध कर रहे सिख सद्भावना दल और किसान संगठनों ने स्पीकर व मंत्री को ज्ञापन सौंपकर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद दोनों नेताओं ने पुलिस कमिश्नर अमृतसर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जिसके तहत सी डिवीजन थाने में धारा 295, 295ए, 409, 465 और 120बी के तहत मामला दर्ज कर लिया गया।
यह है पूरा मामलायह मामला वर्ष 2020 में उस समय सामने आया था जब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पवित्र स्वरूपों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी और संभावित हेराफेरी के आरोप लगे। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने यह मामला श्री अकाल तख्त साहिब को भेजा, जहां उस समय के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने एडवोकेट ईशर सिंह की अगुवाई में एक जांच कमेटी गठित की। कमेटी ने विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपी, जिसके आधार पर 5 सितंबर 2020 को एसजीपीसी की कार्यकारिणी ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की। हालांकि जत्थेदार ने कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए थे पर एसजीपीसी ने पुलिस को मामला न सौंपने का फैसला लिया। संगठनों का आरोप है कि एसजीपीसी ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि पुलिस जांच से अन्य मामलों में भी दखल की संभावना बन सकती थी। इसीलिए कई सिख संगठनों ने पिछले पांच वर्षों से एफआईआर दर्ज कराने की मांग उठाई। हाईकोर्ट ने भी सरकार को केस दर्ज करने के आदेश दिए थे, पर कार्रवाई नहीं हुई थी।
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किस-किस पर दर्ज हुई एफआईआर
-डॉ. रूप सिंह (चीफ सेक्रेटरी, सितंबर 2020)
-मनजीत सिंह (सेक्रेटरी, धर्म प्रचार कमेटी)
-गुरबचन सिंह, सतिंदर सिंह और निशान सिंह (जॉइंट सेक्रेटरी)
-परमजीत सिंह (इंचार्ज)
-गुरमुख सिंह (सुपरवाइजर)
-जुझार सिंह (अकाउंटेंट)
-बाज सिंह (क्लर्क)
-दलबीर सिंह (हेल्पर)
-कमलजीत सिंह (असिस्टेंट)
-कुलवंत सिंह, जसप्रीत सिंह (जिल्दसाज)
-गुरचरण सिंह (पूर्व सेक्रेटरी)
-सतिंदर सिंह कोहली (चार्टर्ड अकाउंटेंट)
-अमरजीत सिंह (सेवादार, अंगीठा साहिब)
-कुछ अन्य अज्ञात आरोपी भी शामिल हैं।
मुख्य धाराएं
295, 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), 409 (आपराधिक विश्वासघात), 465 (जालसाजी), 120बी (आपराधिक साजिश)
एसजीपीसी अध्यक्ष धामी बोले- सरकार की दखलअंदाजी स्वीकार नहीं
शिरोमणि कमेटी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने एफआईआर और सरकार की सक्रियता को सिख संस्थाओं में राजनीतिक दखल बताया। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और पंथ की स्वायत्तता के विपरीत है। धामी ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की जांच में स्पष्ट किया गया था कि यह मामला बेअदबी नहीं बल्कि कुछ कर्मचारियों द्वारा की गई वित्तीय हेराफेरी से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई पहले ही पूरी हो चुकी है, इसलिए सरकार को इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। धामी ने चेतावनी दी कि एसजीपीसी अपने धार्मिक और प्रशासनिक अधिकारों में सरकारी दखल बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने जत्थेदार से भी अपील की कि सरकार द्वारा पंथक मामलों में हस्तक्षेप को ध्यान में लिया जाए।
पवित्र स्वरूप लापता नहीं: मुख्य सचिव
एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नण ने कहा कि गुरु का कोई स्वरूप लापता नहीं है। उनके मुताबिक इस प्रकरण की जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और दोषियों पर कार्रवाई भी हो चुकी है। उन्होंने लापता शब्द को अनुचित बताते हुए कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए उछाला जा रहा है। मन्नण ने बताया कि 11 दिसंबर को एसजीपीसी की कार्यकारिणी की बैठक में मौजूदा एफआईआर और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्णय लिया जाएगा।
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-सिख संगठनों के विरोध के दबाव के बीच सरकार ने दिया एक्शन का आदेश
