वाराणसी नगर निगम की कार्यकारिणी ने शुक्रवार को शहर के विकास के लिए 700 करोड़ रुपये के बजट पर मुहर लगाई। पहली बार कुत्तों की नसबंदी और बंदरों को पकड़ने के लिए नया मद बनाया गया। शहर में जगह-जगह लगी महापुरुषों की प्रतिमाओं की अब हर दिन साफ-सफाई और माल्यार्पण किया जाएगा। इसके लिए पांच लाख रुपये का अतिरिक्त बजट होगा। करीब पांच घंटे तक चली बैठक को महापौर मृदुला जायसवाल ने शनिवार को 12.30 बजे तक स्थगित कर दिया।
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लंका चौराहे पर मालवीय जी की प्रतिमा।
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कार्यकारिणी कक्ष में महापौर मृदुला जायसवाल की अध्यक्षता में शुक्रवार दोपहर 12 बजे पुनरीक्षित बजट पर चर्चा के लिए बैठक शुरू हुई। शहर में बढ़ रहे कुत्तों और बंदरों के आतंक से राहत के लिए पार्षदों ने अलग बजट की मांग की थी। पार्षदों की मांग पर दो मदों का सृजन किया गया है, इसमें कुत्तों की नसबंदी और बंदरों को पकड़ने की कवायद होगी। इससे शहर में आए दिन बंदरों और कुत्तों के आतंक से जनता को राहत मिलेगी।
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वाराणसी नगर निगम
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पहली बार शहर के कुंडों की साफ-सफाई और रखरखाव के लिए भी बजट में प्रावधान निर्धारित किया गया है। इस प्रावधान से पूरे वर्ष कुंडों की साफ-सफाई का काम होगा। इसी क्रम में पार्षदों के क्षेत्र में विकास के लिए बीस करोड़ की व्यवस्था की गई है। बचे हुए कार्यकाल में पार्षदों को 50 करोड़ रुपये के विकास कार्य का लाभ मिलेगा। शहर में स्थापित 22 महापुरुषों की प्रतिमाओं पर प्रतिदिन साफ-सफाई और माल्यार्पण के लिए पांच लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
उद्यान विभाग की ओर से प्रतिदिन इन मूर्तियों की साफ-सफाई और माला पहनाने का काम किया जाएगा। पहले इस मद में कुछ ना होने से मूर्तियों की साफ-सफाई माला बनाने का काम विशेष अवसरों पर ही हो पाती थी। बजट बैठक में अनावश्यक मद को घटा करके एक जगह पर उन्हें समेटा गया है। कई मदों का एकीकरण किया गया है।
मुख्य अभियंता को सीसी रोड बनाने के लिए मिलने वाले एक करोड़ रुपये को भी समेट कर एक जगह कर दिया गया है। स्थापना निधि में भी बदलाव किया गया है और अनावश्यक खर्च भी कम करके बजट को कम किया गया है।