टूटा 25 साल का रिकॉर्ड: रायकोट में कभी नहीं जीता था सरकार बनाने वाली पार्टी का विधायक, आप के हाकम सिंह ठेकेदार ने तोड़ा मिथक
1997 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने निर्मल सिंह महंत की टिकट काट कर हरमोहिंदर सिंह प्रधान पर दाव खेला था। हरमोहिंदर सिंह प्रधान तो चुनाव जीत गए लेकिन पंजाब में अकाली दल की सरकार बन गई थी।
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पंजाब के हलका रायकोट में 2022 के विधानसभा चुनाव में पिछले 25 साल का रिकॉर्ड टूटने के साथ साथ इतिहास भी बदल गया है। 1992 विधानसभा चुनाव के बाद यह पहला मौका है जब पंजाब में सरकार बनाने जा रही पार्टी का विधायक यहां से जीत गया है।
रायकोट से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी हाकम सिंह ठेकेदार ने अपने नजदीकी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के प्रत्याशी कामिल अमर सिंह बोपाराय को 27408 वोट के बड़े अंतर से हरा दिया है। हाकम सिंह ठेकेदार को कुल 63303 वोट हासिल हुए जबकि कांग्रेस के कामिल अमर सिंह बोपाराय को 35895 वोट मिले हैं। इतिहास गवाह है कि 1992 से हलका रायकोट में विरोधी पार्टी का विधायक बनता आ रहा था, इसी वजह से यह हलका तरक्की में बुरी तरह पिछड़ गया था।
1997 में जीते थे कांग्रेस उम्मीदवार, सरकार बनी अकालियों की
पंजाब में आतंकवाद के काले दौर से निकलने के बाद 1992 में हुए विधानसभा चुनाव में पंजाब की जनता ने कांग्रेस की सरकार बनाई थी। उस चुनाव में रायकोट से कांग्रेस पार्टी के ही प्रत्याशी निर्मल सिंह महंत चुनाव जीतकर विधायक बन गए थे, लेकिन 1997 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने निर्मल सिंह महंत की टिकट काट कर हरमोहिंदर सिंह प्रधान पर दाव खेला था। हरमोहिंदर सिंह प्रधान तो चुनाव जीत गए लेकिन पंजाब में अकाली दल की सरकार बन गई थी।
2002 के विधानसभा चुनाव में रायकोट से अकाली दल के जत्थेदार रंजीत सिंह तलवंडी चुनाव जीत गए थे लेकिन पंजाब में सरकार कांग्रेस की बन गई थी। 2007 विधानसभा चुनाव में रायकोट से एक बार फिर कांग्रेस के हरमोहिंदर सिंह प्रधान ने चुनाव जीता लेकिन पंजाब में अकाली दल की सरकार बन गई। 2012 में विधानसभा हलका रायकोट को एससी रिजर्व घोषित कर दिया गया।
2017 में कांग्रेस प्रत्याशी हारे
इसके बाद एक बार फिर इतिहास ने खुद को दोहराया। रायकोट से कांग्रेस प्रत्याशी गुरचरन सिंह बोपाराय ने जीत हासिल की लेकिन पंजाब में सरकार अकाली दल की बन गई। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर सिटिंग एमएलए गुरचरन सिंह बोपाराय का टिकट काट कर उनके बड़े भाई डॉ. अमर सिंह बोपाराय को दिया। लेकिन चुनाव में मालवा क्षेत्र में आप की आंधी चली और कांग्रेस के डॉ. अमर सिंह बोपाराय को आप प्रत्याशी जगतार सिंह जग्गा हिस्सोवाल ने बुरी तरह हरा दिया। हालांकि इस बार पंजाब में कांग्रेस की सरकार बन गई।
डॉ. अमर सिंह के हारने के बावजूद कांग्रेस ने उन्हें 2019 के आम चुनाव में फतेहगढ़ साहिब से टिकट दी। डॉ. अमर सिंह जीत गए और उन्होंने अपने बेटे कामिल अमर सिंह बोपाराय को रायकोट में कांग्रेस पार्टी की कमान देते हुए इंचार्ज बना दिया। डॉ. अमर सिंह कांग्रेस हाईकमान से नजदीकी के चलते 2022 के इस विधानसभा चुनाव में अपने बेटे कामिल अमर सिंह बोपाराय को कांग्रेस की टिकट दिलवाने में कामयाब रहे, लेकिन इस बार विधानसभा हलका रायकोट में रिकॉर्ड टूटने के साथ इतिहास भी बदला। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी हाकम सिंह ठेकेदार ने कांग्रेस के कामिल अमर सिंह बोपाराय को बुरी तरह हराकर रायकोट का 25 साल का इतिहास बदल दिया। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के साथ उसके प्रत्याशी हाकम सिंह ठेकेदार ने भी शानदार जीत हासिल कर ली।