काशी एवं तमिलनाडु से आए कलाकारों ने विविध और मनोहारी प्रस्तुतियों से उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता को जीवंत किया। नमो घाट के मंच पर संस्कृति मंत्रालय की ओर से उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज एवं दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से 13वें दिन रविवार को मुक्ताकाशीय मंच पर सांस्कृतिक आयोजन हुआ।
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काशी तमिल संगमम् 4.0
- फोटो : अमर उजाला
रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रथम प्रस्तुति निश्चल कुमार उपाध्याय के गायन की रही। तबले पर भानुशंकर चौबे तथा सह-गायन में दिवित दुबे ने संगत की। द्वितीय प्रस्तुति डॉ. पूनम शर्मा की रही। उन्होंने देवी गीत निबिया की गछिया… से गायन का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात दादरा शैली में नाही मारो नजरिया के बाण… की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस प्रस्तुति में तबले पर राकेश रोशन, ढोलक पर अमित, बेंजो पर संजय, पैड पर राहुल कुमार तथा सह-गायन में खुशी कुमारी, एंजल केशरी, काव्या मुखर्जी एवं दिव्या शर्मा ने प्रभावशाली संगत की।
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काशी तमिल संगमम् 4.0
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तृतीय प्रस्तुति तमिलनाडु से आए आर. सतीश के पारंपरिक ओइलियट्टम एवं करगम लोक नृत्य की रही। चतुर्थ प्रस्तुति नई दिल्ली की वैष्णवी के भरतनाट्यम नृत्य की रही। इसमें कलाकार वैष्णवी, लक्ष्मी एवं प्रानथी ने शास्त्रीय नृत्य की भाव-भंगिमाओं से दर्शकों को अभिभूत किया।
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काशी तमिल संगमम् 4.0
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पंचम प्रस्तुति वाराणसी की शिवानी मिश्रा के कथक नृत्य की रही। जिसमें शिवानी मिश्रा, सौरभ त्रिपाठी, करिश्मा केसरी, सृष्टि तिवारी, रानू चौबे, प्रिंसी, नौशीन अंसारी, जाह्नवी राय, सुरभि जैस एवं अंकित कुमार ने समूह नृत्य के माध्यम से कथक की सजीव प्रस्तुति दी। छठी एवं अंतिम प्रस्तुति तमिलनाडु के आर. सतीश द्वारा डमी हॉर्स एवं कावड़ीअट्टम लोक नृत्य की रही।
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गंगा की कविता और कावेरी के दर्शन वाला ही शिक्षित भारतीय मन : डॉ. सुकांत मजूमदार
आज की पीढ़ी को भाषा की दीवारों को तोड़ना होगा। जिस मन में गंगा की कविता और कावेरी का दर्शन एक साथ समाहित हो जाए, वही वास्तव में शिक्षित भारतीय मन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक भारत, श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना के तहत आयोजित काशी तमिल संगमम प्रेरक पहल है जो दक्षिण और उत्तर को एक कर रही है। काशी तमिल संगमम एक भारत–श्रेष्ठ भारत की भावना का सजीव और अनुभवात्मक उदाहरण है। उक्त बातें केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने कहीं।