{"_id":"5b5aee774f1c1b54638b4eef","slug":"varanasi-muslim-womens-celebrated-gurupurnima-photos","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"गुरु पूर्णिमा: वाराणसी में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आरती उतारकर लिया गुरु का आर्शीवाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुरु पूर्णिमा: वाराणसी में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आरती उतारकर लिया गुरु का आर्शीवाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 27 Jul 2018 09:02 PM IST
विज्ञापन
guru purnima
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर धर्म और ज्ञान की नगरी काशी में थोड़ा अलग नजारा दिखा। सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए वाराणसी में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपने गुरु का आर्शीवाद लिया। इस दौरान मुस्लिम महिलाओं ने अपने गुरु की आरती भी उतारी। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
guru purnima
- फोटो : अमर उजाला
गुरु पूर्णिमा के मौके पर वाराणसी के पातालपुरी मठ का नजारा बदला-बदला नजर आया। यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग पीठाधीश्वर महंत बालकदास का सम्मान कर उनका आशीर्वाद लेने पहुंचे। उनका कहना है कि यह भारत भूमि है, ऐसे में हम जाति धर्म और संप्रदाय से ऊपर उठ कर गुरु की पूरे विधि विधान से पूजा करते हैं।
guru purnima
- फोटो : अमर उजाला
यह दृश्य भले ही गुरु शिष्य परंपरा निर्वहन का है मगर पातालपुरी मठ हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक स्थल बन गया। काशी में गुरु-शिष्य परंपरा के अनूठे समागम के लिए सुबह से ही आश्रम-मठों के बाहर कतारें लग गईं। दिन चढ़ने के साथ बारिश के बावजूद भी शिष्यों की भीड़ बढ़ती गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
gurupurnima
- फोटो : अमर उजाला
महान संत कबीरदास जी ने कहा था, गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पांव, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दिये बताय। कबीरदास जी मध्यकालीन धर्म सुधारक रामानंद के शिष्य थे। रामानंद ने धर्म और जाति का भेद खत्म कर ईश्वर की भक्ति का संदेश दिया था। कबीरदास जी उन्हीं के शिष्य थे। रामानंद के शिष्य नरहरिदास ने वाराणसी के पातालपुरी मठ की स्थापना की थी।
विज्ञापन
gurupurnima
- फोटो : अमर उजाला
मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी के नेतृत्व में मुस्लिम महिलाओं ने महंत बालकदास जी की आरती उतारी। उन्हें अंगवस्त्रम और गुलाब का फूल देकर आर्शीवाद लिया। इस अवसर पर बाबा बालकदास ने कहा कि आज से 500 साल पहले रामानंद जी ने कबीर को शिष्य बनाकर जो परंपरा शुरू की थी, आज वही परंपरा भारत की राष्ट्रीय एकता के लिए जरुरी बन गई है।