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बलिया हत्याकांड: लहू की प्यासी बनी कोटे की दुकान, चयन के लिए हो रही थी राजनीति, जानें क्या था पूरा मामला?
Fri, 16 Oct 2020 01:19 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 16 Oct 2020 01:19 PM IST
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बलिया में युवक की हत्या का मामला
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रेवती थानाक्षेत्र के दुर्जनपुर गांव के पंचायत भवन में बृहस्पतिवार को कोटे की दुकान के चयन के लिए खुली बैठक में एसडीएम, सीओ, एसओ व अन्य पुलिसकर्मियों के सामने भाजपा कार्यकर्ता धीरेंद्र प्रताप सिंह ने एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी। इस दौरान ईंट-पत्थर और लाठी-डंडे भी चले। इसमें छह लोग घायल हो गए।
आरोपी को पकड़ती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
बीते चार सालों से बलिया जिले के दुर्जनपुर गांव में विवाद का कारण रही कोटे की दुकान गुरुवार को लहू की प्यासी बन गई। जिसमें न सिर्फ एक को अपनी जान गंवानी पड़ी, बल्कि आधा दर्जन को अपना खून भी बहाना पड़ा। इतना सबकुछ इतनी तेजी से घटित हुआ कि न तो प्रशासन को कुछ करने का मौका मिला और ना ही ग्रामीणों को संभलने का मौका मिला।
बलिया हत्याकांड में हुई मारपीट
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि, खूनी संघर्ष अनायास व अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसकी पटकथा करीब चार वर्ष पूर्व से लिखी जा रही थी। इसे जिंदा रखने के लिए शासन और सत्ता ने समय-समय पर अहम किरदार अदा किया। अलबत्ता, दुकान के आंवटन के लिए गांव के पंचायत भवन में हुई बैठक तो बेनतीजा समाप्त हो गई, लेकिन मौत अपना निशां जरुर छोड़ गई।
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बलिया हत्याकांड में हुई मारपीट
- फोटो : अमर उजाला
विकास खण्ड बैरिया अंतर्गत दुर्जनपुर ग्राम पंचायत अंतर्गत दो सस्ते गल्ले की दुकान के कारण गांव में विगत चार वर्षों से तनाव था। विधानसभा चुनाव के बाद बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह के कार्यकर्ता धीरेंद्र सिंह डब्लू व पूर्व प्रधान नथुनी यादव वैगरह कोटे की दुकान की शिकायत में जुट गए। इससे दुर्जनपुर ग्राम पंचायत अंतर्गत केंद्र हनुमानगंज के अजय कुमार यादव की दुकान 22 मई 2017 को निलंबित कर दी गई।
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बलिया हत्याकांड में हुई मारपीट
- फोटो : अमर उजाला
जबकि दुर्जनपुर के रामकुमार राम की दुकान 12 अप्रैल 2019 को निलंबित की गई। दोनों दुकानों को एक सितंबर 2017 को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद दोनों दुकानों का मामला मंडलायुक्त आजमगढ़ के यहां चला गया।