बीएचयू के 105वें दीक्षांत समारोह के दूसरे दिन शनिवार को पांच संकायों, 60 से ज्यादा विभागों और दो कॉलेजों के उत्तीर्ण 400 ज्यादा छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल और आठ हजार उपाधियां दी गईं। स्वतंत्रता भवन में कला संकाय की ओर से 22 विभागों की 2428 उपाधियां और 112 गोल्ड मेडल दिए गए।
उपाधि धारकों में स्नातक के 1234, परास्नातक के 1012 और पीएचडी के 182 विद्यार्थी शामिल रहे। वहीं, वाणिज्य संकाय के फैकल्टी सभागार में 1281 उपाधियां और संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के मेन हॉल में 301 उपाधियां दी गईं। संबोधि सभागार में सामाजिक विज्ञान संकाय में 2000 से ज्यादा उपाधियों से विभूषित किया गया।
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अपनी-अपनी डिग्रियां दिखातीं छात्राएं।
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वीकेएम कमच्छा की तीन मेधावियों को गोल्ड मेडल
वसंत कन्या महाविद्यालय कमच्छा में तीन छात्राओं को पांच गोल्ड मेडल से नवाजा गया। इसमें एमए हिंदी की प्राची सिंह, बीए प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं पुरातत्व की स्वाति पांडेय और बीए समाजशास्त्र की राशि दुबे शामिल थीं। वहीं हिंदी और गृह विज्ञान की तीन पीएचडी उपाधियां दी गईं।
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल और रेक्टर प्रो. संजय कुमार ने छात्रों को मेडल पहनाकर उपाधियों से विभूषित किया। प्राचार्य प्रो. रचना श्रीवास्तव और प्रबंधक उमा भट्टाचार्य ने कहा कि आप जहां भी जाएं, अपने ज्ञान, संस्कार और आचरण से इस संस्थान का नाम रोशन करें।
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दीक्षांत समारोह में मेडल और उपाधि पाने वाले छात्र-छात्राएं।
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बीआर मणि के दादा रहे महामना के निजी सचिव
कला संकाय के दीक्षांत के दौरान स्वतंत्रता भवन में डीन प्रो. सुषमा घिल्डियाल और मुख्य अतिथि प्रख्यात पुरातत्वविद और भारतीय विरासत संस्थान नोएडा के कुलपति प्रो. बीआर मणि ने विद्यार्थियों को मेडल और उपाधियां दीं।
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मुन्नजा, नेहा और जागृति।
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इस दौरान प्रो. मणि ने कहा कि 1983-84 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में चयन के बाद उन्हें बीएचयू से जाना पड़ा। लेकिन आज भी वही उत्साह और प्रेम है। परिवार की तीन पीढ़ियों का इतिहास रहा है।पितामह पं. चंद्रबली त्रिपाठी महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी के निजी सचिव रहे। इस दौरान हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ अनूप, पुरातत्व विभागाध्यक्ष प्रो. एमपी अरिहवार, प्रो. आरती निर्मल और डाॅ. सिद्धिदात्री आदि मौजूद रहीं।
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प्रियंका गुप्ता और सुमित प्रताप सेंगर।
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स्वतंत्रता भवन सभागार में कुछ छात्रों ने फोड़े पटाखे
स्वतंत्रता भवन सभागार के बाहर कुछ छात्रों ने उपाधियां लेने के बाद पटाखे बजाए तो प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों ने उसे बंद कराया। वहीं, पूरे कैंपस में डीजे डांस रोकने के लिए पुलिस तैनात की गई थी। कुछ छात्रों ने शुक्रवार रात ढोल-नगाड़ों के साथ निकलने का फैसला किया था लेकिन बीती रात इसी संकाय के एक छात्र के एक्सीडेंट में मौत हाेने के चलते टाल दिया गया।