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जिले में डेंगू से अब तक 4 मौतें, कुल मरीज 3
Updated Tue, 24 Oct 2017 10:27 PM IST
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महिला की डेंगू से मौत, अब तक 4 जानें गईं
जिले में अभी तक कुल मरीज 387 मिले
2016 में 166 और 2015 में 66 थी मरीजों की संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट।
जिले में इस बार डेंगू जमकर कहर ढा रहा है। चालू सीजन में अभी तक डेंगू से जिले में 4 मौतें हो गई हैं। मंगलवार सुबह ही शहर के इंदिरा कालोनी में डेंगू पीड़ित महिला मरीज की मौत का है। इससे पहले भी 3 मौतें डेंगू मरीजों की हो चुकी हैं। जिले में 387 डेंगू के मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें अधिकतर मरीज लमीनी क्षेत्र के हैं।
डेंगू से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र लमीनी है। जिले में डेंगू का पहला मरीज भी लमीनी में ही मिला था और डेंगू मरीज की पहली मौत भी यहीं हुई थी। वर्ष 2016 में जिले में डेंगू मरीजों की संख्या 161 थी। वर्ष 2015 में डेंगू मरीजों की संख्या 66 थी। इस बार की यह संख्या 387 हो चुकी है। डेंगू के कहर से निपटने के लिए सेहत विभाग और नगर निगम पूरा जोर लगा रहा है। नगर निगम की टीमें फागिंग और मच्छर मार दवा का छिड़काव कर रही हैं। इसके अलावा घरों में जाकर मच्छर के लारवे की जांच करके लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। वहीं सेहत विभाग ने सिविल अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाया है।
शहर के इंदिरा कालोनी निवासी रेनू महाजन (48) पत्नी रमन महाजन की मंगलवार सुबह डेंगू से मौत हो गई। महिला का इलाज पहले शहर के ही एक निजी अस्पताल में चल रहा था। हालत ज्यादा बिगड़ने के बाद महिला को लुधियाना स्थित एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वहां महिला ने दम तोड़ दिया है। जिले में डेंगू से यह चौथी मौत है।
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सिविल अस्पताल के सीनियर मेडिकल अफसर डॉ भूपिंदर सिंह ने बताया कि बुखार, बदन दर्द, मांसपेशियों में दर्द, खुजली व उसके निशान, अंगों में सूजन आदि डेंगू के लक्षण हैं। उन्होंने कहा कि डेंगू मच्छर साफ पानी में पैदा होता है। इसलिए घरों में पानी न एकत्र होने दें। डेंगू से बचने के लिए अंगों को पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े पहनें और लक्षण होने पर डाक्टरी जांच कराएं। उन्होंने बताय सिविल अस्पताल में डेंगू के आठ मरीजों का इलाज चल रहा है। कई मरीज निजी अस्पतालों में दाखिल हैं। सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक की इंचार्ज राजविंदर कौर ने बताया कि डेंगू मरीजों के लिए रोजाना करीब 10-15 यूनिट रक्त की आपूर्ति दी जा रही है। अब तक 400 यूनिट रक्त डेंगू मरीजों के लिए दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि एक यूनिट से करीब 4-5 हजार रक्त सेल ही बन पाते हैं।
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जिले में अभी तक कुल मरीज 387 मिले
2016 में 166 और 2015 में 66 थी मरीजों की संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट।
जिले में इस बार डेंगू जमकर कहर ढा रहा है। चालू सीजन में अभी तक डेंगू से जिले में 4 मौतें हो गई हैं। मंगलवार सुबह ही शहर के इंदिरा कालोनी में डेंगू पीड़ित महिला मरीज की मौत का है। इससे पहले भी 3 मौतें डेंगू मरीजों की हो चुकी हैं। जिले में 387 डेंगू के मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें अधिकतर मरीज लमीनी क्षेत्र के हैं।
डेंगू से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र लमीनी है। जिले में डेंगू का पहला मरीज भी लमीनी में ही मिला था और डेंगू मरीज की पहली मौत भी यहीं हुई थी। वर्ष 2016 में जिले में डेंगू मरीजों की संख्या 161 थी। वर्ष 2015 में डेंगू मरीजों की संख्या 66 थी। इस बार की यह संख्या 387 हो चुकी है। डेंगू के कहर से निपटने के लिए सेहत विभाग और नगर निगम पूरा जोर लगा रहा है। नगर निगम की टीमें फागिंग और मच्छर मार दवा का छिड़काव कर रही हैं। इसके अलावा घरों में जाकर मच्छर के लारवे की जांच करके लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। वहीं सेहत विभाग ने सिविल अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाया है।
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शहर के इंदिरा कालोनी निवासी रेनू महाजन (48) पत्नी रमन महाजन की मंगलवार सुबह डेंगू से मौत हो गई। महिला का इलाज पहले शहर के ही एक निजी अस्पताल में चल रहा था। हालत ज्यादा बिगड़ने के बाद महिला को लुधियाना स्थित एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वहां महिला ने दम तोड़ दिया है। जिले में डेंगू से यह चौथी मौत है।
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सिविल अस्पताल के सीनियर मेडिकल अफसर डॉ भूपिंदर सिंह ने बताया कि बुखार, बदन दर्द, मांसपेशियों में दर्द, खुजली व उसके निशान, अंगों में सूजन आदि डेंगू के लक्षण हैं। उन्होंने कहा कि डेंगू मच्छर साफ पानी में पैदा होता है। इसलिए घरों में पानी न एकत्र होने दें। डेंगू से बचने के लिए अंगों को पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े पहनें और लक्षण होने पर डाक्टरी जांच कराएं। उन्होंने बताय सिविल अस्पताल में डेंगू के आठ मरीजों का इलाज चल रहा है। कई मरीज निजी अस्पतालों में दाखिल हैं। सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक की इंचार्ज राजविंदर कौर ने बताया कि डेंगू मरीजों के लिए रोजाना करीब 10-15 यूनिट रक्त की आपूर्ति दी जा रही है। अब तक 400 यूनिट रक्त डेंगू मरीजों के लिए दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि एक यूनिट से करीब 4-5 हजार रक्त सेल ही बन पाते हैं।