अमृतसर। पांच वर्ष पुराने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पवित्र स्वरूपों से जुड़े संवेदनशील मामले में आखिरकार पंजाब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रविवार रात 16 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। यह कदम विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस के सीधा हस्तक्षेप, सिख संगठनों के प्रदर्शन के बाद उठाया गया।
श्री हरिमंदिर साहिब के हेरिटेज रोड पर लंबे समय से विरोध कर रहे सिख सद्भावना दल और किसान संगठनों ने स्पीकर व मंत्री को ज्ञापन सौंपकर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद दोनों नेताओं ने पुलिस कमिश्नर अमृतसर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जिसके तहत सी डिवीजन थाने में धारा 295, 295ए, 409, 465 और 120बी के तहत मामला दर्ज कर लिया गया।
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यह है पूरा मामलायह मामला वर्ष 2020 में उस समय सामने आया था जब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पवित्र स्वरूपों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी और संभावित हेराफेरी के आरोप लगे। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने यह मामला श्री अकाल तख्त साहिब को भेजा, जहां उस समय के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने एडवोकेट ईशर सिंह की अगुवाई में एक जांच कमेटी गठित की। कमेटी ने विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपी, जिसके आधार पर 5 सितंबर 2020 को एसजीपीसी की कार्यकारिणी ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की। हालांकि जत्थेदार ने कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए थे पर एसजीपीसी ने पुलिस को मामला न सौंपने का फैसला लिया। संगठनों का आरोप है कि एसजीपीसी ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि पुलिस जांच से अन्य मामलों में भी दखल की संभावना बन सकती थी। इसीलिए कई सिख संगठनों ने पिछले पांच वर्षों से एफआईआर दर्ज कराने की मांग उठाई। हाईकोर्ट ने भी सरकार को केस दर्ज करने के आदेश दिए थे, पर कार्रवाई नहीं हुई थी।
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किस-किस पर दर्ज हुई एफआईआर
-डॉ. रूप सिंह (चीफ सेक्रेटरी, सितंबर 2020)
-मनजीत सिंह (सेक्रेटरी, धर्म प्रचार कमेटी)
-गुरबचन सिंह, सतिंदर सिंह और निशान सिंह (जॉइंट सेक्रेटरी)
-परमजीत सिंह (इंचार्ज)
-गुरमुख सिंह (सुपरवाइजर)
-जुझार सिंह (अकाउंटेंट)
-बाज सिंह (क्लर्क)
-दलबीर सिंह (हेल्पर)
-कमलजीत सिंह (असिस्टेंट)
-कुलवंत सिंह, जसप्रीत सिंह (जिल्दसाज)
-गुरचरण सिंह (पूर्व सेक्रेटरी)
-सतिंदर सिंह कोहली (चार्टर्ड अकाउंटेंट)
-अमरजीत सिंह (सेवादार, अंगीठा साहिब)
-कुछ अन्य अज्ञात आरोपी भी शामिल हैं।
मुख्य धाराएं
295, 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), 409 (आपराधिक विश्वासघात), 465 (जालसाजी), 120बी (आपराधिक साजिश)
एसजीपीसी अध्यक्ष धामी बोले- सरकार की दखलअंदाजी स्वीकार नहीं
शिरोमणि कमेटी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने एफआईआर और सरकार की सक्रियता को सिख संस्थाओं में राजनीतिक दखल बताया। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और पंथ की स्वायत्तता के विपरीत है। धामी ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की जांच में स्पष्ट किया गया था कि यह मामला बेअदबी नहीं बल्कि कुछ कर्मचारियों द्वारा की गई वित्तीय हेराफेरी से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई पहले ही पूरी हो चुकी है, इसलिए सरकार को इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। धामी ने चेतावनी दी कि एसजीपीसी अपने धार्मिक और प्रशासनिक अधिकारों में सरकारी दखल बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने जत्थेदार से भी अपील की कि सरकार द्वारा पंथक मामलों में हस्तक्षेप को ध्यान में लिया जाए।
पवित्र स्वरूप लापता नहीं: मुख्य सचिव
एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नण ने कहा कि गुरु का कोई स्वरूप लापता नहीं है। उनके मुताबिक इस प्रकरण की जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और दोषियों पर कार्रवाई भी हो चुकी है। उन्होंने लापता शब्द को अनुचित बताते हुए कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए उछाला जा रहा है। मन्नण ने बताया कि 11 दिसंबर को एसजीपीसी की कार्यकारिणी की बैठक में मौजूदा एफआईआर और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्णय लिया जाएगा।