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नही कर सके राकेश का अंतिम संस्कार, गत शाम को ही किया सपुर्द ए खाक
Updated Tue, 03 Apr 2018 10:52 PM IST
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मोसुल पीड़ित
पिता ने कहा-केंद्र गुमराह करने के बजाय शव ही सलामत ले आता
हरजीत मसीह की बात मानी होती तो आज इस हालत में अवशेष न आते
कादियां के राकेश के अवशेषों को किया खाक ए सुपुर्द
पिता बोले-हमें बस एक नंबर दिया गया और कहा कि यह है राकेश
वीके सिंह पर निकाला गुस्सा, दुख में शामिल होने की बजाए पल्ला झाड़ लिया
अमर उजाला ब्यूरो
गुरदासपुर।
इराक में जीविका कमाने गए कादियां के राकेश का शव गत दिवस उनके पैतृक घर पहुंच गया। बेटे की हालत तथा उसके अवशेष देखकर परिजन तो क्या हर ग्रामीण आंसू बहा रहा था। सोमवार को देर रात राकेश के अवशेषों को खाक ए सुपुर्द किया गया। राकेश के पिता उस क्षण को याद कर रो रहे थे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गुमराह करने के बजाय कम से कम बेटे का शव ही सही सलामत ला देती। उसके अवशेषों की हालत देखते हुए हमें अपने बेटे का अंतिम संस्कार तक करना नसीब नहीं हुआ और गत शाम ही उसके अवशेषों को विधिपूर्वक सपुर्द ए खाक कर दिया गया। राकेश के पिता ने बताया कि हमें बस एक नंबर दिया गया, जिसमें डीएनए की रिपोर्ट के आधार पर हमें बताया गया कि यह आपका बेटा है। उन्होंने कहा कि अगर विदेश मंत्रालय ने हमें यही लाकर देना था तो वर्षों से हमसे झूठ क्यों बोला। हम पूरा घर बार बेचकर अपने बेटे के शव को सही सलामत वापस लाते।
उन्होंने विदेश मंत्री जनरल वीके सिंह पर भी गुस्सा जाहिर किया। जिसमें उन्होंने बयान दिया था कि नौकरी देना कोई फुटबाल का खेल नहीं, न ही बिस्कुट बांटने जैसा, जिसे मैं अपनी जेब में डालकर घूमता हूं। उन्होंने कहा इस सरकार का शुरू से ही यही रवैया रहा है। मोेसुल से जिंदा बचकर आए हरजीत मसीह को ही सरकार ने गलत करार दे दिया। जो शुरू से ही सच बोल रहा था। अगर उस वक्त हरजीत की बातों पर इन्होंने गौर किया होता तो हमें कम से कम अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने का मौका मिल जाता। उन्होंने बताया कि जो मंत्री 38 परिवारों के साथ संवेदना जताने की बजाय उनके दुख में शामिल होने की बजाय पल्ला झाड़ रहा है। उससे हमें अब कोई उम्मीद नहीं रही। इतना कहने के बाद मदन लाल फिर फूट फूटकर रो पड़े। उन्होंने कहा हमने तो घर संवारने के लिए अपना बच्चा विदेश भेजा था, हमें क्या मालूम था कि शव भी हासिल नहीं होगा। हम पति पत्नी और उसकी दो बहनें इसी उम्मीद में थी कि उनका बेटा घर वापस जरूर आएगा। लेकिन हमारी दुनिया ही उजड़ चुकी है।
विधायक और काउंसिल प्रधान भी पहुंचे
श्री हरगोबिंदपुर हलके के एमएलए बलविंद्र सिंह लाडी तथा नगर काउंसिल कादियां के प्रधान जरनैल सिंह माहल की मौजूदगी में ही सोमवार को देर शाम राकेश के अवशेषों के अंतिम दर्शनों कर खाक ए सपुर्द कर दिया गया। मंगलवार को हलका विधायक फतेहजंग सिंह बाजवा भी उनके साथ संवेदना व्यक्त करने आए थे। उन्होंने तसल्ली दी कि दुख की घड़ी में सरकार उनके साथ है और 5-5 लाख रुपये और नौकरी परिवार के एक सदस्य को दी जाएगी।
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फोटो 03जीडीआर9- राकेश के अवशेशों को खाक ए सपुर्द करते परिजन तथा विधायक फतेहगढ़ चूड़ियां लाडी।
