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सोनभद्र नरसंहार: एक साल पहले हुआ था ऐसा कत्लेआम, सहम गई थी इंसानियत

Thu, 16 Jul 2020 11:41 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Thu, 16 Jul 2020 11:41 PM IST
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Sonbhadra's Umbha massacre incident completes one year
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

सोनभद्र जिले की घोरावल कोतवाली के उभ्भा गांव में 17 जुलाई 2019 को भूमि संबंधी विवाद में 11 आदिवासियों की हत्या होने के बाद प्रदेश सरकार ने घोषणाएं तो कीं, लेकिन घटना के साल भर बाद भी आश्रम पद्धति विद्यालय और पुलिस चौकी भवन की नींव तक नहीं रखी जा सकी है।



हालांकि घोषणाओं के अनुरूप विभिन्न मदों से प्रत्येक मृतक के आश्रित को करीब 18.50 लाख रुपये देने के साथ ही पीड़ितों और पात्रों को जमीन का पट्टा, आवास, शौचालय, राशनकार्ड, गोल्डन कार्ड आदि अवश्य उपलब्ध कराए गए हैं।

उभ्भा गांव में 17 जुलाई 2019 को एक सोसायटी की विवादित जमीन को लेकर दो पक्षों में लाठी-डंडे, गोली, धारदार हथियार चले थे। इसमें एक पक्ष से 11 लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा दोनों पक्ष के कई लोग घायल हो गए थे। घटना के अगले दिन 18 जुलाई को कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू उभ्भा पहुंच गए थे।
 

Sonbhadra's Umbha massacre incident completes one year
उभ्भा गांव में मौजूद लोग और पुलिस। - फोटो : अमर उजाला।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के उभ्भा जाने की सूचना मिलने पर मिर्जापुर जिला प्रशासन ने चुनार में ही उन्हें रोक दिया था। इसके बाद 21 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, मुख्य सचिव, डीजीपी समेत अन्य बड़े अफसर उभ्भा पहुंचे।  दोबारा मुख्यमंत्री 13 सितंबर को उभ्भा पहुंचे और आदिवासियों को जमीन का पट्टा देने के साथ विभिन्न विकास योजनाओं की घोषणा की।

13 अगस्त को प्रियंका गांधी वाड्रा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी. राजा, सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा, भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण, वृंदा करात, सुभाषिनी अली समेत तमाम दिग्गज नेता उभ्भा पहुंचे थे। इस गोलीकांड के बाद सियासत गरमाने पर प्रशासन व पुलिस की सक्रियता भी कई दिनों तक बढ़ी रही लेकिन समय बीतने के साथ ही सक्रियता कम हो गई।
 

Sonbhadra's Umbha massacre incident completes one year
परिषदीय स्कूलों के छात्र - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश सरकार की तरफ से मृतक आश्रितों को विभिन्न मदों में करीब 18.50 लाख रुपये, घायलों को ढाई-ढाई लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। प्रत्येक परिवार को जमीन का पट्टा, आवास, शौचालय, बिजली, पेयजल आदि की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

हालांकि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की तरफ से भी प्रत्येक मृतक के आश्रितों को 10 लाख रुपये व घायलों को एक-एक लाख रुपये आर्थिक सहायता प्रदान की गई। सपा की तरफ से मृतक आश्रितों को एक-एक लाख रुपये व घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता दी गई। इसके बाद दूसरी बार 13 सितंबर 2019 को उभ्भा गांव आए मुख्यमंत्री ने पीड़ितों व ग्रामीणों को जमीन का पट्टा दिया था।

इसके साथ ही उन्होंने गांव के विकास के लिए 340 करोड़ रुपये की 35 परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण किया था। सीएम ने गांव में पुलिस चौकी बनाने, बच्चों के लिए आवासीय पं. दीनदयाल उपाध्याय आश्रम पद्धति विद्यालय की स्थापना की घोषणा की थी। लेकिन घटना हुए साल भर बीत गया और अब तक न तो आश्रम पद्धति विद्यालय की नींव रखी जा सकी है और न ही पुलिस चौकी भवन के लिए कोई काम शुरू हो पाया है।
 

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Sonbhadra's Umbha massacre incident completes one year
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पुलिस हिरासत में। - फोटो : अमर उजाला।
यह अलग बात है कि पुलिस चौकी भवन के लिए भूमि पूजन जरूर हो चुका है। वर्तमान में पुलिस चौकी उभ्भा गांव से करीब सात किलोमीटर दूर  कन्हारी मोड़ पर बने प्राथमिक विद्यालय से संचालित हो रही है। आश्रम पद्धति विद्यालय की स्थापना के लिए अभी तक कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ।

घोषणा के अनुसार नहीं मिली जमीन

उभ्भाकांड में मृतक अशोक की पत्नी पुष्पा, पूर्व ग्राम प्रधान बहादुर सिंह गोंड़, घायल कमलावती के पति रामपति, मृतका सुखवंती के भतीजे सुमेर, घायल विजय कुमार, मृतक रामसुंदर की पत्नी सितवा देवी, डबलू, शिवकुमारी आदि का कहना है कि सरकार ने 10 बीघा जमीन देने के लिए कहा था, लेकिन साढ़े सात बीघे जमीन का ही पट्टा मिला। गांव में लगा आरओ सिस्टम और सोलर एनर्जी सिस्टम खराब है।
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