Varanasi News: बीएचयू के 105वें दीक्षांत समारोह में 29 मेधावियों को बीएचयू गोल्ड मेडल से नवाजा गया। इसमें 20 छात्राएं और नौ छात्र हैं। मेडिसिन से लेकर शास्त्रों की पढ़ाई के मेधावी इसमें शामिल हैं। एमए (संस्कृत) की टॉपर अनुराधा द्विवेदी और बीपीए के टॉपर तुहीन पार को चांसलर, महाराजा विभूति नारायण और बीएचयू मेडल से नवाजा गया।
नीति आयोग के सदस्य और डीआरडीओ के पूर्व सचिव मुख्य अतिथि डॉ. विजय कुमार सारस्वत, कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, रेक्टर प्रो. संजय कुमार और कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह ने स्वतंत्रता भवन सभागार के मंच से मेधावियों को मेडल पहनाकर स्नातक, परा स्नातक और पीएचडी की उपाधियों से सम्मानित किया।
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छात्राओं ने ली सेल्फी।
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अपने दीक्षांत भाषण में मुख्य अतिथि डॉ. वीके सारस्वत ने कहा कि हमने रिसर्च प्रकाशित कर लिया और खुश हो लिए, ऐसा न हो। उस रिसर्च को उत्पाद में बदलकर बाजार तक पहुंचा दें तो ही रिसर्च पूरा होगा। हमारे विश्वविद्यालयों के लोग बाहर से तकनीक लाते हैं और रिसर्च करते हैं। लेकिन, स्वदेशी सोच के साथ बहुत कम काम हुआ है।
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छात्राओं को उपाधिक देते गुरुजन।
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दशकों से हम औद्योगिक क्षमता, रिसर्च आउटपुट और वैश्विक प्रभाव में पिछड़ेपन की भरपाई करते रहे हैं, लेकिन वह युग अब बीत चुका है। अब 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करना है। अब हम वैश्विक एजेंडा सेट करेंगे। हमें जो विकास करना है वो समावेशी हो।
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डाॅ. विजय सारस्वत और प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी।
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इनोवेटर्स से आंत्रप्रेन्योर बनें, आइडिया को इंटरप्राइजेज बनाएं: डॉ. सारस्वत ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप आज सिर्फ डिग्री नहीं हासिल कर रहे, बल्कि बहुत बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत कर रहे हैं। आप देश के आर्किटेक्ट बनेंगे। नवाचार के पीछे सिर्फ तकनीक ही नहीं होती बल्कि ये दुनिया को अलग नजरिये से देखने का जज्बा होता है। डिजाइन थिंकिंग समाज को नजदीक से समझने के लिए प्रेरित करती है। आप इनोवेटर्स से आंत्रप्रेन्योर बनिए।
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मेडल और उपाधि पाकर चहर उठे छात्र-छात्राएं।
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डॉ. सारस्वत ने बताए अच्छे नेतृत्वकर्ता के पांच गुण: डॉ. सारस्वत ने कहा कि अच्छा नेतृत्वकर्ता वही है जिसमें अखंडता, समानुभूति, अनुशासन, आजीवन सीखने की ललक और सहयोगी की भावना होगी।
बीएचयू में एक साल में 4,980 शोध पत्र प्रकाशित, 115 नए प्रोफेसरों ने किया जाॅइन : कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने बीएचयू की एक साल की उपलब्धियां गिनाईं। कहा कि एक साल में 4,980 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। बीएचयू का साइटेशन एक लाख हो चुका है।