फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

अड़भंगी शहर बनारस की होलिकाएं भी अनोखी, कोई गंगा से प्राचीन तो कोई 14वीं शताब्दी की

Sun, 28 Mar 2021 05:13 PM IST
हरि User आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: हरि User Updated Sun, 28 Mar 2021 05:13 PM IST
विज्ञापन
Holikas are unique in varanasi some ancient from the Ganges
वाराणसी में यूपी कालेज के सामने चौराहे पर सजाई गई होलिका - फोटो : अमर उजाला
काशी की अड़भंगी होली का रंग देश भर में अनूठा है। बाबा विश्वनाथ जहां अपने भक्तों के संग रंगों से होली खेलते हैं तो अपने गणों के साथ चिता-भस्म से। इसी तरह काशी की होलिकाओं का भी अपना अलग ही अंदाज है। गंगा घाट से लेकर वरुणा पार तक काशी ने अपनी प्राचीनता को संजो कर रखा है।


विश्व की प्राचीनतम नगरी काशी में होलिकाओं का स्वरूप भी उतना ही प्राचीन है। हर मोहल्ले, चौराहे और गलियों में होलिका दहन की परंपरा निभाई जाती है। काशी में कई होलिकाएं ऐसी भी हैं जो कई सदियों से जलती आ रही हैं। शीतलाघाट की होलिका जहां गंगा से भी प्राचीन मानी जाती है वहीं कचौड़ी गली की होलिका 14वीं शताब्दी से जलती आ रही है। आगे की स्लाइड्स में जानते हैं इनके बारे में...

कचौड़ी गली में रखी गई थी पहली प्रह्लाद की प्रतिमा

Holikas are unique in varanasi some ancient from the Ganges
गोबर के उपले से तैयार भोजूबीर की होलिका में भक्त प्रह्लाद को होलिका के गोद में बैठी मूर्ति लगाई गई है। - फोटो : अमर उजाला।
कचौड़ी गली के नुक्कड़ पर जलने वाली होलिका का इतिहास 14वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने दादा-परदादा और पुरनियों से इस होलिका के बारे में सुना था। काशी में यहीं से होलिका में प्रह्लाद की पहली प्रतिमा रखने की शुरुआत हुई थी। यहां घर-घर से लकड़ियों व कंडे का अंशदान होलिका में प्रदान किया जाता है।

 

शीतलाघाट पर जलती है पहली होलिका

Holikas are unique in varanasi some ancient from the Ganges
शीतलाघाट की होलिका का रुद्र सरोवर के दौर से जलाने की परंपरा चली आ रही है। केंद्रीय देव दीपावली समिति के अध्यक्ष वागीश शास्त्री ने बताया कि शीतला घाट पर जलाई जाने वाली होलिका का इतिहास काशी में सबसे अधिक प्राचीन है। अपने बुजुर्गाें से सुनते रहे हैं कि कई पीढ़ियों से यहां पर होलिका दहन किया जा रहा है। मान्यताओं की बात करें तो होलिका दहन तब से हो रहा है जब से काशी में गंगा की जगह रुद्र सरोवर हुआ करता था।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

अनोखी है होली और होलिका दहन

Holikas are unique in varanasi some ancient from the Ganges
शहर में सजाई गई होलिका
चिता भस्म की अनोखी होली के लिए मशहूर मणिकर्णिका घाट की होलिका दहन का इतिहास भी सदियों पुराना है। बाबा मशाननाथ मंदिर के व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने बताया कि जब से काशी में चिताएं जल रही हैं तब से यहां पर होलिका का दहन भी होता आ रहा है। होलिका दहन के अलावा होली का स्वरूप भी यहां पर अनोखा है।

 
विज्ञापन

तिजहरिया से निकलता था जुलूस

Holikas are unique in varanasi some ancient from the Ganges
असि की होलिका दहन का स्वरूप भी सबसे अनूठा है। यहां पर रंगों की पुड़िया व मिठाइयां होलिका दहन पर बांटी जाती थी। अस्सी निवासी आरके पाठक ने बताया कि अस्सी पर जगन्नाथ मंदिर के नजदीक जलने वाली होलिका का इतिहास भी सदियों से जुड़ा है।

बुजुर्ग बताते थे कि होलिका की तिजहरिया से ही नगाड़ों का जुलूस चंदा मांगने निकल जाता था। होलिका दहन के पश्चात पूरे मोहल्ले के बच्चों को मिठाइयां, रंगों की पुड़िया बांटने की रस्म निभाई जाती थी। हालांकि अब यह परंपरा बस नाममात्र की ही बची है।

 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed