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नेपाल के राजा ने बनवाया था भारत में यह मंदिर, इसका सरंक्षण भी करती है वहां की सरकार

Tue, 04 Feb 2020 06:04 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 04 Feb 2020 06:04 PM IST
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Varanasi Pashupatinath temple built by nepali king patronized by Nepali government
ललिता घाट पर बना पशुपति नाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

बनारस में एक ऐसा मंदिर है, जिसे नेपाल के राजा ने बनवाया था और इसका सरंक्षण वहां की सरकार ही करती है। साथ ही यह मंदिर ऐसा है जिसमें बिल्कुल भी कंक्रीट का प्रयोग नहीं हुआ है। इसे नेपाल से लाई गई लकड़ियों से बनाया गया है।

Varanasi Pashupatinath temple built by nepali king patronized by Nepali government

ललिता घाट पर बसे मिनी नेपाल में ऐसी झलक देखने को मिलती है। विश्वनाथ कॉरिडोर के पहले पाथवे के प्रवेश द्वार जलासेन घाट के बगल में स्थित भगवान पशुपति का मंदिर नेपाल के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नेपाल में बने पशुपति नाथ मंदिर का प्रतिरूप इस मंदिर में प्रवेश के बाद काशी में ही नेपाल का अहसास होगा। यह मंदिर नेपाली मंदिर के नाम से भी मशहूर है। मंदिर के संरक्षण का काम भी नेपाल सरकार ही करती है।

Varanasi Pashupatinath temple built by nepali king patronized by Nepali government

मंदिर का निर्माण नेपाल के राजा राणा बहादुर शाह ने करवाया था
पशुपतिनाथ मंदिर का निर्माण नेपाल के राजा राणा बहादुर साहा ने करवाया था। वाराणसी में मंदिर निर्माण के उद्देश्य से वो काशी आए और प्रवास किया। वर्ष 1800 से 1804 तक नेपाल के राजा राणा बहादुर शाह ने काशी में प्रवास किया। प्रवास के दौरान पूजा पाठ के लिए उन्होंने काशी में शिव मंदिर बनवाने का निर्णय लिया, वो भी नेपाल के वास्तु और शिल्प के अनुसार।

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Varanasi Pashupatinath temple built by nepali king patronized by Nepali government

गंगा किनारे घाट की भूमि इस मंदिर के निर्माण के लिए चुनी और इसका निर्माण शुरू कराया इसी दौरान 1806 में उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद उनके बेटे राजा राजेंद्र वीर विक्रम साहा ने इस मंदिर का निर्माण 1843 में पूरा कराया। बीच में कई वर्षों तक इस मंदिर का निर्माण रुका था। यही वजह रही कि इस मंदिर के पूरा होने में चालीस साल का समय लग।

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नेपाल से मंगाई गई थी लकड़ियां
मंदिर का निर्माण नेपाल से आए कारीगरों ने किया था। मंदिर निर्माण में प्रयोग की गई लकड़ियों को भी राजा ने नेपाल से ही मंगवाया था। कारीगरों ने मंदिर में लगाई गई लकड़ियों पर बेहतरीन नक्काशी को उभारा। मंदिर के चारों तरफ लकड़ी का दरवाजा होने के साथ भित्ती से लेकर छत तक सबकुछ लकड़ी से बनाया गया है। इन लकड़ियों पर विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां उभारी गई हैं। जो देखने में बेहद आकर्षित करती हैं। नेपाल के मंदिरो की तर्ज पर ही इस मंदिर के बाहर भी एक बड़ा सा घंटा भी है। वहीं दक्षिण द्वार के बाहर पत्थर का नंदी बैल भी है। पशुपतिनाथ का यह मंदिर सुबह काशी के अन्य मंदिरों के समय ही खुलता और बंद होता है।

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