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प्लम की फसल पर संकट, न पैकिंग के लिए पेटियां मिल रहीं न ही मजदूर
Wed, 29 Apr 2020 03:50 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 29 Apr 2020 03:50 PM IST
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प्रदेश में अगले माह पकने वाली प्लम की फसल पर संकट गहराने लगा है। बागवान फसल को मंडी तक पहुंचाने के लिए अभी कोई बंदोबस्त नहीं कर पाए हैं। प्लम की शेल्फ लाइफ कम होने के कारण इसे पकते ही तोड़कर मंडी पहुंचना पड़ता है। इस बार लॉकडाउन और कर्फ्यू के चलते बागवान न तो खाली पेटियां खरीद पाए हैं और न ही मजदूर मिल रहे हैं। ऐसे में बागवानों को चिंता सताने लगी है कि प्लम की फसल को कैसे मंडियों तक पहुंचाएंगे।
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प्लम पैकिंग लिए लकड़ी की खाली पेटियों की जरूरत होती है। यह बाहरी राज्यों से आती हैं। इसी तरह बागीचों में प्लम तोड़ने के लिए भी काफी संख्या में मजदूरों की जरूरत होती है। लेकिन लॉकडाउन के चलते अधिकतर मजदूर गांव चले गए हैं। कोरोना महामारी के चलते इनके लौटने की संभावना भी कम है। प्लम कारोबार के लिए ठेकेदार और मजदूर सहारनपुर से आते हैं लेकिन इस बार व्यवस्था कैसे होगी इसे लेकर बागवान परेशान हैं।
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निरसु के बागवान एवं प्रधान दत्तात्रे स्वामी और पर्यावरण एवं किसान विकास समिति के मोहन सिंह ठाकुर ने बताया कि यहां के लोगों की आजीविका का साधन प्लम तथा बादाम की फसल है। यहां करीब दो लाख पेटी प्लम होती है। इस बार लॉकडाउन और कर्फ्यू के चलते खाली पेटियों और मजदूरों का बंदोबस्त नहीं हो पाया है। मजदूरों और ठेकेदारों के आने की संभावना भी कम नजर आ रही है। जॉनी कायथ ने बताया कि अगले माह पककर तैयार होने वाली प्लम की फसल को बेचना इस बार मुश्किल लग रहा है।
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प्लम की फसल के लिए आजकल मौसम का साफ रहना जरूरी है। लेकिन कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि के चलते बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अब अगर फसल मंडियों तक नहीं पहुंच पाई तो और क्षति झेलनी होगी।
उद्यान विभाग के निदेशक मदन मोहन शर्मा ने कहा कि प्लम की पैदावार के बाद इसे मार्केट में लाने के लिए समय और सावधानी की जरूरत है। आजकल मौसम साफ रहना जरूरी है। कुछ दिनों से बारिश और ओलावृष्टि से बागवानों को काफी नुकसान हो रहा है।