03जीडीआर010- घर में मिलने आए रिशतेदार विलाप करते हुए।
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पिता ने कहा-केंद्र गुमराह करने के बजाय शव ही सलामत ले आता
हरजीत मसीह की बात मानी होती तो आज इस हालत में अवशेष न आते
कादियां के राकेश के अवशेषों को किया खाक ए सुपुर्द
पिता बोले-हमें बस एक नंबर दिया गया और कहा कि यह है राकेश
वीके सिंह पर निकाला गुस्सा, दुख में शामिल होने की बजाए पल्ला झाड़ लिया
अमर उजाला ब्यूरो
गुरदासपुर।
इराक में जीविका कमाने गए कादियां के राकेश का शव गत दिवस उनके पैतृक घर पहुंच गया। बेटे की हालत तथा उसके अवशेष देखकर परिजन तो क्या हर ग्रामीण आंसू बहा रहा था। सोमवार को देर रात राकेश के अवशेषों को खाक ए सुपुर्द किया गया। राकेश के पिता उस क्षण को याद कर रो रहे थे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गुमराह करने के बजाय कम से कम बेटे का शव ही सही सलामत ला देती। उसके अवशेषों की हालत देखते हुए हमें अपने बेटे का अंतिम संस्कार तक करना नसीब नहीं हुआ और गत शाम ही उसके अवशेषों को विधिपूर्वक सपुर्द ए खाक कर दिया गया। राकेश के पिता ने बताया कि हमें बस एक नंबर दिया गया, जिसमें डीएनए की रिपोर्ट के आधार पर हमें बताया गया कि यह आपका बेटा है। उन्होंने कहा कि अगर विदेश मंत्रालय ने हमें यही लाकर देना था तो वर्षों से हमसे झूठ क्यों बोला। हम पूरा घर बार बेचकर अपने बेटे के शव को सही सलामत वापस लाते।
उन्होंने विदेश मंत्री जनरल वीके सिंह पर भी गुस्सा जाहिर किया। जिसमें उन्होंने बयान दिया था कि नौकरी देना कोई फुटबाल का खेल नहीं, न ही बिस्कुट बांटने जैसा, जिसे मैं अपनी जेब में डालकर घूमता हूं। उन्होंने कहा इस सरकार का शुरू से ही यही रवैया रहा है। मोेसुल से जिंदा बचकर आए हरजीत मसीह को ही सरकार ने गलत करार दे दिया। जो शुरू से ही सच बोल रहा था। अगर उस वक्त हरजीत की बातों पर इन्होंने गौर किया होता तो हमें कम से कम अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने का मौका मिल जाता। उन्होंने बताया कि जो मंत्री 38 परिवारों के साथ संवेदना जताने की बजाय उनके दुख में शामिल होने की बजाय पल्ला झाड़ रहा है। उससे हमें अब कोई उम्मीद नहीं रही। इतना कहने के बाद मदन लाल फिर फूट फूटकर रो पड़े। उन्होंने कहा हमने तो घर संवारने के लिए अपना बच्चा विदेश भेजा था, हमें क्या मालूम था कि शव भी हासिल नहीं होगा। हम पति पत्नी और उसकी दो बहनें इसी उम्मीद में थी कि उनका बेटा घर वापस जरूर आएगा। लेकिन हमारी दुनिया ही उजड़ चुकी है।
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विधायक और काउंसिल प्रधान भी पहुंचे
श्री हरगोबिंदपुर हलके के एमएलए बलविंद्र सिंह लाडी तथा नगर काउंसिल कादियां के प्रधान जरनैल सिंह माहल की मौजूदगी में ही सोमवार को देर शाम राकेश के अवशेषों के अंतिम दर्शनों कर खाक ए सपुर्द कर दिया गया। मंगलवार को हलका विधायक फतेहजंग सिंह बाजवा भी उनके साथ संवेदना व्यक्त करने आए थे। उन्होंने तसल्ली दी कि दुख की घड़ी में सरकार उनके साथ है और 5-5 लाख रुपये और नौकरी परिवार के एक सदस्य को दी जाएगी।
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फोटो 03जीडीआर9- राकेश के अवशेशों को खाक ए सपुर्द करते परिजन तथा विधायक फतेहगढ़ चूड़ियां लाडी।
03जीडीआर010- घर में मिलने आए रिशतेदार विलाप करते हुए।