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अमानवीय अंधविश्वासों को खिलाफ जंग छेड़ने वाली स्वाति को काका साहेब कालेलकर सम्मान

Sat, 23 Dec 2017 02:01 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Sat, 23 Dec 2017 02:01 PM IST
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swati singh will get kakasaheb kalelkar.award
periods - फोटो : अमर उजाला
महिलाओं को उनके अधिकार के प्रति जागरूक करने वाली स्वाति सिंह को काका साहेब कालेलकर पुरस्कार के लिए चुना गया है। काशी की इस बेटी ने पितृसत्तात्मक समाज के खिलाफ नारी शक्ति में न केवल ज्ञान की ज्योति जला रखी है बल्कि कई सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ चुप्पी तोड़ना भी सिखा रही हैं।  आगे की स्लाइडस् में जानिए...
swati singh will get kakasaheb kalelkar.award
swati - फोटो : अमर उजाला
शहर से दूर गांव की महिलाओं, खास तौर से युवतियों के बीच वे मासिक धर्म से जुड़े मिथक और भ्रांतियां दूर कर रही हैं। इससे जुड़े अमानवीय अंधविश्वासों और अवधारणाओं के खिलाफ चेतना फैलाने में जुटी इस युवा समाजसेवी को इस मुहिम के लिए पुरस्कार से नवाजा जा रहा है। गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा और विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान की ओर से शनिवार को नई दिल्ली में उन्हें यह सम्मान दिया जाएगा। 

 
swati singh will get kakasaheb kalelkar.award
swati - फोटो : अमर उजाला
आम तौर पर समाज मासिक धर्म पर बात करने से गुरेज करता है लेकिन स्वाति इस मसले पर खुलकर चर्चा करती हैं। स्वाति कहती हैं कि सदियों से छिपाई जाने वाली बात के खिलाफ चुप्पी तोड़ना, लड़कियों की झिझक खत्म कर इस मुद्दे पर बात करने को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से साल भर पहले ‘मुहिम : एक सार्थक पहल’ की शुरुआत की गई।

 
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swati - फोटो : अमर उजाला
 बनारस के असवारी, नागेपुर, खुशीपुर, भदवड़, सिहोरवां, फरीदपुर जैसे तमाम गांवों में ये मुहिम चलाई जा रही है। स्वाति कहती हैं कि शहर से ज्यादा इस मुद्दे पर काम करने की जरूरत हमने गांव में समझी। अवलेशपुर निवासी स्वाति ने बीएचयू से समाजशास्त्र से बीए किया और इसके बाद पत्रकारिता से स्नातकोत्तर। पढ़ाई के दौरान ही उनका महिलाओं के हक, अधिकार, उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य पर जोर रहा। 

 
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swati - फोटो : अमर उजाला
गर्ल्स फॉर चेंज, साथ बढ़ते हैं, मेरी रात मेरी सड़क, बचपन बचाओ जैसे अभियान से जुड़कर स्वाति ने लड़कियों की सुरक्षा, आत्मरक्षा के साथ उन्हें समानता का हक दिलाने के अभियान से जुड़ी रहीं। इन समस्याओं पर उनकी कलम भी खूब चलती है। इसी साल फरवरी में उनकी पहली पुस्तक ‘कंट्रोल जेड’ भी आई है जिसमें उन्होंने भूली-बिसरी शख्सियतों को याद किया है। 
 
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