‘माई विंध्यवासिनी अउर ज्वाला देवी के आसीरबाद लेवे के खातिर अउर अपने वनवासी समाज के भाई-बहिनी से मिले हम ई सोनांचल में आइल हईं।’ भोजपुरी में भाषण की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आगे कहा कि भारत की आत्मा ग्रामीण और वनवासी अंचलों में बसती है। यदि कोई भारत की जड़ों से परिचित होना चाहता है तो उसे सोनभद्र में कुछ समय जरूर बिताना चाहिए। वनवासी समुदाय के विकास के बिना देश के समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है।
यह बातें रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सेवा कुंज आश्रम में आयोजित वनवासी समागम को संबोधित करते हुए कहीं। कहा कि सही मायने में आप सबके विकास के बिना देश का विकास अधूरा है। केंद्र और राज्य सरकार से अपेक्षा की कि वनवासी समाज के पारंपरिक लोकनृत्य करमा को देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी पहचान दिलाने की दिशा में काम होगा।
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सोनभद्र में राष्टपति
- फोटो : अमर उजाला
अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा संबद्ध सेवा समर्पण संस्थान की ओर से संचालित सेवा कुंज आश्रम में सुबह करीब सवा दस बजे राष्ट्रपति पहुंचे। वनवासी छात्र-छात्राओं के लिए बने अंत्योदय छात्रकुल, बिरसा मुंडा वनवासी विद्यापीठ का लोकार्पण और 200 बच्चों के लिए बने छात्रावास का शिलान्यास करने के साथ राष्ट्रपति ने भूमि पूजन भी किया। इसके बाद समागम स्थल पहुंचे।
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सोनभद्र में राष्टपति
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अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि आने की इच्छा तो पिछले वर्ष ही थी लेकिन वैश्विक महामारी के कारण कार्यक्रम टालना पड़ा। इस वर्ष मां विंध्यवासिनी और ज्वालामुखी के आशीर्वाद से आने की इच्छा पूरी हुई है।
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सोनभद्र में राष्टपति
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उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण और भारत की ऊर्जा राजधानी के रूप में प्रसिद्ध सोनभद्र की धरती पर आप सभी का समागम अत्यंत महत्वपूर्ण है। भगवान बिरसा मुंडा को स्मरण करते हुए राष्ट्रपति ने उनके आदिवासियों व देश के लिए किए गए योगदान के बारे में बताया। बाला साहब देश पांडेय, अवधबिहारी के योगदान की चर्चा करते हुए सेवा कुंज आश्रम की सराहना की।
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सोनभद्र में राष्टपति
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कहा कि चार राज्यों से सटा पूर्वी उत्तर प्रदेश का यह स्थल एक दिन विकास का मुख्य केंद्र बनेगा। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र खराड़ी ने भी संबोधित किया।