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गोपाल दास नीरज का था पूर्वांचल से गहरा नाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 21 Jul 2018 02:03 PM IST
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gopal das neeraj
प्रख्यात गीतकार गोपालदास नीरज का पूर्वांचल से गहरा नाता था। वह अक्सर ही वाराणसी, गाजीपुर, बलिया, सोनभद्र, जौनपुर में किसी न किसी कार्यक्रम में भाग लेने आया करते थे। बृहस्पतिवार शाम उनके निधन की सूचना पहुंची तो साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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बलिया जिले में कवि गोपाल दास नीरज का दो बार आना हुआ था। दोनों ही बार वह ऐतिहासिक ददरी मेला में आए। साहित्यकार शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने कहा कि नीरज कविताएं रचने में माहिर थे। भोजपुरी के साहित्यकार और शब्दिता पत्रिका के संपादक डा. कमलेश राय ने बताया कि वीर रसवतार पंडित श्यामनरायण पांडेय द्वारा मऊ मुख्यालय स्थित हिंदी भवन में एक साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसमें उनके आमंत्रण पर गोपालदास नीरज पहुंचे थे।
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साहित्यकार जयप्रकाश धूमकेतू ने कहा कि नीरज जी की मौत अपूरणीय क्षति है। उन्होंने हिंदी के उत्थान के लिए बहुत काम किया। साहित्यकार राघवेंद्र सिंह ने कहा कि एक दो मंचों पर उन्हें गोपालदास के साथ गीत पढ़ने का मौका भी मिला है।
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गोपाल दास नीरज
गोपाल दास ने राबर्ट्सगंज में मधुरिमा साहित्य गोष्ठी की तरफ से आयोजित होने वाले कवि सम्मेलन की 20 वर्ष तक मंच की अध्यक्षता की। बीमारी के चलते 2010 के बाद वह राबर्ट्सगंज नहीं आ सके, लेकिन उनकी यादें अब भी लोगों के जेहन में जिंदा है। मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के निदेशक साहित्यकार अजय शेखर ने कहा कि उनके निधन से उन्हें व्यक्तिगत क्षति पहुंची है।
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गोपाल दास नीरज
गोपाल दास नीरज का जौनपुर से भी गहरा लगाव था। 1964 से लेकर 2016 तक वह जिले में आयोजित कई कवि सम्मेलनों में हिस्सा लेने आए थे। नौ मार्च 2016 में कवि रूपनारायण त्रिपाठी के जगतगंज स्थित आवास पर आयोजित पुण्य तिथि कार्यक्रम में अंतिम बार आए थे। टीडी कालेज के प्राचार्य डा. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि वह छायावादोत्तर धारा के कवि थे।