कोरोना वायरस के चलते बनारस की परंपराएं लगातार टूटती जा रही हैं। वहीं विजयदशमी पर भी शहरभर में रावण दहन के लिए 259 लोगों ने रावण दहन की अनुमति प्रशासन से मांगी ली है। प्रशासनिक निगरानी में रावण दहन तो होगा, लेकिन विजयदशमी पर लगने वाला मेला नहीं लगेगा।
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मलदहिया चौराहे पर रावण दहन, फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
असत्य पर सत्य की विजय का त्योहार विजयादशमी आज मनाया जा रहा है। सामूहिक रावण दहन की बजाय सोसइटी और कम लोगो के समूह के रूप में रावण दहन करने की योजना बनाई है। इसके लिए प्रशासन से 259 लोगों ने अनुमति ले ली है।
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रामनगर रामलीला का रावण दहन, फाइल फोटो।
एडीएम सिटी गुलाबचंद ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से आयोजकों को सशर्त अनुमति दी गई है। कोरोना गाइडलाइन का पालन हो सके इसके लिए रावण दहन के आयोजन जिला प्रशासन की निगरानी में कराए जाएंगे। इसके लिए मजिस्ट्रेटों को जिम्मेदारी दी गई है। हर साल की तरह विजयादशमी पर भी काशी कमें डीरेका, मलदहिया, चौकाघाट सहित अन्य जगहों पर रावण दहन के आयोजन होते हैं।
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डीरेका में रावन।
- फोटो : अमर उजाला
लेकिन इस साल इन स्थानों पर समितियों ने अपने आयोजन निरस्त कर दिए हैं। आवेदन करने वालों को जिला प्रशासन ने सशर्त अनुमति दी है। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि दशहरा के मेले का आयोजन नहीं होगा। लेकिन परंपरा के अनुसार, रावण के आयोजन में भी 200 से अधिक लोग एक साथ नहीं रहेंगे।
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नाटी इमली का भरत मिलाप को देखने पहुंचे श्रद्धालु, फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
टूटी ये परंपराएं :
कोरोना के चलते नाटी इमली का विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप इस साल भी नहीं होगा। वहीं 237 साल से होती आ रही रामनगर की रामलीला भी कोरोना की वजह से नहीं हुई। अंग्रेजों के जमाने से शुरू हुई बंगाली ढ्योढी में दुर्गा पूजा में पहली बार माता की प्रतिमा स्थापित नहीं की जा रही है। ढाई सौ साल पहले 1773 ईस्वी में बंगाली ड्योढ़ी से ही बनारस में सबसे पहले दुर्गा पूजा की शुरूआत हुई थी।