चौदह वर्ष बाद लंका जीत कर अयोध्या लौटे भगवान राम के राज्याभिषेक की लीला रामनगर में अविस्मरणीय छटा की साक्षी बन गई। भोर की आरती की झलक पाने के लिए आस्था का जन समुद्र उमड़ पड़ा। रामनगर चौराहे से लेकर दुर्ग से होकर शास्त्री चौक तक कहीं तिल रखने की जगह नहीं बची। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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- फोटो : अमर उजाला
आरती के समय मशाल की रोशनी में किले से नंगे पांव काशिराज अनंत नारायण सिंह अयोध्या के लिए निकले तो धक्कामुक्की से कई बार असहज स्थिति बनी भगवान के दर्शन की श्रद्धा में आतुर लोग टस से मस नहीं हुए। उस भीड़ में जहां तक नजर जाती सिर्फ लोगों के सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे।
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मेहताबी रोशनी में भगवान की आरती होने के साथ ही रामनगर का कोना-कोना हर हर महादेव के गगनभेदी जयाकारों से गूंज उठा। राम राज्याभिषेक की लीला देखने के बाद विख्यात भोर की आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं ने रतजगा किया। दीवारों, छतों से लेकर बुर्जियों और चबूतरों, मंदिरों में हजारों लोग जहां-जहां डेरा डाल दिए।
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कहीं दादरा, ठुमरी के बोल पर भजन तो कहीं कीर्तन शुरू हो गया। मेले में भीड़ बढ़ती और निखतरी गई। रात भर लोग सड़कों पर भोर की आरती के नयनाभिराम क्षणों का बेसब्री से इंतजार करते रहे। नंदीग्राम मंदिर पर रामायणी मानस पाठ का आनंद ले रहे थे। तो शास्त्री चौक के पास मंदिर परिसर में भजन गायन का अलग रस था।
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पूरब में अरुणोदय की लाली प्रस्फुटित होने वाली थी कि किले के द्वार पर डंका बजने लगा। मशालची मशाल लेकर चल पड़े। उनके पीछे काशिराज नंगे पांव आरती स्थल के लिए सड़क के दोनों किनारों पर खड़ी कतारबद्ध भीड़ का अभिवादन करते निकले। भीड़ के बीच से सुरक्षा घेरे में उनको अयोध्या जी के मैदान पहुंचाया गया।