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21 महीने से नहीं मिला स्टाफ को वेतन, एडीसी भी चार महीने से कर रहे हैं इंतजार
Updated Fri, 15 Dec 2017 10:18 PM IST
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पांच महीने से हड़ताल पर हैं स्टाफ
डीआरडीए स्टाफ आफिस आता है, सत्संग करता है और लौट जाता है
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर।
जिनके कंधों पर जिले का विकास टिका है। जिनकी योजनाओं पर बेरोजगारों को रोजगार मिलना है। उन्हीं स्टाफ की सैलरी पिछले 21 महीनों से नहीं आई है। ऐसे में इन कर्मचारियों के घर का विकास रूक गया है। बैंकों से लिमिट बढ़ाकर क्रेडिट कार्ड पर घर का गुजारा कर रहे हैं तो कहीं बच्चों की पढ़ाई के खर्च को लेकर कर्ज ले रहे हैं। हालात यह हैं कि इन कर्मचारियों की कलम छोड़ हड़ताल से महकमा हिल गया है। रोज सुबह ड्यूटी पर आते हैं, आधे घंटे सत्संग करते हैं और ठीक पांच बजे घरों को लौट जाते हैं।
हम बात कर रहे हैं डिस्ट्रिक रुरल डेवलपमेेंट एजेंसी (डीआरडीए) के कर्मचारियों की। यह विभाग अधीन एडिशनल डिप्टी कमिश्नर अमृतसर के अंतर्गत आता है। केन्द्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत कर्मचारियों का वेतन बन कर आता है। पिछले 21 महीनों से स्टाफ का यही हाल है। सीनियर पद पर आसीन राजवीर कौर बताती हैं कि बेटी ने बीएसई पिछले वर्ष ही कर ली थी, एमएसई करना था। मैंने एक साल बेटी की पढ़ाई छुड़ा दी। अब बैंक से कर्ज लेकर उसका एडमीशन करवाया है। एलआईसी पॉलिसी जो सेविंग खाते में जानी थी, वो अपने तुड़वा कर घर में खर्च कर दी है। बैंकों के कर्जदार हो गए है हम।
जिले के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (विकास) रविंदर सिंह को भी सैलरी का पिछले चार महीनों से इंतजार है। कहते हैं कि सैलरी न आने से जो भी सेविंग रकम थी, खर्च हो गई। अब तो वेतन का इंतजार है। खास बात है कि जिले में विकास का खाका एडीसी विकास ही खींचते हैं। दावा करते हैं कि फंड मिल रहा है, जो विकास कार्य बंद थे, शुरू हो चुके हैं। हंसते हुए कहते हैं कि सैलरी न आने से घर का विकास रुक गया है।
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हाईकोर्ट का नोटिस, 15 दिन में जवाब दे सरकार
डीआरडीए के तरफ से पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में वेतन के लिए याचिका दायर करते हुए 15 मार्च 2017 को कंवर सुखजिन्द्र सिंह ने न्यायालय से गुहार लगाई थी कि विभाग के कर्मचारियों को सैलरी समय से मिले और पुराना वेतन दिया जाए। इस पर 11 दिसंबर को हाईकोर्ट ने संयुक्त विकास कमिश्नर व सेक्रेटरी संयुक्त विकास पंजाब को नोटिस जारी करते हुए 15 दिन में वेतन भुगतान के लिए अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
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डीआरडीए स्टाफ आफिस आता है, सत्संग करता है और लौट जाता है
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर।
जिनके कंधों पर जिले का विकास टिका है। जिनकी योजनाओं पर बेरोजगारों को रोजगार मिलना है। उन्हीं स्टाफ की सैलरी पिछले 21 महीनों से नहीं आई है। ऐसे में इन कर्मचारियों के घर का विकास रूक गया है। बैंकों से लिमिट बढ़ाकर क्रेडिट कार्ड पर घर का गुजारा कर रहे हैं तो कहीं बच्चों की पढ़ाई के खर्च को लेकर कर्ज ले रहे हैं। हालात यह हैं कि इन कर्मचारियों की कलम छोड़ हड़ताल से महकमा हिल गया है। रोज सुबह ड्यूटी पर आते हैं, आधे घंटे सत्संग करते हैं और ठीक पांच बजे घरों को लौट जाते हैं।
हम बात कर रहे हैं डिस्ट्रिक रुरल डेवलपमेेंट एजेंसी (डीआरडीए) के कर्मचारियों की। यह विभाग अधीन एडिशनल डिप्टी कमिश्नर अमृतसर के अंतर्गत आता है। केन्द्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत कर्मचारियों का वेतन बन कर आता है। पिछले 21 महीनों से स्टाफ का यही हाल है। सीनियर पद पर आसीन राजवीर कौर बताती हैं कि बेटी ने बीएसई पिछले वर्ष ही कर ली थी, एमएसई करना था। मैंने एक साल बेटी की पढ़ाई छुड़ा दी। अब बैंक से कर्ज लेकर उसका एडमीशन करवाया है। एलआईसी पॉलिसी जो सेविंग खाते में जानी थी, वो अपने तुड़वा कर घर में खर्च कर दी है। बैंकों के कर्जदार हो गए है हम।
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जिले के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (विकास) रविंदर सिंह को भी सैलरी का पिछले चार महीनों से इंतजार है। कहते हैं कि सैलरी न आने से जो भी सेविंग रकम थी, खर्च हो गई। अब तो वेतन का इंतजार है। खास बात है कि जिले में विकास का खाका एडीसी विकास ही खींचते हैं। दावा करते हैं कि फंड मिल रहा है, जो विकास कार्य बंद थे, शुरू हो चुके हैं। हंसते हुए कहते हैं कि सैलरी न आने से घर का विकास रुक गया है।
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हाईकोर्ट का नोटिस, 15 दिन में जवाब दे सरकार
डीआरडीए के तरफ से पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में वेतन के लिए याचिका दायर करते हुए 15 मार्च 2017 को कंवर सुखजिन्द्र सिंह ने न्यायालय से गुहार लगाई थी कि विभाग के कर्मचारियों को सैलरी समय से मिले और पुराना वेतन दिया जाए। इस पर 11 दिसंबर को हाईकोर्ट ने संयुक्त विकास कमिश्नर व सेक्रेटरी संयुक्त विकास पंजाब को नोटिस जारी करते हुए 15 दिन में वेतन भुगतान के लिए अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।