इसी साल जनवरी में एटीएस द्वारा चंदौली जिले से गिरफ्तार किया गया राशिद अपनी प्रेमिका को पाने की चाहत में आईएसआई का एजेंट बन गया था। राशिद पाकिस्तान में रह रहे अपने मामा की लड़की से प्यार करता था। घर वालों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। इसकी जानकारी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को हुई और फिर आईएसआई व डिफेंस के एक अधिकारी ने उसकी शादी उसकी प्रेमिका से कराने का वादा कर भारत से गोपनीय सूचनाएं मंगाने लगे।
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राशिद का पासपोर्ट(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
जानकारी के अनुसार राशिद 2017 और 2018 में दो बार वह पाकिस्तान में अपनी मौसी हसीना बेगम के पास गया था और कराची में रुका था। वहीं पर राशिद के मामा नजीर भी रहते थे, जिनकी बेटी से वह प्यार करने लगा। लेकिन मामा को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। राशिद का मौसेरा भाई शाहजेब आईएसआई और पाकिस्तानी डिफेंस के संपर्क में था।
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राशिद और उसका पासपोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
शाहजेब ने राशिद की प्रेम कहानी आईएसआई और पाकिस्तानी डिफेंस के आसिम और आमद को बताई और फिर शाहजेब ने ही राशिद की मुलाकात इन दोनों से कराई। आसिम और आमद ने उसकी प्रेमिका से शादी कराने का वादा किया और इसके बदले भारत के महत्वपूर्ण व संवेदनशील स्थानों की की फोटो, नक्शे और सेना के मूवमेंट की जानकारी मांगी गई। इसके बदले राशिद को पैसे भी देने का वादा किया गया।
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isi agent
- फोटो : सोशल मीडिया
राशिद भारत वापस आकर आईएसआई और पाकिस्तानी डिफेंस के लिए काम करने लगा। उसने कई महत्वपूर्ण स्थानों और धार्मिक स्थलों की तस्वीरें पाकिस्तान में बैठे आईएसआई और डिफेंस के अधिकारियों को भेजी। उसने दो फोन नंबरो को एक्टिवेट करा कर पाकिस्तान में आसिम और आमद को व्हाट्स एप चलाने के लिए ओटीपी बताया। यानी नंबर भारत का था और उस पर व्हाट्स एप पाकिस्तान में चल रहा था। इसके बदले राशिद को पांच हजार रुपये भी भेजे गए थे। राशिद इन्हीं व्हाट्स एप नंबरों पर संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें और नक्शे पाकिस्तान को भेजता रहता था।
करीबियों की जुटाई जा रही जानकारी
एनआईए राशिद के करीबियों की भी जानकारी जुटा रही है। जिस पेटीएम खाते में पैसे भेजे गए थे, उस मोबाइल धारक से भी जल्द ही पूछताछ की जा सकती है। हालांकि एटीएस की जांच के दौरान सामने आया था कि जिन लोगों के नाम से सिम कार्ड खरीदे गए थे और जिसके पेटीएम का इस्तेमाल पाकिस्तान से पैसा मंगाने के लिए किया गया था, उन्हें राशिद के द्वारा की जा रही जासूसी के बारे में जानकारी नहीं थी। इसी आधार पर एटीएस ने पूछताछ के बाद बाकी लोगों को छोड़ दिया था।